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थाईलैंड और कंबोडिया के बीच शांति वार्ता आज, अमेरिका और चीन नहीं बल्की यह देश करवा रहा मध्यस्थता

Thailand Cambodia dispute

Thailand Cambodia dispute

Thailand Cambodia Dispute : दक्षिण-पूर्व एशिया में बढ़ते तनाव को खत्म करने के प्रयास के तहत आज मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में थाईलैंड और कंबोडिया के शीर्ष नेताओं के बीच एक अहम शांति वार्ता आयोजित की जा रही है। यह बैठक सीमा विवाद को लेकर हाल ही में हुई भीषण गोलीबारी के बाद हो रही है, जिसमें अब तक 33 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में अधिकतर आम नागरिक बताए जा रहे हैं।

वार्ता में थाईलैंड की ओर से कार्यवाहक प्रधानमंत्री फुमथम वेचायाचाई और कंबोडिया की ओर से प्रधानमंत्री हुन मानेट हिस्सा ले रहे हैं। इस बैठक की अध्यक्षता मलेशिया कर रहा है, जो इस वर्ष ASEAN (दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का संगठन) की अध्यक्षता भी संभाल रहा है। मलेशिया ने ही दोनों देशों को बातचीत की मेज पर लाने की पहल की है।

शिव मंदिर बना विवाद की जड़
सीमा पर स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर को लेकर दोनों देशों में वर्षों से विवाद चला आ रहा है, लेकिन हालिया तनाव ने इस पुराने मुद्दे को नए सिरे से भड़का दिया है। दोनों पक्ष मंदिर क्षेत्र पर अधिकार जताते रहे हैं, और अब यह विवाद हिंसक टकराव में बदल चुका है।

ट्रंप की मध्यस्थता विफल
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस विवाद को शांत करने की कोशिश की थी। उन्होंने दोनों देशों के नेताओं से बातचीत कर संघर्ष विराम की अपील की थी। उन्होंने व्यापार न करने की धमकी देते हुए मामले को हल करने का दावा भी किया था। कंबोडिया ने ट्रंप की अपील को सकारात्मक रूप में लिया, जबकि थाईलैंड ने यह कहते हुए बातचीत से इनकार कर दिया कि कंबोडिया उसकी नागरिक आबादी को निशाना बना रहा है।

एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप
कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेट ने दावा किया कि मलेशिया की मध्यस्थता में 24 जुलाई की रात एक सीजफायर समझौता हुआ था, लेकिन महज एक घंटे बाद थाईलैंड ने उस समझौते से पीछे हटते हुए फिर से हमले शुरू कर दिए। वहीं थाईलैंड ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया है कि कंबोडिया ने सीमावर्ती इलाकों में बारूदी सुरंगें बिछाकर संघर्ष को भड़काया है।

आम नागरिक सबसे बड़ी कीमत चुका रहे
इस संघर्ष में सबसे अधिक नुकसान आम नागरिकों को हो रहा है। दोनों देशों के सीमावर्ती गांव खाली कराए जा चुके हैं। राहत एजेंसियां विस्थापितों की मदद में जुटी हैं, लेकिन सुरक्षा स्थिति के चलते राहत कार्यों में भी बाधा आ रही है।

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