वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (स्थानीय समय) को कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव में दखल दे सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की नेतृत्व टीम के साथ उनके अच्छे संबंध हैं।
रिपोर्टरों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा, “मैं दखल दूंगा, लेकिन पाकिस्तान के साथ मेरी अच्छी बनती है। उनके पास एक बेहतरीन प्रधानमंत्री और एक बेहतरीन जनरल हैं। मैं उन लोगों की बहुत इज्जत करता हूं। पाकिस्तान इस समय अच्छा काम कर रहा है।”
क्या है पूरा मामला?
पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव तेजी से बढ़ गया है। दोनों देश एक-दूसरे पर ड्रोन और हवाई हमलों के आरोप लगा रहे हैं। इस वजह से क्षेत्र में बड़े सैन्य टकराव का खतरा बढ़ गया है।
पाकिस्तान का आरोप
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने कहा कि अफ़गानिस्तान की ओर से एबटाबाद, स्वाबी और नौशेरा जैसे इलाकों में ड्रोन हमले किए गए। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के एंटी-ड्रोन सिस्टम ने इन ड्रोन को मार गिराया और किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। तनाव बढ़ने के बाद पाकिस्तान सरकार ने पूरे देश में सभी तरह के कमर्शियल और निजी ड्रोन उड़ाने पर रोक लगा दी है। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया है।
अफगानिस्तान का दावा
वहीं, अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उनकी एयर फोर्स ने शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे पाकिस्तान के अंदर कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। अफगानिस्तान का दावा है कि ये हमले पाकिस्तान की “हवाई घुसपैठ” के जवाब में किए गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलों में इस्लामाबाद के फैज़ाबाद के पास एक सैन्य कैंप, नौशेरा का सैन्य मुख्यालय, जमरूद की मिलिट्री टाउनशिप और एबटाबाद के कुछ ठिकानों को निशाना बनाया गया। अफगान रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह ऑपरेशन सफल रहा और पाकिस्तान के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को टारगेट किया गया।
आगे क्या?
दोनों देशों के बीच बढ़ते हमलों और जवाबी कार्रवाइयों से हालात और गंभीर हो गए हैं। यदि स्थिति नियंत्रण में नहीं आई, तो यह बड़ा सैन्य संघर्ष बन सकता है। ऐसे में अमेरिका की भूमिका अहम हो सकती है, खासकर जब राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद दखल देने की संभावना जताई है। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है।

