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ईरान को डोनाल्ड ट्रंप का 10 दिन का अल्टीमेटम, बोले- डील नहीं हुई तो नतीजे होंगे गंभीर

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इंटरनेशनल डेस्क: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को खुली चेतावनी दी है। वॉशिंगटन में आयोजित गाजा पीस बोर्ड की पहली बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान को एक ठोस परमाणु समझौते पर सहमत होना होगा, वरना उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है, लेकिन अगर कोई सार्थक डील नहीं हुई तो हालात बिगड़ सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले 10 दिनों में स्थिति साफ हो जाएगी। उनके मुताबिक, “अगर समझौता हुआ तो अच्छा है, अगर नहीं हुआ तो बहुत बुरी चीजें हो सकती हैं।”

जिनेवा में परोक्ष वार्ता जारी

अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड के जिनेवा में परोक्ष (इनडायरेक्ट) बातचीत चल रही है। अमेरिकी प्रतिनिधि मध्यस्थों के जरिए ईरान के विदेश मंत्री से संपर्क में हैं। कोशिश यह है कि परमाणु मुद्दे को लेकर सीधा टकराव या युद्ध जैसी स्थिति न बने।

अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम में बड़ी कटौती करे या उसे पूरी तरह सीमित करे। वॉशिंगटन का कहना है कि बढ़ता यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) परमाणु प्रसार का खतरा बढ़ाता है। वहीं, ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल नागरिक उपयोग जैसे बिजली उत्पादन और शोध के लिए है। तेहरान का तर्क है कि एनरिचमेंट पूरी तरह बंद करने की मांग उसके संप्रभु अधिकार के खिलाफ है।

बढ़ी सैन्य तैनाती, युद्ध की आशंका

कूटनीतिक प्रयासों के साथ-साथ क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। अमेरिका ने मध्य पूर्व में 50 से ज्यादा उन्नत लड़ाकू विमान तैनात किए हैं, जिनमें F-22 Raptor, F-35 Lightning II और F-16 Fighting Falcon शामिल हैं। इसके अलावा अतिरिक्त नौसैनिक संसाधन और एयर डिफेंस सिस्टम भी भेजे गए हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह तैनाती “डिटरेंस” यानी निवारक रणनीति के तहत की गई है, ताकि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे और अमेरिकी बलों व सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।

दूसरी ओर, ईरान ने भी सैन्य अभ्यास किए हैं और चेतावनी दी है कि उसके परमाणु ठिकानों पर किसी भी हमले का कड़ा जवाब दिया जाएगा। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई से खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट इस समय कूटनीति और सैन्य ताकत के बीच संतुलन की स्थिति में खड़ा है। अब सबकी नजर अगले 10 दिनों पर है… क्या समझौता होगा या तनाव और बढ़ेगा।

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