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शांति वार्ता करने पाकिस्तान पहुंचा अमेरिका और ईरान का प्रतिनिधिमंडल, जानें कौन-कौन है शामिल

US-Iran Peace Talk

US-Iran Peace Talk

इंटरनेशनल डेस्क: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने की कोशिशों के तहत एक अहम कूटनीतिक पहल शुरू हुई है। इसी सिलसिले में ईरान का प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार देर रात पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचा। वहीं अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल भी पाकिस्तान के लिए रवाना हो चुका है।

यह बातचीत ऐसे समय हो रही है, जब दोनों देशों के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम लागू है। इस युद्धविराम की शुरुआत 28 फरवरी को उस हमले के बाद हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर सैन्य कार्रवाई की थी।

ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व

ईरान की ओर से इस बातचीत में वरिष्ठ नेता शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर घालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची कर रहे हैं। इनके साथ अन्य प्रमुख अधिकारी भी आए हैं, जिनमें सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहम्मद बगेर जोलघाद्र, रक्षा परिषद के सचिव अली अकबर अहमदीन, केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्मती और ईरानी संसद के कई सदस्य शामिल हैं।

पाकिस्तान में हुआ भव्य स्वागत

इस प्रतिनिधिमंडल का स्वागत पाकिस्तान के वरिष्ठ नेताओं ने किया। स्वागत करने वालों में उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार, नेशनल असेंबली के स्पीकर सरदार अयाज सादिक, सेना प्रमुख सईद आसिम मुनीर और गृह मंत्री सैयद मोहसिन रजा नकवी शामिल रहे।

 

विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि सभी पक्ष सकारात्मक और रचनात्मक तरीके से बातचीत करेंगे। उन्होंने यह भी दोहराया कि पाकिस्तान इस विवाद का स्थायी समाधान निकालने में हर संभव मदद करेगा और क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल

अमेरिका की ओर से चार सदस्यीय टीम इस वार्ता में हिस्सा ले रही है। इसका नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं। उनके साथ जारेड कुशनर ( राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी और दामाद), पश्चिम एशिया के लिए विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और वाइस एडमिरल ब्रैड कूपर प्रमुख लोग शामिल हैं।

क्यों अहम है यह वार्ता

यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि लंबे समय से तनाव झेल रहे ईरान और अमेरिका के बीच सीधे संवाद का यह एक बड़ा मौका है। अगर बातचीत सफल रहती है, तो इससे क्षेत्र में शांति बहाल करने और भविष्य के टकराव को रोकने में मदद मिल सकती है।

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