Tibet earthquake: तिब्बत में शुक्रवार सुबह एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। एक दिन पहले गुरुवार रात को आए 7.0 तीव्रता वाले शक्तिशाली भूकंप के बाद शुक्रवार सुबह 5 बजकर 54 मिनट पर एक बार फिर धरती कांप उठी। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.4 दर्ज की गई।
भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, भूकंप का केंद्र धरती की सतह से लगभग 15 किलोमीटर नीचे गहराई पर था। इससे पहले गुरुवार शाम 8:03 बजे आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.0 थी।
भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के अनुसार, ताजा भूकंप धरती की सतह से 173 किलोमीटर गहराई में आया। इसका केंद्र तिब्बत की राजधानी ल्हासा से लगभग 400 किलोमीटर दूर था।
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बीते दिन आया था विनाशकारी भूकंप
गुरुवार को आए शक्तिशाली भूकंप के कारण 300 से अधिक घर ढह गए। इस विनाशकारी भूकंप ने करीब 16 लोगों की जान ले ली। आपातकालीन प्रबंधन ब्यूरो के अनुसार, राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है। 32 लोग घायल बताए जा रहे हैं। शुक्रवार सुबह 2:25 बजे तक घायलों में से 11 लोगों की हालत गंभीर बताई गई।
भूकंप से हुए नुकसान का आकलन अभी भी किया जा रहा है। राहत कार्य तेजी से चल रहा है और प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाई जा रही है।
प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किए कर्मी
राहत और बचाव कार्य के लिए 300 से अधिक पुलिसकर्मियों को भूकंप के केंद्र वाले इलाके में भेजा गया है। इसके अलावा, क्षेत्रीय अग्निशमन एवं बचाव विभाग ने 347 कर्मचारियों को प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया है।
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इससे पहले तीन सितंबर को भी तिब्बत में 5.0 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसकी गहराई लगभग 14 किलोमीटर थी। वहीं जनवरी 2025 में आए 6.8 तीव्रता के एक बड़े भूकंप में 120 से अधिक लोगों की जान गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे।
प्राकृतिक आपदाओं के बढ़े खतरे
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता तापमान, तेजी से पिघलते ग्लेशियर और लगातार बढ़ रही चरम मौसम संबंधी घटनाएं चिंगहाई-तिब्बत पठार में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को बढ़ा सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस ताजा भूकंप ने एक बार फिर इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को उजागर किया है, जहां लोग अभी हाल की आपदाओं के प्रभावों से जूझ रहे हैं।

