Tomahawk missile : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा यह संकेत दिए जाने के बाद कि यूक्रेन को लंबी दूरी की टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें प्रदान की जा सकती हैं, रूस ने इसका कड़ा विरोध जताया है। रूस के पूर्व राष्ट्रपति और वर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दमित्री मेदवेदेव ने चेतावनी दी है कि यदि यूक्रेन को टॉमहॉक मिसाइलों की आपूर्ति की जाती है तो स्थिति और बिगड़ सकती हैं और इसका असर “सभी पक्षों” पर विनाशकारी होगा।
मेदवेदेव ने अपने मैसेंजर ऐप पोस्ट में कहा, “टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों की आपूर्ति किसी के लिए भी अच्छी नहीं होगी।” उनके शब्दों में टॉमहॉक के पारंपरिक और परमाणु संस्करण के बीच फर्क करना कठिन है और इन मिसाइलों के प्रक्षेपण पर अमेरिकी पक्ष का नियंत्रण रहेगा, जो कि जोखिम को और बढ़ा देगा।
क्रेमलिन का समर्थन
क्रेमलिन ने भी मेदवेदेव की चेतावनी का समर्थन किया। राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने कहा कि अत्याधुनिक मिसाइल संचालन के लिए अमेरिकी विशेषज्ञों की सहभागिता अनिवार्य मानी जाएगी, और इसलिए कीव में ऐसी मिसाइलों की संभावित आपूर्ति के गंभीर नतीजे हो सकते हैं। पेस्कोव ने संवाददाताओं से कहा, “ऐसी मिसाइलों के संचालन की जानकारी रखने वाला कोई भी विशेषज्ञ इस जोखिम को समझता है।”
सैन्य विशेषज्ञों का आशंकित विश्लेषण
रूसी सैन्य विशेषज्ञ मिखाइल खोदारियोनोक ने भी चेतावनी जारी करते हुए कहा कि सोवियत काल से ही टॉमहॉक को अमेरिकी परमाणु क्षमता के रूप में देखा जाता रहा है। उनका कहना था कि इन मिसाइलों के किसी भी प्रक्षेपण से रूस की मिसाइल-रोधी रक्षा प्रणाली स्वचालित प्रतिक्रिया दे सकती है, जो स्थिति को और उग्र बना देगी।
पुतिन के संकेत और व्यापक सुरक्षा चिंताएं
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी इसी कड़ी में कहा था कि अगर टॉमहॉक जैसी मिसाइलें यूक्रेन के पास पहुंचती हैं तो अमेरिकियों द्वारा उनका प्रक्षेपण सम्भव है और रूस के आंतरिक इलाकों तक लक्षित हमलों का खतरा बढ़ सकता है। पुतिन ने कहा कि इस स्थिति में रूस को अपनी हवाई सुरक्षा को और मजबूत करना पड़ेगा, और इससे द्विपक्षीय संबंधों पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।
टॉमहॉक क्रूज मिसाइल क्यों है खास?
टॉमहॉक को अमेरिका की सबसे सटीक और खतरनाक क्रूज मिसाइलों में से एक माना जाता है। इसे समुद्री प्लेटफ़ॉर्म पर तैनात किया जाता है और यह रडार तथा एयर-डिफेंस सिस्टम को भेदने की क्षमता रखती है। इसकी रेंज हजारों किलोमीटर तक बताई जाती है और यह किसी हद तक लक्ष्य के चलने पर भी उसे ट्रैक कर मार सकती है। विशेषज्ञों का तर्क है कि टॉमहॉक के पारंपरिक व परमाणु वर्ज़न में पहचान मुश्किल होने से किसी भी प्रक्षेपण का निर्णय जोखिमभरा और अनिश्चित परिणाम वाला होगा।

