
इंटरनेशनल डेस्क : थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैटॉन्गटर्न शिनावात्रा को एक मामले में सस्पेंड कर दिया गया है। एक फोन कॉल की वजह से उनकी कुर्सी चली गई है। थाईलैंड की एक संवैधानिक कोर्ट ने उनको अस्थानी रूप से पद से निलंबित करने का फैसला सुनाया है। बता दें कि यह कॉल कंबोडिया के पूर्व प्रधानमंत्री हुन सेन से जुड़ी थी, जिसमें कुछ संवेदनशील बातें कथित तौर पर सामने आने के चलते विवाद बढ़ गया था।
बता दें कि थाईलैंड की संवैधानिक कोर्ट ने मंगलवार को पैटॉन्गटर्न के खिलाफ याचिका को एक्सेप्ट कर लिया था। उनके खिलाफ आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किए जाने के आरोप थे। कोर्ट ने उनको 7-2 बहुमत से तुरंत पीएम पद से सस्पेंड करने के आदेश जारी किए। बता दें कि पूरा विवाद 15 जून को तब शुरू हुआ था, जब एक फोन कॉल सामने आई थी। पैटॉन्गटर्न फोन पर कंबोडिया के पूर्व पीएम हुन सेन से बातचीत कर रही थीं।
Thailand’s Constitutional Court temporarily suspends Prime Minister Paetongtarn Shinawatra from office until it rules on a petition seeking her ouster for alleged ethical violations — the biggest blow yet to her less-than one-year-old government. Read more here:… pic.twitter.com/rCIcSgvKrp
— Bloomberg (@business) July 1, 2025
इस दौरान उन्होंने थाईलैंड की सेना के एक शीर्ष कमांडर की आलोचना कर दी थी। इस दौरान उन्होंने पूर्व पीएम को भी अंकल कहकर संबोधित कर दिया था। बाद में यह कॉल लीक हो गई थी। इस कॉल के बारे में कहा गया कि सीमा विवाद सुलझाने के लिए यह कूटनीतिक कोशिश थी। लेकिन इसका उल्टा असर देखने को मिला।
थाईलैंड में सेना को काफी इंपोर्टेंस दी जाती है। इसलिए पीएम की टिप्पणी को सेना और विपक्ष ने बेहद गंभीरता से लिया। इसके चलते थाईलैंड में कई जगह प्रदर्शन देखने को मिले। वहीं, पैटॉन्गटर्न की गठबंधन सरकार से एक बड़ी पार्टी ने अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। अब राजनीतिक संकट के बीच थाई राजा महा वजिरालोंगकोर्न भी सामने आए हैं। उन्होंने मंगलवार को ही कैबिनेट में फेरबदल के लिए अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है।
हुन सेन को कंबोडिया की राजनीति में बड़ा नाम माना जाता है। वे लगभग 40 साल तक यहां राज कर चुके हैं। वे सबसे पहले 1985 से लेकर 1993 और बाद में 1998 से लेकर 2023 तक पीएम रहे। दो साल पहले अगस्त 2023 में उन्होंने अपने बेटे हुन मानेट को सत्ता सौंप दी थी। फिलहाल उनके पास सत्तारूढ़ पार्टी प्रमुख और सीनेट चेयरमैन जैसी जिम्मेदारी है। वहीं, शिनावात्रा के पिता थाक्सिन शिनावात्रा भी पीएम रहे हैं, जिनका 2006 में तख्तापलट कर दिया गया था।
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