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“दो पर्वत” अवधारणा: चीन की पारिस्थितिक सभ्यता के वैश्विक प्रभाव

15 अगस्त, 2005 को, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने चीन के चच्यांग प्रांत की आनची काउंटी स्थित य्वी गांव में “स्वच्छ जल और हरे-भरे पहाड़ अमूल्य संपत्ति हैं” की अवधारणा (इसे संक्षिप्त में “दो पर्वत” अवधारणा कही जाती है) प्रस्तुत की। इसने चीन के आधुनिकीकरण की नींव को नया आकार दिया। 

पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था की द्वंद्वात्मक एकता “दो पर्वत” अवधारणा की सबसे गहन व्यावहारिक सफलता है। यह पश्चिमी मिथक को पूरी तरह से खंडित करता है कि “संरक्षण के लिए विकास का त्याग करना होगा” और यह उजागर करता है कि पारिस्थितिकी पर्यावरण में प्राकृतिक संपदा और आर्थिक संपदा की दोहरी विशेषताएं हैं।   

आनची काउंटी “दो पर्वत” अवधारणा का जन्मस्थान है। हाल के वर्षों में, इसने प्लास्टिक की जगह बांस का उपयोग करके गतिरोध को तोड़ा है, बांस के जंगलों से कार्बन सिंक बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई है, और हरित एवं निम्न-कार्बन विकास का एक नया मार्ग प्रशस्त किया है। आंकड़ों क अनुसार, साल 2024 तक, आनची के बांस उद्योग का उत्पादन मूल्य 19.262 अरब युआन तक पहुंच गया, वार्षिक प्लास्टिक खपत 3 लाख टन से अधिक कम हो गई, और कुल 25 हज़ार टन बांस वन कार्बन सिंक का व्यापार किया गया। बांस वन कार्बन सिंक से प्राप्त आर्थिक लाभ 1.5 अरब युआन से अधिक रहा और प्रत्येक किसान की औसत आय में 4 हज़ार युआन से अधिक की वृद्धि हुई। 

साल 2016 में, शानशी प्रांत के लान काउंटी ने एक “सहकारी वनरोपण” पायलट परियोजना शुरू की, जिसके तहत गरीब परिवारों को वनरोपण सहकारी समितियां स्थापित करने के लिए संगठित किया गया और गरीब लोगों को वनरोपण कार्यकर्ता बनाया गया। 2017 से 2022 तक, इस काउंटी ने कुल 36 करोड़ 30 लाख युआन का निवेश करके लगभग 266.67 वर्ग किलोमीटर का वनीकरण पूरा किया, जिससे 20,000 गरीब सदस्यों को लाभान्वित किया गया और प्रति व्यक्ति की वार्षिक वनीकरण आय 6,000 युआन से अधिक तक पहुंच गई। ये कदम इसकी पुष्टि करती हैं कि “प्रकृति की रक्षा करने से प्राकृतिक पूंजी का मूल्य बढ़ रहा है” – “स्वच्छ जल और हरे-भरे पहाड़” न केवल दृश्य हैं, बल्कि एक “हरित बैंक” भी हैं जो उच्च गुणवत्ता वाले विकास को बढ़ावा देते हैं।

वैश्विक पारिस्थितिक शासन के विमर्श का पुनर्निर्माण “दो पर्वत” अवधारणा की वैश्विक जिम्मेदारी को प्रदर्शित करता है। जब संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने चच्यांग प्रांत को तीन बार “चैंपियंस ऑफ द अर्थ पुरस्कार” से सम्मानित किया, और जब “पारिस्थितिकी सभ्यता पर क्वेइयांग अंतरराष्ट्रीय मंच” परिवर्तन चाहने वाले देशों के लिए “विचारों का मंच” बन गया, तो चीन, जिसके पास विश्व की 50 फीसदी पवन ऊर्जा स्थापित क्षमता और सबसे तेज वायु गुणवत्ता सुधार दर है, ने विचारों को कार्यरूप में रूपांतरित कर दिया। 

संयुक्त अरब अमीरात में, चीन द्वारा निर्मित दुनिया का सबसे बड़ा एकल फोटोवोल्टिक पावर स्टेशन अबू धाबी रेगिस्तान में एक “ऊर्जा नखलिस्तान” बन गया; मिस्र में, चीन के जल-बचत वाले टेरेस मॉडल को सफलतापूर्वक “प्रतिकृत” किया गया है, जिससे सिनाई प्रायद्वीप के पहाड़ी क्षेत्रों में जल संसाधनों के संरक्षण और कृषि के विकास में मदद मिली है; चीन की हरित योजना, जो पारिस्थितिकी को प्राथमिकता देती है और समन्वित विकास पर जोर देती है, नए विचारों को जन्म देती है और “वैश्विक दक्षिण” के साझा विकास में नई गति लाती है।

चीन से उत्पन्न इस पारिस्थितिकीय बुद्धि ने बीस वर्षों के अभ्यास से यह साबित किया है कि हरित विकास किसी भी तरह से ज़ीरो-सम गेम नहीं हैं, बल्कि यह एक सह-क्रियात्मक संबंध है जो एक-दूसरे को बढ़ावा दे सकता है और वैश्विक सतत विकास के लिए एक अनुकरणीय व लोकप्रिय चीनी समाधान प्रदान कर सकता है।

(साभार-चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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