तिब्बत (शीत्सांग) हमेशा खुलेपन के आधार पर पर्यटन का विकास करता रहा है। पर हाल ही में अमेरिकी राजनेता यह आरोप लगा रहे हैं कि चीन “विदेशियों के तिब्बत में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा रहा है” तथा वे इसका इस्तेमाल चीनियों पर वीजा प्रतिबंध लगाने के बहाने के रूप में करना चाहते हैं। इस अनुचित कृत्य के जवाब में चीनी सरकार ने पारस्परिक जवाबी कदम उठाए। वास्तव में, आधुनिक काल से ही पश्चिमी ताकतों ने तिब्बत में हस्तक्षेप करना कभी नहीं छोड़ा। उनका मूल उद्देश्य तिब्बत में अस्थिरता पैदा करना और अंततः तिब्बत को चीन में से विभाजित करने की अपनी साजिश को साकार करना है।
किसी भी देश को अपने संवेदनशील क्षेत्रों में प्रतिबंधात्मक नीतियां अपनाने का अधिकार है। चीन का तिब्बत विदेशी पर्यटकों के लिए खुलता रहा है और तिब्बत में हर साल बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक आते हैं। अकेले 2024 में ही कुल 320,000 विदेशी पर्यटकों ने तिब्बत का दौरा किया। तिब्बत की 3.7 मिलियन की जनसंख्या के लिए यह अनुपात काफी बड़ा है। उधर, तिब्बत और दक्षिण एशियाई देशों के बीच सीमा व्यापार और तीर्थयात्रा गतिविधियाँ भी सुचारू रूप से चल रही हैं। उदाहरण के लिए, 31 मार्च को हिमालय एयरलाइंस की उड़ान H9731 ने ल्हासा शहर के गोंगगर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से नेपाल के पोखरा तक उड़ान भरी, जिससे ल्हासा से पोखरा तक अंतर्राष्ट्रीय हवाई मार्ग का आधिकारिक उद्घाटन हुआ। यह उड़ान अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों को बड़ी सुविधाएं प्रदान करेगी। लेकिन, तिब्बत में उन अमित्र अतिथियों का भी स्वाभाविक रूप से स्वागत नहीं किया जाएगा। कुछ देशों के व्यक्तियों ने तथाकथित मानवाधिकारों, धर्म और संस्कृति के बहाने पर तिब्बत के मामलों में हस्तक्षेप करना चाहा, और कुछ ने तिब्बत में व्यवधान और तोड़फोड़ करने की कोशिश भी की।
उधर, तिब्बत दृढ़तापूर्वक खुले द्वार की नीति का पालन करता है। दक्षिण एशिया के लिए द्वार खुलने का महत्वपूर्ण मार्ग के रूप में, तिब्बत अपने अद्वितीय प्राकृतिक संपदा और सांस्कृतिक वातावरण पर भरोसा करते हुए, हर साल अंतर्राष्ट्रीय आदान-प्रदान मंच और उच्च स्तरीय पर्वतीय आउटडोर खेल आयोजनों का आयोजन करता है, और एक अधिक खुला, समावेशी और जीवंत विश्व पर्यटन स्थल बनाने का अथक प्रयास करता है। हालाँकि, लम्बे समय से कुछ अमेरिकी राजनेता तिब्बत मुद्दे का इस्तेमाल जनमत बनाने और अलगाववादियों को संकेत भेजने के लिए करते रहे हैं। इसके पीछे उन बलों की चीन के विकास में बाधा डालने की कुटिल मंशा है। वर्तमान में तिब्बत में सामाजिक स्थिति शांतिपूर्ण और सामंजस्यपूर्ण है, अर्थव्यवस्था अच्छी तरह से चल रही है, लोगों की आजीविका और कल्याण प्रभावी रूप से संरक्षित है, और क्षेत्रीय जातीय स्वायत्तता की प्रणाली की भी सफलता हासिल की गई है। तिब्बत अपनी परिस्थितियों के अनुसार और अधिक विदेशी पर्यटकों के लिए सुविधाएं प्रदान करेगा। लेकिन, तिब्बत में अराजकता लाने की किसी भी कोशिशों की इजाजत भी नहीं दी जाएगी।
तिब्बत का खुलना सामाजिक अर्थव्यवस्था के सुचारू विकास पर आधारित है। चीनी सरकार द्वारा जारी श्वेत पत्र “नये युग में तिब्बत में मानवाधिकारों का विकास और प्रगति” के अनुसार, रोजगार में स्थानांतरित तिब्बती लोगों की संख्या 2012 में 450,000 से बढ़कर 2024 में 648,000 हो गई। आंकड़ों से पता चलता है कि 2024 में तिब्बत में ग्रामीण निवासियों की प्रति व्यक्ति प्रयोज्य आय 21,578 युआन तक पहुंच गई, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। तिब्बत के विभिन्न क्षेत्रों में कई प्रकार के तकनीकी प्रशिक्षण का आयोजन किया गया है, जिससे न केवल किसानों और चरवाहों को अपनी रोजगार प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करने में मदद मिली है, बल्कि तिब्बत के आर्थिक विकास के लिए प्रतिभा भंडार भी प्रदान किया गया है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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