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भूकंप के झटकों से हिली तुर्की की धरती… 4.7 रही तीव्रता; दहशत में लोग

Turkey Earthquake: तुर्की में एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। जर्मन भूविज्ञान अनुसंधान केंद्र (GFZ) के मुताबिक, गुरुवार तड़के तुर्की में 4.7 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। शुरुआत में इसकी तीव्रता 5.3 बताई गई थी, लेकिन बाद में आंकड़ों के संशोधन के बाद GFZ की वेबसाइट पर इसे 4.7 बताया गया। भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 2:54 बजे आया और इसका केंद्र जमीन से लगभग 10 किलोमीटर गहराई में स्थित था।

संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, इस भूकंप की तीव्रता 4.9 मापी गई है। USGS ने बताया कि इसका केंद्र एमेट शहर से लगभग 17 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में और 7.4 किलोमीटर की गहराई पर था। हालांकि, राहत की बात यह है कि अभी तक किसी प्रकार के जानमाल के नुकसान या किसी के घायल होने की सूचना नहीं मिली है।

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एक हफ्ते में तीसरी बार हिली तुर्की की धरती
यह पहली बार नहीं है जब तुर्की में भूकंप के झटके महसूस किए गए हों। इसी महीने 2 अक्टूबर 2025 को भी तुर्की के इस्तांबुल और उत्तर-पश्चिमी इलाकों में तेज भूकंप आया था। उस दौरान लोग दहशत में घरों से बाहर निकल आए थे। इसके कुछ दिन पहले, 28 सितंबर को भी उत्तर-पश्चिमी तुर्की में 5.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था। लगातार भूकंपों की यह श्रृंखला तुर्की के लिए चिंता का विषय बन गई है।

एक सप्ताह पहले भी आया था भूकंप
भौगोलिक दृष्टि से तुर्की एक ऐसे क्षेत्र में स्थित है जो कई प्रमुख फॉल्ट लाइनों के संगम पर आता है। यही कारण है कि यहां भूकंप अक्सर आते रहते हैं। देश का उत्तरी इलाका खासतौर पर नॉर्थ एनाटोलियन फॉल्ट ज़ोन पर स्थित है, जो यूरोपीय और एशियाई टेक्टोनिक प्लेटों के बीच की सीमा बनाता है। इस क्षेत्र में प्लेटों की हलचल के कारण अक्सर भूकंपीय गतिविधियां होती रहती हैं।

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2023 में आया था भयानक भूकंप
साल 2023 में तुर्की में आए 7.8 तीव्रता के भीषण भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी। उस भयावह हादसे में 53,000 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जबकि हजारों इमारतें मलबे में तब्दील हो गई थीं। पड़ोसी देश सीरिया में भी इस भूकंप के झटकों से करीब 6,000 लोगों की जान चली गई थी।

कैसे आते हैं भूकंप?
पृथ्वी की सतह सात प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों से बनी है। ये प्लेटें लगातार गतिशील रहती हैं और जब ये एक-दूसरे से टकराती या रगड़ खाती हैं तो ऊर्जा का उत्सर्जन होता है। यही ऊर्जा भूकंप के रूप में पृथ्वी की सतह पर झटकों के रूप में महसूस होती है।

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