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पश्चिम एशिया संकट के बीच ट्रंप-स्टार्मर में तनातनी, डिएगो गार्सिया एयरबेस पर छिड़ा विवाद

Trump-Sturmer standoff amid West Asia crisis

Trump-Sturmer standoff amid West Asia crisis

इंटरनेशनल डेस्क: पश्चिम एशिया में इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के बीच अब अमेरिका और ब्रिटेन के रिश्तों में भी तनाव दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर आमने-सामने आ गए हैं। ट्रंप ने आरोप लगाया है कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने ईरान पर हमले के लिए अहम सैन्य ठिकाने डिएगो गार्सिया (Diego Garcia) के इस्तेमाल की अनुमति देने में देरी की, जिससे वह बेहद निराश हैं।

क्या है पूरा मामला?
पश्चिम एशिया में हालात उस समय और बिगड़ गए जब इस्राइल और अमेरिका ने ईरान पर संयुक्त हमले शुरू किए। जवाब में ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। इसी दौरान अमेरिका ने हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया एयरबेस का इस्तेमाल हमलों के लिए करना चाहा। यह ठिकाना रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और लंबे समय से अमेरिका यहां अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए हुए है। ट्रंप ने ब्रिटिश अखबार टेलीग्राफ को दिए इंटरव्यू में कहा कि स्टार्मर ने शुरुआत में इस बेस के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। उनके मुताबिक, दोनों देशों के रिश्तों में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।

ब्रिटेन ने क्यों रोका था इस्तेमाल?
ब्रिटेन ने पहले अंतरराष्ट्रीय कानून और कानूनी वैधता का हवाला देते हुए अमेरिका को डिएगो गार्सिया और RAF Fairford जैसे ठिकानों से हमले करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। हालांकि बाद में प्रधानमंत्री स्टार्मर ने अपना रुख बदला और कहा कि वह “विशेष और सीमित रक्षा उद्देश्यों” के लिए डिएगो गार्सिया का इस्तेमाल करने देंगे। ट्रंप का कहना है कि फैसला बदलने में बहुत देर कर दी गई। उन्होंने यह भी कहा कि लगता है प्रधानमंत्री को कानूनी पहलुओं की चिंता ज्यादा थी।

चागोस समझौते पर भी बढ़ा विवाद
डिएगो गार्सिया को लेकर विवाद के बीच ट्रंप ने उस प्रस्तावित चागोस समझौते से भी समर्थन वापस लेने की बात कही, जिसके तहत हिंद महासागर के चागोस द्वीप समूह का स्वामित्व मॉरीशस को सौंपकर सैन्य अड्डा दोबारा लीज पर लेने की योजना थी। ट्रंप ने कहा कि मॉरीशस ने अचानक मालिकाना हक का दावा शुरू कर दिया। उनके अनुसार, ब्रिटेन को या तो इस क्षेत्र पर स्पष्ट रूप से अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहिए था या साफ तौर पर इसे सौंप देना चाहिए था।

ईरान पर ट्रंप का सख्त रुख
ईरान पर अमेरिकी हमलों के दो दिन बाद ट्रंप ने कहा कि यह सैन्य अभियान तय समय से आगे चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान ब्रिटेन के कई नागरिकों की मौत और गंभीर चोटों के लिए जिम्मेदार है, हालांकि उन्होंने किसी विशेष घटना का उल्लेख नहीं किया।

आगे क्या?
विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद अमेरिका और ब्रिटेन के “विशेष संबंधों” (Special Relationship) पर असर डाल सकता है। हालांकि दोनों देशों के बीच सैन्य और रणनीतिक सहयोग बेहद गहरा है, लेकिन मौजूदा हालात में कानूनी, राजनीतिक और कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना दोनों नेताओं के लिए चुनौती बन गया है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच यह विवाद वैश्विक राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकता है।

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