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ट्रम्प की “टैरिफ स्टिक” और अंडे की भीख

दोस्तों क्या आपने कभी ऐसे “पागल ऑपरेशन” देखे हैं कि अमेरिका “टैरिफ स्टिक” लहरा रहा है और हर जगह दुश्मन बना रहा है, वहीं वह अपने सहयोगी देशों से अंडों के लिए गिड़गिड़ा रहा है? जी हां, यह वर्ष 2025 में अमेरिका सरकार द्वारा प्रदर्शन की गयी “जादुई यथार्थवादी पटकथा” है।

दृश्य 1 : जब स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी एक अंडा नहीं उठा पाती

किसने सोचा होगा कि दुनिया के सबसे बड़े कृषि निर्यातक देश के रूप में अमेरिका अंडों के बारे में चिंतित होगा? वर्ष 2022 एवियन फ्लू प्रकोप के बाद, अमेरिका में अंडा देने वाली 16.8 करोड़ मुर्गियों को मार दिया गया था। इसके कारण अंडों की कीमत 1.49 डॉलर प्रति दर्जन से बढ़कर आज 7 डॉलर हो गई है, यहां तक कि कैलिफोर्निया राज्य में “आसमान छूते अंडों” की कीमत 15 डॉलर तक पहुंच गई है। क्योंकि “असली अंडे खरीदना संभव नहीं है”, ईस्टर अंडे को आलू और प्लास्टिक के अंडों से बदलना पड़ता है। यह शायद अब तक का सबसे घटिया ईस्टर होगा।

इससे भी अधिक विडंबना यह है कि जब अमेरिका ने अपने यूरोपीय संघ से अंडे मांगे, तो डेनमार्क, फ्रांस और स्वीडन ने सामूहिक रूप से अपना सिर हिलाते हुए कहा कि उनके पास कोई अतिरिक्त अंडा नहीं है। डच किसानों ने सीधे जवाब दिया कि सबसे पहले पोल्ट्री उत्पादों के प्रति 20% अतिरिक्त टैरिफ हटाओ। वहीं, अमेरिका सरकार यूरोपीय संघ की शराब पर 200% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दे रहा है। यहां तक कि अमेरिकी मीडिया भी अपनी सरकार के व्यवहारों को बर्दाश्त नहीं कर सका और इसे “बेतुका” कहा।

दृश्य 2 : अतिरिक्त टैरिफ “बूमरैंग” से अमेरिका के खुद नाश्ते की प्लेटों को हमला किया जाता है

यह “अंडे की कमी” अमेरिका की श्रृंखलाबद्ध नीतियों के “बूमरैंग” का परिणाम है। पहला, अमेरिका ने आयातित मक्का और सोयाबीन पर 25% अतरिक्त टैरिफ लगाया, जिससे चारे की कीमतें आसमान छू गईं और मुर्गियों को पालने की लागत आसमान छूने लगी।

तथाकथित “घरेलू उद्योग की रक्षा” के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की कि आयातित अंडे के लिए कोटे से अधिक टैरिफ को 238% तक बढ़ाया जाएगा। परिणामस्वरूप, अमेरिका में अंडों की तस्करी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कुछ लोगों ने बच्चों की गाड़ियों में अंडे छिपाए, कुछ ने अंडों की तस्करी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया और कुछ ने तो एक ही वाहन में अंडे और ड्रग्स का परिवहन किया।

जब अमेरिका सरकार ने घोषणा की कि वह दक्षिण कोरिया, तुर्की और अन्य देशों से लाखों अंडों का आयात करने की तत्काल सहायता मांग रही है, तो वित्तीय विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि अतिरिक्त टैरिफ़ के कारण इन देशों से आयातित अंडों की कीमत फिर से बढ़ जाएगी। इसका बिल अंततः अमेरिकी उपभोक्ताओं को ही चुकाना पड़ेगा।

वर्तमान में, लॉस एंजिल्स में दुकानों और सुपरमार्केटों में हर दिन दोपहर से पहले ही अंडे बिक जाते हैं। न्यूयॉर्क में अंडों की खरीद “प्रति व्यक्ति एक दर्जन” तक सीमित है। 34% अमेरिकी परिवारों ने अंडे खरीदना पूरी तरह से छोड़ दिया है। अमेरिकी बच्चों ने नाश्ते में अंडों की जगह ओटमील खाना शुरू कर दिया है। अमेरिका में पौधों पर आधारित अंडों की बिक्री में 200% की वृद्धि हुई है। सामाजिक मीडिया पर, स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की ऐसी इमोजी वायरल हो गई, जिसमें एक हाथ में “आसमान छूती कीमत वाला अंडा” और दूसरे हाथ में “टैरिफ स्टिक” थामे हुए हैं। कैप्शन में लिखा है कि मेगा (MEGA,make eggs great again यानी अंडों को फिर से महान बनाएं)? 

दृश्य 3 : वैश्विक जवाबी हमलों के सामने वाशिंगटन की “टोकरी” अस्थिर है

अमेरिका की “टैरिफ स्टिक” ने न केवल चीन को “अंत तक लड़ने” के लिए मजबूर किया, बल्कि यूरोपीय संघ को भी नाराज़ कर दिया। 9 अप्रैल को, चीन सरकार ने घोषणा की कि 10 अप्रैल को 12 बजकर 01 मिनट से, अमेरिका से आयातित वस्तुओं पर अतिरिक्त टैरिफ दर 34% से बढ़कर 84% हो जाएगी। उसी दिन, यूरोपीय संघ के सदस्य देशों ने सोयाबीन और पोल्ट्री सहित अनेक अमेरिकी उत्पादों पर 15 अप्रैल से 25% तक का अतिरिक्त टैरिफ लगाने के लिए मतदान किया।

जर्मन मीडिया ने तीखी टिप्पणी की कि व्यापार युद्ध और अंडे पर युद्ध के बीच, वाशिंगटन ने “मुर्गी उड़ गई और अंडा टूट गया” का विकल्प चुना है।

दृश्य 4 : आधिपत्यवादी तर्क का प्रतिकूल प्रभाव

यह प्रहसन एक साधारण सत्य को उजागर करता है कि स्टिक चलाने वाला हाथ कभी भी अंडों से भरी टोकरी नहीं पकड़ सकेगा। कनाडा द्वारा अमेरिका की ओर अपनी तेल पाइपलाइन बंद करने और यूरोपीय संघ द्वारा अमेरिका के “लाल राज्यों” (रिपब्लिकन पार्टी के लिये मतदान राज्यों) से 13.5 अरब डॉलर के निर्यात मालों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने के कारण, अमेरिकी नागरिकों के पास खाली शॉपिंग कार्ट और बढ़ती कीमतें रह गई हैं।

अमेरिकी नेटिज़न्स दोस्तों, यदि आप इस ईस्टर पर केवल “रंगे आलू” ही खा सकते हैं, तो अपनी सरकार से पूछना न भूलें कि टैरिफ स्टिक और अंडे के बीच उसे क्या चुनना चाहिए? आखिरकार, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का धैर्य अंडे की तरह होता है कि यह ख़त्म हो जाएगा।

 (साभार – चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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