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महान चीनी दार्शनिक कन्फ्यूशियस की सबसे ऊँची मूर्ति करती है अपनी ओर आकर्षित

चीन के महान दार्शनिक, शिक्षक और विचारक कन्फ्यूशियस दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। कन्फ्यूशियसवाद के प्रवर्तक कन्फ्यूशियस (खोंगच) के बारे में हमेशा गहराई से जानने और समझने की इच्छा रही है। 

इस बार मुझे शानतोंग प्रांत में स्थित नीशान पवित्र स्थल (होली लैंड) का दौरा करने का अवसर मिला, जो कि कन्फ्यूशियस की जन्मस्थली है। विशाल क्षेत्र में फैले इस लोकप्रिय सांस्कृतिक और पर्यटक स्थल पर कन्फ्यूशियस की दुनिया भर में सबसे ऊंची मूर्ति है, जिसकी ऊँचाई 72 मीटर है। इस मूर्ति का आधार 7,800 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। जो चीन के शानतोंग प्रांत के छवीफू शहर से लगभग 20 किमी. दूर एक ख़ूबसूरत पहाड़ी क्षेत्र नीशान पर स्थापित की गयी है। बेहद आकर्षित करने वाली यह मूर्ति पीतल और स्टील से बनी है। 

बता दें कि इस मूर्ति का अनावरण 24 सितंबर 2018 को किया गया था। कहा जा सकता है कि यह मूर्ति दुनिया भर के लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रही है और पारंपरिक चीनी संस्कृति को बढ़ावा देने में भी इससे मदद मिल रही है। इस मूर्ति को जाने-माने मूर्तिकार वू सियानलिन ने डिज़ाइन किया था। यह थांग राजवंश के चित्रकार वू दाओज़ द्वारा लिखित “पहला शिक्षक कन्फ्यूशियस के पोट्रेट” पर आधारित है। 

गौरतलब है कि साल 2018 सीसीटीवी “चीनी स्प्रिंग फेस्टिवल गाला” के दौरान, कन्फ्यूशियस की मूर्ति, यांग्त्ज़ी नदी, पीली नदी और ग्रेट वाल के साथ, चीन द्वारा साझा किए गए आध्यात्मिक प्रतीक के रूप में दुनिया में दिखाई दी। इसमें कोई दोराय नहीं कि कन्फ्यूशियस (551-479 ईसा पूर्व) चीन के सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली दार्शनिक रहे हैं। उन्होंने कन्फ्यूशियसवाद की स्थापना की, जो एक विचारधारा थी। जिसमें परिवार और राज्य, नैतिक सद्भाव और स्वर्णिम नियम के संबंध में नैतिक व्यवहार के महत्व पर जोर दिया जाता था। इसके मुताबिक “जो आप अपने लिए नहीं चाहते, उसे दूसरों के साथ न करें”।

इसी जगह पर एक ग्रैंड लर्निंग हॉल भी बनाया गया है । इसका समग्र आकार एक सेटबैक बिल्डिंग की तरह दिखता है। यह एक व्यापक सांस्कृतिक पर्यटन भवन है, जिसमें संग्रहालयों, समारोहों, व्याख्यान कक्षों, सम्मेलनों, प्रदर्शनों आदि को समेकित किया गया है। यहाँ पर यूनिवर्सिटी हॉल की कुल ऊंचाई 65 मीटर है और इसमें कुल 9 मंजिलें हैं और कुल निर्माण क्षेत्र लगभग 70,000 वर्ग मीटर है। इसमें ऑडिटोरियम के अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए स्थान निर्धारित है। 

इस जगह पर पहुँचने पर एक अलग ही अनुभूति होती है। जिस तरह से कन्फ्यूशियस के विचार दुनिया भर में लोकप्रिय हैं। उससे यह अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है कि चीनी सभ्यता और संस्कृति का प्रभाव प्राचीन काल से विश्व भर में रहा है। जो अब तक जारी है। चीन सरकार और संबंधित विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करनी होगी। चीन में जिस तरह से अपनी संस्कृति और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण पर ध्यान दिया जा रहा है, वह काबिले तारीफ़ है। अगर आपको भी मौक़ा मिले तो इस अद्भुत जगह पर भ्रमण के लिए ज़रूर आइए।

(अनिल पांडेय, चाइना मीडिया ग्रुप, शानतोंग)

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