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“मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा” एक ऐतिहासिक दस्तावेज :चीनी राजदूत

March 18, 2023

“मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा” एक ऐतिहासिक दस्तावेज :चीनी राजदूत

जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय और स्विट्जरलैंड के अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों में स्थित चीनी प्रतिनिधि राजदूत छन श्यू ने 17 मार्च को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 52वें सत्र के सम्मेलन में 70 से अधिक देशों की ओर से मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा के पारित होने की 75वीं वर्षगांठ पर एक संयुक्त बयान दिया और घोषणा के कार्यान्वयन पर स्पष्ट दावा किया। संयुक्त बयान में कहा गया है कि मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा एक ऐतिहासिक दस्तावेज है, जिसका दुनिया के मानवाधिकारों के विकास पर गहरा प्रभाव पड़ा है। पिछले 75 वर्षों में, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा द्वारा निर्धारित उच्च लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए खोज करना जारी रखा, जिससे महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल हुईं। और कई जटिल और गंभीर चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।

मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा के पारित होने की 75वीं वर्षगांठ पर इस गतिविधि ने घोषणा की भावना को पुनर्जीवित करने के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया। “मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा” को आगे लागू करने के लिए संयुक्त भाषण में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पहला, इसे चौतरफा तरीके से बढ़ावा दिया जाना चाहिए, और मानव के सर्वांगीण विकास को बढ़ाने और हासिल करने की जरूरत है। दूसरा, परिणाम उन्मुख बनें। हमें जन-केंद्रित विकास के अधिकार को लागू करना, संयुक्त राष्ट्र 2030 सतत विकास एजेंडा को संयुक्त रूप से बढ़ाना, और महामारी के बाद बेहतर बहाली हासिल करनी चाहिए, मानवाधिकारों पर उभरती प्रौद्योगिकियों के प्रभाव पर ध्यान देना, कमजोर लोगों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए, भेदभाव के सभी रूपों का मुकाबला करना, और एकतरफा जबरदस्ती प्रतिबंध को रद्द करना, असमानता को खत्म करना, और साथ ही अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों को मानवाधिकारों की रक्षा करने में विकासशील देशों को समर्थन देने में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

तीसरा, एक दूसरे का सम्मान करें। मानवाधिकार अभ्यास विविध है। अलग-अलग देशों की अलग-अलग राष्ट्रीय स्थितियां, ऐतिहासिक संस्कृतियां, सामाजिक प्रणालियां और आर्थिक व सामाजिक विकास स्तर हैं। हमें मानवाधिकारों की सार्वभौमिकता को प्रत्येक देश की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने का पालन करना चाहिए, और प्रत्येक देश द्वारा स्वतंत्र रूप से चुने गए मानवाधिकारों के विकास पथ का सम्मान करना चाहिए। चौथा, संवाद और सहयोग की जरूरत है। सभी पक्षों को आम सहमति हासिल करते हुए आपसी विश्वास जुटाना, टकराव और विभाजन को त्याग कर मानवाधिकारों के राजनीतिकरण से बचना चाहिए। ताकि संयुक्त रूप से वैश्विक मानवाधिकारों के कार्य को बढ़ावा दिया जा सके और मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा में नई शक्ति डाली जा सके।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)

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