पश्चिमी चीन के शिनच्यांग उइगुर स्वायत्त प्रदेश स्थित पामीर पठार की सीमा रेखा की ऊंचाई समुद्र की सतह से चार हजार मीटर है। वहां पर चीन की अल्पसंख्यक जाति किर्गिज़ जाति के सीमा रक्षक अब्दुलजपाल मेंगडे की कहानी से तमाम लोग प्रभावित हुए। जुलाई 2021 में पामीर पठार पर स्थित मुजी टाउनशिप में बारिश हुई थी। पर्यटक चिन वनह्वा का ऑफ-रोड वाहन कीचड़ में फंस गया। सीमा पर गश्त कर रहे अब्दुलजपाल शीघ्र ही साथियों के साथ मदद करने आए। एक घंटे के बचाव के बाद वाहन बाहर निकाला गया, लेकिन अब्दुलजपाल के हाथ में चोट लग गयी। जब पर्यटक आभार व्यक्त करने के लिए पैसे देते थे, तब अब्दुलजपाल ने सीपीसी सदस्य का बैज दिखाते हुए अस्वीकार किया। उन्होंने कहा कि हम सब एक परिवार के सदस्य हैं, पैसे देने की कोई जरूरत नहीं। वर्ष 2009 में सीमा रक्षक बनने के बाद पिछले 12 सालों में अब्दुलजपाल ने 40 किमी सीमा रेखा पर तमाम लोगों की मदद की।
बीमार पड़ने की वजह से अब्दुलजपाल ने वर्ष 2021 में सीमा रक्षक का एपॉलेट हटाया। लेकिन वे फिर भी स्वयंसेवक के रूप में मातृभूमि की रक्षा करते हैं और लोगों की सहायता करते हैं। वर्ष 2022 में अब्दुलजपाल पहली बार राजधानी पेइचिंग स्थित थ्येनआनमन चौक आए। राष्ट्रीय झंडा फहराते हुए देखने पर उन्हें रोना आ गया। अब्दुलजपाल ने कहा कि उस क्षण मुझे अहसास हुआ कि मैं केवल सीमा की रक्षा ही नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों की शांति की भी रक्षा करता हूं। वर्ष 2024 में अब्दुलजपाल ने पूर्वी चीन के चच्यांग प्रांत के च्याशिंग शहर स्थित नानहू क्रांतिकारी स्मारक हॉल का दौरा किया। यहां चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना का स्मारक स्थल है। उन्होंने गेस्टबुक में लिखा कि सीमा रक्षा मेरी जिम्मेदारी है, एकता मेरा विश्वास है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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