मौजूदा अमेरिकी प्रशासन की पहली वर्षगांठ के अवसर पर चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) के अधीनस्थ चाइना ग्लोबल टेलीविज़न नेटवर्क (सीजीटीएन) द्वारा कराए गए कई वैश्विक सर्वेक्षणों में प्रशासन के प्रति व्यापक असंतोष सामने आया है। सर्वेक्षणों के अनुसार, घरेलू और विदेश नीति दोनों मोर्चों पर एक वर्ष के भीतर संतुष्टि का स्तर तेज़ी से गिरा है। विशेष रूप से नए साल की शुरुआत में अमेरिका द्वारा उठाए गए एकतरफा और दादागिरी वाले क़दमों ने उसकी राष्ट्रीय छवि को गहरी क्षति पहुँचाई है और वैश्विक शांति व स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती खड़ी की है।
सीजीटीएन ने 17 जनवरी को एक विश्वव्यापी जनमत सर्वेक्षण शुरू किया, जिसे अपने पाँचों भाषाई प्लेटफ़ॉर्म पर जारी किया गया। 24 घंटे के भीतर 16,990 लोगों ने इसमें भाग लेकर अपनी राय दर्ज कराई। सर्वेक्षण के नतीजों के अनुसार 84 प्रतिशत उत्तरदाता मौजूदा अमेरिकी प्रशासन से अत्यधिक असंतुष्ट हैं। इनमें से 86.2 प्रतिशत ने “अमेरिका फ़र्स्ट” विदेश नीति की तीखी आलोचना की। वहीं 89.6 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि पिछले एक वर्ष में अंतरराष्ट्रीय मामलों में अमेरिका का प्रदर्शन असफल रहा है, जबकि 88.8 प्रतिशत लोगों का कहना है कि मौजूदा प्रशासन ने दो दलों के बीच विभाजन और सामाजिक ध्रुवीकरण को और गहरा किया है।
अमेरिकी सरकार और उत्तरदाताओं के अपने-अपने देशों के बीच संबंधों को लेकर भी निराशाजनक तस्वीर सामने आई है। सर्वेक्षण में शामिल 83.9 प्रतिशत लोगों ने इन द्विपक्षीय संबंधों को लेकर नकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया। इसके अलावा 90.1 प्रतिशत उत्तरदाता अमेरिका और उसके पारंपरिक सहयोगियों के बीच रिश्तों के भविष्य को लेकर भी निराशावादी हैं। 91.3 प्रतिशत का मानना है कि बीते एक वर्ष में अमेरिका की राष्ट्रीय प्रतिष्ठा में उल्लेखनीय गिरावट आई है, जबकि 91.1 प्रतिशत लोगों ने मौजूदा प्रशासन के भविष्य के प्रदर्शन पर गहरा अविश्वास जताया है।
“असंतोष” अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा मौजूदा अमेरिकी प्रशासन के मूल्यांकन का एक प्रमुख शब्द बनकर उभरा है। सर्वेक्षणों के अनुसार, प्रशासन के कमजोर शासन और नीतिगत फैसलों ने अमेरिका की राष्ट्रीय छवि को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। अमेरिका की छवि पर केंद्रित एक अन्य सीजीटीएन सर्वेक्षण, जिसमें दुनिया के 38 देशों के 15,688 उत्तरदाताओं ने भाग लिया, में “ग़ैर-जिम्मेदार महाशक्ति” और “दुनिया में अराजकता का सबसे बड़ा स्रोत” जैसी धारणाएँ अमेरिका के प्रति सबसे गहरी छाप के रूप में सामने आईं।
2025 में किए गए एक सर्वेक्षण में 71.4 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि अमेरिका विदेश नीति बनाते समय अन्य देशों के हितों पर कभी विचार नहीं करता, जो एक वर्ष के भीतर 8.5 प्रतिशत अंकों की वृद्धि को दर्शाता है। इसी तरह 81.4 प्रतिशत लोगों ने टैरिफ़ के ज़रिए अन्य देशों के आंतरिक मामलों में अमेरिका के खुले हस्तक्षेप की आलोचना की, जो एक वर्ष में 5.7 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी को दर्शाता है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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