चीन के पूर्वी तट पर स्थित, चच्यांग प्रांत के एक छोटे से गाँव- य्वी गांव में, 62 वर्षीय फ़ान छुनलिन की ज़िंदगी 20 साल पहले बदल गई, जब खनन बंद कर दिया गया। एक खनन मालिक के तौर पर उन्हें सालाना दस लाख युआन का नुक़सान हुआ, लेकिन आज उनके होमस्टे में 60,000 से ज़्यादा पर्यटक आते हैं, जिससे उन्हें सालाना 40 लाख युआन की कमाई होती है। इस बदलाव ने य्वी गांव को संयुक्त राष्ट्र द्वारा ‘दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गाँवों’ में से एक बना दिया है।
यह परिवर्तन “दो पहाड़ सिद्धांत” के विचार से प्रेरित है- “स्वच्छ जल और हरे-भरे पहाड़ ही सोने-चाँदी के पहाड़ हैं”। यह सिद्धांत 20 साल पहले तत्कालीन चच्यांग प्रांतीय प्रभारी शी चिनफिंग ने य्वी गांव के दौरे के दौरान दिया था। यह विचार एक लहर की तरह पूरे चीन में फैला और एक “हरित क्रांति” का रूप ले लिया, जिसने वैश्विक सतत विकास को भी प्रभावित किया।
हाल ही में प्रकाशित पुस्तक “पारिस्थितिक सभ्यता पर शी चिनफिंग के चयनित कार्य” इस बात का विस्तृत विवरण देती है कि कैसे यह अवधारणा एक छोटे से गाँव की सहमति से राष्ट्रीय रणनीति और फिर वैश्विक हरित क्रांति का हिस्सा बन गई।
शी चिनफिंग के अनुसार, “स्वच्छ जल और हरे-भरे पहाड़” एक सुंदर प्राकृतिक पर्यावरण का प्रतीक हैं, जबकि “सोने-चाँदी के पहाड़” आर्थिक समृद्धि का। उनका मानना है कि मानवीय प्रयासों से पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के बीच सामंजस्य बिठाया जा सकता है, जिससे संसाधनों का टिकाऊ उपयोग हो और अक्षय धन का सृजन हो सके।
शोध के आँकड़े बताते हैं कि वैश्विक पारिस्थितिक ऋण सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 10-20% तक पहुँच गया है, जो भावी पीढ़ियों के संसाधनों का वर्तमान में अत्यधिक उपयोग दर्शाता है। “दो पहाड़ सिद्धांत” इस अवधारणा को बदलता है कि पर्यावरण अपने आप में एक पूँजी है, और यह ज़ोर देता है कि हमें पर्यावरण की रक्षा करते हुए अर्थव्यवस्था का विकास करना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए पारिस्थितिक लाभांश बना रहे।
उदाहरण के लिए, य्वी गांव की आनची काउंटी में बाँस के जंगलों में 10,000 युआन के निवेश से 23,000 युआन की आय होती है। चीन ने 8 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में वनरोपण किया है, जो जापान के आकार से दोगुने क्षेत्र के बराबर है। य्वी गांव, जो कभी खनन पर निर्भर था, अब “पर्यावरण संरक्षण + पर्यटन + प्रौद्योगिकी” के मॉडल से सालाना 5 अरब युआन से अधिक कमा रहा है।
य्वी गांव की सफलता ने चीन की सीमाओं को पार कर वैश्विक प्रभाव छोड़ा है। यांग्त्ज़ी नदी डेल्टा के 120 गांवों ने मिलकर पारिस्थितिक संसाधनों के विकास के लिए एक अंतर-प्रांतीय प्रणाली स्थापित की है। चीनी किसानों द्वारा बाँस के जंगलों की सुरक्षा से मिलने वाले “पारिस्थितिक जमा” को अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर “पर्यावरण संरक्षण बिंदुओं” के रूप में मान्यता मिली है, जिसका उपयोग स्विट्जरलैंड में ग्लेशियर संरक्षण के लिए किया जा रहा है।
पारिस्थितिक संपदा के परिमाणीकरण और प्रसार के इस अभिनव मॉडल को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा अत्यधिक मान्यता प्राप्त है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने अपनी “वैश्विक हरित अर्थव्यवस्था आकलन रिपोर्ट” में इस बात पर ज़ोर दिया है कि “चीन के मामले ने पारंपरिक ज्ञान को उलट दिया है। कारकों के पुनर्गठन और मूल्य के पुनर्निर्माण के माध्यम से हरित परिवर्तन, एक घातीय विकास गुणक प्रभाव पैदा कर रहा है।”
शी चिनफिंग की “दो पहाड़” की अवधारण राष्ट्रीय सीमाओं को पार करके दुनिया भर में हरित लहर पैदा कर रही है। “बेल्ट एंड रोड” पहल के तहत, चीन और पेरू द्वारा संयुक्त रूप से विकसित चानके पोर्ट परियोजना हरित बुनियादी ढांचे के अंतर्राष्ट्रीयकरण का एक ज्वलंत उदाहरण बन गई है। तीन प्रमुख नवाचारों के माध्यम से, यह परियोजना चीन के पारिस्थितिक सभ्यता दर्शन को अनुकरणीय तकनीकी मानकों में परिवर्तित करती है। चानके बंदरगाह के पारिस्थितिक लाभों ने इसके आर्थिक प्रदर्शन को भी बढ़ावा दिया है- केवल छह महीनों के संचालन में, बंदरगाह ने 77.7 करोड़ अमेरिकी डॉलर का व्यापार उत्पन्न किया और पेरू सरकार द्वारा इसे “राष्ट्रीय सतत विकास मॉडल परियोजना” घोषित किया गया।
चानके बंदरगाह परियोजना द्वारा अपनाई गई मॉड्यूलर पर्यावरण संरक्षण प्रौद्योगिकी प्रणाली की तरह, चीन की पारिस्थितिक सभ्यता की सोच एक-एक केस नमूने के माध्यम से वैश्विक बुनियादी ढांचा क्षेत्र के लिए पूर्वी ज्ञान और तकनीकी ताकत को जोड़ने वाले समाधान प्रदान कर रही है।
अफ़्रीका की “हरित लंबी दीवार” से लेकर दक्षिण-पूर्व एशिया के “स्वच्छ ऊर्जा गलियारे” तक, चीन ने 300 से ज़्यादा पर्यावरण परियोजनाओं में भाग लिया है। संयुक्त राष्ट्र की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक हरित विकास में चीन का योगदान 34% तक पहुँच गया है, और यह आँकड़ा लगातार बढ़ रहा है। यह सब “स्वच्छ जल और हरे-भरे पहाड़ ही सोने-चाँदी के पहाड़ हैं” की अवधारणा की सत्यता को दर्शाता है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

