इंटरनेशनल डेस्क: जापानी प्रधानमंत्री ताकाइची साने ने हाल में कांग्रेस में थाईवान के बारे में खुलेआम गलत टिप्पणी की। ताकाइची साने ने कहा कि अगर थाईवान में संकट हुआ, तो जापान के लिए सामूहिक आत्मरक्षा अधिकार का प्रयोग करने वाला “अस्तित्व का संकट” पैदा होगा। इससे संकेत दिया गया है कि जापान संभवतः थाईवान जलडमरूमध्य में सैन्य हस्तक्षेप करेगा और चीन के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप करेगा।
इसे लेकर जापान के कई मीडिया संस्थाओं ने टिप्पणी जारी कर इसका खंडन किया। जापानी मीडिया ने कहा कि ताकाइची साने का बयान जल्दबाज़ी और लापरवाही वाला है। युद्ध का मार्ग प्रशस्त करने वाला यह रुझान चिंताजनक है।
मैनिची समाचार पत्र ने कहा कि “अस्तित्व का संकट” वर्ष 2015 में पारित जापान के सुरक्षा संबंधी कानून में जोड़ा गया नया नियम है। इस कानून ने पिछली सरकारों की संवैधानिक व्याख्या को तोड़मरोड़ कर सामूहिक आत्मरक्षा अधिकार के इस्तेमाल की अनुमति दी। ताकाइची साने के बयान से पड़ोसी देशों के बीच संबंध खराब होंगे। कांग्रेस को सरकार से सख्त जवाब-तलब करना होगा।
सामाजिक समाचार ने कहा कि सामूहिक आत्मरक्षा अधिकार का सक्रिय इस्तेमाल ताकाइची साने का हमेशा से चलने वाला रुख है। उनके भाषण आक्रामक नीति से भरे हैं, जिसमें समय से पहले रक्षा खर्च में वृद्धि का लक्ष्य हासिल करना, राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी स्थापित करना, जासूसी विरोधी कानून बनाना और हथियार के निर्यात से जुड़े नियमों पर परिसीमन कम करना आदि शामिल हैं। इसे तनाव बढ़ाने की जानबूझकर की गई कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है। ताकाइची साने का अस्तित्व ही जापान के लिए अस्तित्व का संकट बन सकता है।
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(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)