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ट्रंप ने UNGA में देशों से अपील की: ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखें, अब वह मिडिल ईस्ट का दबंग नहीं रहा

न्यूयॉर्क: मंगलवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के देशों से ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग रखने और उस पर दबाव बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि ईरान अब मिडिल ईस्ट में पहले जैसी दादागिरी नहीं कर रहा है।

ट्रंप ने ईरान को “आतंकवाद को सबसे ज्यादा बढ़ावा देने वाला देश” बताया और कहा कि वह दुनिया के लिए खतरा बन रहा था, लेकिन अमेरिका ने क्षेत्र में उसके प्रभाव को कम कर दिया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एकजुट रहने और दबाव जारी रखने की बात कही।

उन्होंने दो रास्ते बताए। एक तरफ उन्होंने कहा कि ईरान के साथ ऐसा समझौता हो सकता है जिससे वह फिर से खड़ा हो सके और बेहतर देश बन सके। दूसरी तरफ उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो इस्लामिक रिपब्लिक को पूरी तरह खत्म करने का विकल्प भी है, ताकि वह दोबारा लोगों और देशों को नुकसान न पहुंचा सके। ट्रंप ने कहा कि उन्हें इस मामले में जल्द एक बड़ा फैसला लेना है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद वाशिंगटन और तेहरान के बीच समझौता हो सकता है। ट्रंप का कहना था कि ईरान मध्यावधि चुनाव में उनके प्रदर्शन का इंतजार कर रहा है, लेकिन उन्होंने इस बात की चिंता नहीं जताई कि यह विवाद चुनावों पर असर डालेगा। उन्होंने याद दिलाया कि वे खुद चुनाव नहीं लड़ रहे हैं और अगले ढाई साल तक राष्ट्रपति बने रहेंगे।

ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तारीफ की, जिसने ईरान द्वारा व्यावसायिक जहाजों पर हमलों की निंदा करने वाला महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास किया। उन्होंने कहा कि अब दबाव बनाए रखने के लिए भी वैसी ही एकजुटता दिखानी होगी। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य से एक अरब बैरल से ज्यादा पेट्रोलियम को सुरक्षित पहुंचाया है। तनाव बढ़ने के बाद पेट्रोलियम की ढुलाई का रिकॉर्ड भी टूटा है।

अमेरिकी हथियारों के भंडार खत्म होने के आरोपों को उन्होंने खारिज कर दिया। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास जरूरत से कहीं ज्यादा हथियार हैं, रिकॉर्ड स्तर पर हथियार बनाए जा रहे हैं और नई उत्पादन सुविधाएं भी तैयार की जा रही हैं। ये बयान ऐसे समय आए हैं जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव सातवें महीने में चल रहा है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी न्यूयॉर्क में मौजूद थे, लेकिन उन्होंने ट्रंप का भाषण सुनने से दूरी बनाए रखी।

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