इस महीने की 19 तारीख को अचानक रूप से हुई “माइक्रोसॉफ्ट आउटेज” घटना से पूरी दुनिया प्रभावित हुई। वैश्विक स्तर पर तमाम बिजनेस और कंपनियों का कामकाज बुरी तरह से ठप पड़ गया। अचानक विंडोज सिस्टम पर सामने आई “ब्लू स्क्रीन ऑफ डेथ” की परेशानी से दुनिया भर के एयरलाइंस, बैंक, रेलवे, दूरसंचार, मीडिया, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य और पर्यटन जैसे उद्योगों के लगभाग 85 लाख यूजर्स परेशान रहे। लेकिन चीन में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।
इसके बाद “माइक्रोसॉफ्ट आउटेज से चीनी मुख्यभूमि व्यवसाय अपेक्षाकृत अप्रभावित रहे” वाला विषय भारत समेत दुनिया भर के प्रमुख मीडिया में चर्चा का केंद्र बन गया है। जिस समय पूरी दुनिया में माइक्रोसॉफ्ट आउटेज से खलबली मची हुई थी, उस समय चीन में सबकुछ सामान्य चल रहा था। न तो यहां किसी को कंप्यूटर की स्क्रीन पर परेशानी आई और न ही दूसरी चीजों पर असर पड़ा। मीडिया रिपोर्ट और विश्लेषकों के अमुसार ऐसा होने के पीछे चीन का किसी दूसरे देश के ऊपर निर्भर न होना है।
अगर हम इसके पीछे के कारणों के बारे में बातचीत करें,तो मूख्य रूप से इसके दो कारण होते हैं। पहला, माइक्रोसॉफ्ट संकट के पीछे ‘क्राउटस्ट्राइक’ को जिम्मेदार बताया जा रहा था। लेकिन क्राउडस्ट्राइक के ग्राहक मुख्य रूप से यूरोप और अमेरिका में केंद्रित हैं, चीन में कुछ विदेशी कंपनियों को छोड़कर, क्राउडस्ट्राइक के सॉफ्टवेयर मूल रूप से चीन में उपयोग नहीं किए जाते हैं। दूसरा, चीनी घरेलू ऑपरेटिंग सिस्टम और सॉफ्टवेयर, जो हाल के वर्षों में तेजी से उभरा है, ने इस घटना में अपनी स्थिरता और विश्वसनीयता का प्रदर्शन किया है, जिससे सार्वजनिक सेवाओं जैसे उड़ानें, हाई-स्पीड रेल और बैंकिंग सेवाओं का सामान्य संचालन सुनिश्चित किया गया है।
इनमें दूसरा कारण विशेष महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। दरअसल, चीन इस बात को काफी पहले ही समझ गया था कि उसका विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहना खतरे से खाली नहीं है। साथ ही चीन हमेशा बाहर की चीजों को तरजीह देने की बजाय अपने ही बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर फोकस रखता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन में ऐसे बहुत कम बिजनेस या सर्विस समूह हैं जो किसी बाहरी कंपनी से सर्विस लेते हैं। चीन की ही कंपनियां यहां के बिजनेस और सर्विस समूह को सॉफ्टवेयर सर्विस देती हैं।
इसलिये चीन सार्वजनिक सेवाओं में तकनीकी गड़बड़ी के कारण प्रभावित नहीं हुआ और न ही इन क्षेत्रों पर इस आउटेज का असर देखने को मिला। वास्तव में, माइक्रोसॉफ्ट आउटेज से लेकर दुनिया भर में साइबर सुरक्षा से सम्बंधित मुद्दों पर गहन चर्चा और चिंतन भी शुरू हो गया है। कई विश्लेषकों का मानना है कि माइक्रोसॉफ्ट की वैश्विक आउटेज ने यह अलार्म बजा दिया है कि सभी देशों को अपने कंप्यूटर और नेटवर्क सिस्टम की सुरक्षा को स्वयं नियंत्रित करना होगा और देश को अपने कंप्यूटर सिस्टम के लिए घरेलू एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर की आवश्यकता है।
(लेखक—रमेश शर्मा)

