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ईरान पर संयुक्त राष्ट्र ने दोबारा लगाए सख्त प्रतिबंध, तेहरान की बढ़ेंगी कई मुश्किलें

दुबई: ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंताओं के बीच, संयुक्त राष्ट्र ने एक बार फिर तेहरान पर कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश पहले ही गहरे आर्थिक संकट में डूबा हुआ है और आम नागरिक महंगाई व बेरोजगारी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

रूस-चीन भी नहीं रोक पाए फैसला

संयुक्त राष्ट्र की इस सख्त कार्रवाई को रोकने के लिए रूस और चीन ने अंतिम समय तक जोरदार कूटनीतिक कोशिशें कीं, लेकिन वे सफल नहीं हो सकीं। प्रतिबंधों के तहत अब ईरान को विदेशी संपत्तियों की जब्ती, हथियारों के व्यापार पर रोक और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम में शामिल होने पर सजा जैसी कड़ी पाबंदियों का सामना करना होगा।

पहले से जर्जर अर्थव्यवस्था पर नया आघात

तेहरान की अर्थव्यवस्था पहले ही गिरते रियाल, आसमान छूती कीमतों और घटती आमदनी के कारण गहरे संकट में है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन नए प्रतिबंधों से स्थिति और गंभीर हो सकती है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हालात अब पहले से भी ज्यादा भयावह हो चले हैं।

जनता का दर्द: “अब तो जीना भी मुश्किल हो गया है”

तेहरान निवासी सिना ने एक समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा, “ऐसा कठिन समय हमने कभी नहीं देखा। 1980 के ईरान-इराक युद्ध के समय भी हालात इतने बुरे नहीं थे।” वहीं एक स्थानीय महिला सिमा तगहावी ने बताया, “हर दिन ज़रूरी चीजों के दाम बढ़ रहे हैं दूध, मक्खन और पनीर अब आम लोगों की पहुंच से दूर हो चुके हैं।”

खाद्य पदार्थों में आग, मांस हुआ ‘लग्ज़री आइटम’

देश में महंगाई की दर बेकाबू होती जा रही है। ताज़ा सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2025 में ईरान की सालाना मुद्रास्फीति दर 34.5% दर्ज की गई। वहीं, आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 50% से भी अधिक की वृद्धि हुई है। बीन्स की कीमत एक साल में तीन गुना हो गई है, जबकि चावल और मक्खन जैसे आम खाद्य पदार्थ अब महंगे हो चले हैं। मांस जैसे प्रोटीन स्रोत अब गरीब परिवारों के लिए एक ‘लग्जरी’ बन चुके हैं।

क्या अब परमाणु कार्यक्रम पर पड़ेगा असर?

इन प्रतिबंधों का सीधा असर ईरान की परमाणु गतिविधियों और हथियारों के कार्यक्रम पर पड़ सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अपनी रणनीति में बदलाव नहीं करेगा। अमेरिका और यूरोपीय देशों की ओर से पहले भी कई बार चेतावनियां दी जा चुकी हैं कि यदि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित नहीं करता, तो अंतरराष्ट्रीय समर्थन पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

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