
हाल ही में, चीन की राजधानी पेइचिंग में भारतीय योग गुरु आशीष बहुगुणा ने चाइना मीडिया ग्रुप के अधीनस्थ CGTN हिंदी के संवाददाता अखिल पाराशर के साथ एक विशेष पॉडकास्ट में शिरकत की। यह पॉडकास्ट योग और उसके वैश्विक प्रसार पर केंद्रित था, ख़ासकर चीन में इसकी बढ़ती लोकप्रियता पर। आशीष बहुगुणा, जो 2006 से पेइचिंग में योग सिखा रहे हैं, ने अपने अनुभवों और गहन जानकारियों को साझा किया। उन्होंने योग की परिभाषा, चीन में इसकी मौजूदा स्थिति, भारतीय योग शिक्षकों के लिए उपलब्ध अवसरों और चुनौतियों के साथ-साथ योग को एक सांस्कृतिक सेतु के तौर पर कैसे देखा जा सकता है, इन सभी पहलुओं पर विस्तार से बात की।
भारत के ऋषिकेश शहर में जन्मे आशीष बहुगुणा के अनुसार, योग का मूल अर्थ “जोड़ना” या “मिलन” है– यानी “आत्मा का परमात्मा से मिलन”। वहीं, भगवद् गीता में योग को “समत्वं योग उच्यते” यानी मन की स्थिरता या समता कहा गया है, जबकि पतंजलि योग सूत्र में इसे “योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः” के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसका अर्थ है मन की वृत्तियों (विचारों और तरंगों) को नियंत्रित करना।
इस बहुचर्चित पॉडकास्ट में आशीष बताते हैं कि योग का प्राथमिक उद्देश्य मानसिक नियंत्रण और अनुशासन है। उनका मानना है कि अधिकांश बीमारियाँ, जैसे डिप्रेशन, अनिद्रा और चिंता, मानसिक होती हैं, और योग मन को नियंत्रित करके इन पर काबू पाने में मदद करता है। योग केवल शारीरिक कसरत नहीं है, बल्कि यह शारीरिक और मानसिक शांति प्रदान करता है। श्वास (ब्रीदिंग) पर ध्यान केंद्रित करने से गहरा मानसिक विश्राम मिलता है।
जब आशीष 2006 में पेइचिंग आए थे, तो चीन में योग के बारे में बहुत कम जागरूकता थी। लोग यह भी नहीं जानते थे कि योग की उत्पत्ति भारत में हुई है। उस समय, चीन के थाइवान की एक योग शिक्षिका के वीडियो टेलीविजन पर आते थे, जिससे कुछ लोग योग से परिचित थे। आज, चीन में 1 करोड़ से अधिक लोग योग का अभ्यास करते हैं, और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। आशीष का अनुमान है कि अगले 5 वर्षों में यह संख्या 10 करोड़ तक पहुँच सकती है।
आशीष बहुगुणा का कहना है कि चीन एक तेज़ी से विकसित होता देश है, जिससे लोगों में तनाव और दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में, योग मानसिक शांति और तनाव मुक्ति के लिए एक प्रभावी साधन साबित हुआ है। पिछले 10-20 वर्षों में जीवन शैली में आए बदलावों और स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता ने चीन में योग को अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने यह भी बताया कि चीन में कई लोगों ने योग को रोज़गार का साधन भी बनाया है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) की घोषणा के बाद चीन में योग की जागरूकता में भारी वृद्धि हुई। चीन में भारतीय दूतावास के सहयोग से बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित होने लगे, जिससे अधिक से अधिक लोग योग से जुड़ने लगे हैं।
आशीष बहुगुणा के अनुसार, वर्तमान में, चीन में भारतीय योग शिक्षकों की बहुत मांग है। योग स्टूडियो भारतीय शिक्षकों को प्राथमिकता देते हैं क्योंकि उन्हें “प्रामाणिक” माना जाता है। भारतीय योग शिक्षक चीन में अच्छी कमाई कर सकते हैं और अपना जीवन स्तर सुधार सकते हैं। आशीष का मानना है कि भारतीय योग शिक्षक “योगा मैसेंजर” हैं और भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए उन्हें उच्च गुणवत्ता का योग सिखाना चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि उनके शुरुआती समय में योग को करियर के रूप में नहीं देखा जाता था, और लोग सोचते थे कि यह “संन्यास” की ओर ले जाता है। उनके परिवार भी शुरुआत में चिंतित थे। लेकिन साल 2015 के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के बाद से लोगों की सोच और मानसिकता में भारी बदलाव आया है। योग को अब एक व्यवहार्य करियर विकल्प के रूप में देखा जाता है, जिसमें अच्छी कमाई की संभावना है।
लगभग 2 दशक चीन में रहने वाले आशीष का मानना है कि ऋषिकेश और पेइचिंग में योग सिखाने के तरीके में अंतर है। ऋषिकेश में लोग छुट्टी पर होते हैं और आध्यात्मिक माहौल का अनुभव करते हैं, जबकि पेइचिंग में लोग अपनी व्यस्त जीवन शैली से समय निकालकर योग करते हैं। इसलिए आशीष ने अपनी शिक्षण पद्धति को संशोधित किया, इसे अधिक “वैज्ञानिक” दृष्टिकोण दिया ताकि चीनी छात्रों को बेहतर समझ आए।
आशीष का यह भी कहना है कि योग भारत और चीन के बीच एक “सांस्कृतिक सेतु” का काम करता है। वह बताते हैं कि जब चीनी छात्र योग के प्रति उत्सुक होते हैं, तो वे भारतीय संस्कृति, भोजन, फिल्में और रीति-रिवाजों के बारे में भी जानना चाहते हैं। योग के माध्यम से चीनी छात्रों में भारत जाने, वहाँ योग सीखने और भारतीय आध्यात्मिक माहौल का अनुभव करने की इच्छा जागृत होती है। आशीष छात्रों को भारत भेजने से पहले भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का सम्मान करने के लिए तैयार करते हैं।
आशीष को विश्वास है कि चीन में योग की दीवानगी बढ़ती रहेगी और आने वाले वर्षों में अभ्यास करने वालों की संख्या में बहुत ज्यादा वृद्धि होगी। योग हर उम्र के लोगों को समायोजित कर सकता है और जीवन भर इसका अभ्यास किया जा सकता है, जिससे यह एक स्थायी अभ्यास बन जाता है।
(अखिल पाराशर, चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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