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ट्रंप ने कहा- ईरान से बातचीत खत्म, अमेरिकी हमलों के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ा

Donald Trump said—talks with Iran are over.

Donald Trump said—talks with Iran are over.

US Iran Ceasefire अंकारा (तुर्की): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि अब ईरान के साथ शांति वार्ता या युद्धविराम को आगे बढ़ाने का कोई मतलब नहीं रह गया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह अब तेहरान के साथ कोई कूटनीतिक बातचीत नहीं करना चाहते और उनके अनुसार शांति प्रक्रिया खत्म हो चुकी है।

उनसे बातचीत करना सिर्फ समय की बर्बादी- ट्रंप 

तुर्की में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा, “मेरे हिसाब से यह मामला खत्म हो चुका है। मैं अब उनके साथ कोई बातचीत नहीं करना चाहता। वे अच्छे लोग नहीं हैं और उनकी अगुवाई ऐसे लोग कर रहे हैं जिनकी सोच ठीक नहीं है। हमारे वार्ताकार उनसे बात कर सकते हैं, लेकिन जहां तक मेरी बात है, अब उनसे बातचीत करना सिर्फ समय की बर्बादी है।”

ट्रंप ने ईरान के नेताओं पर तीखा हमला करते हुए उन्हें “झूठा”, “धोखेबाज़” और “कट्टर सोच वाला” बताया। उन्होंने दावा किया कि ईरानी सरकार ने अपने ही नागरिकों के साथ सख्ती की है और विरोध प्रदर्शनों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना ने मंगलवार रात ईरान के भीतर मौजूद “बहुत खतरनाक लोगों” को निशाना बनाकर बड़ा सैन्य अभियान चलाया।

उन्होंने कहा कि हाल ही में समुद्र में हुई घटनाओं के बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई की। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान से कहा था कि वह अपने नुकसान की भरपाई और मृतकों के अंतिम संस्कार पर ध्यान दे, लेकिन इसके बजाय ईरान की ओर से जहाजों पर रॉकेट दागे गए। इसी के जवाब में अमेरिकी सेना ने बड़े पैमाने पर हमले किए।

हम किसी भी दबाव के सामने नहीं झुकेंगे- ईरान 

दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका के इन आरोपों और सैन्य कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है। ईरान के संसद अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अमेरिका पर कई समझौतों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका ने ईरान से जुड़े कई महत्वपूर्ण समझौतों का पालन नहीं किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने समुद्री क्षेत्र में ईरान की व्यवस्थाओं का उल्लंघन किया, लगातार सैन्य हमलों की धमकियां दीं, ईरान पर फिर से तेल प्रतिबंध लगाए, दक्षिणी ईरान में हमले किए और लेबनान में जारी इजरायली कार्रवाई का समर्थन किया। उन्होंने अपने बयान में कहा, “धमकी और दबाव का दौर अब खत्म हो चुका है। इससे कुछ हासिल नहीं होगा। हम किसी भी दबाव के सामने नहीं झुकेंगे।” यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।

होर्मुज में 3 जहाजों पर हमले

हाल ही में रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे तीन जहाजों पर हमले हुए थे। अमेरिका ने इन हमलों के लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराया। इसके बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की। अमेरिकी सेना के अनुसार, यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों पर हुए हमलों के जवाब में की गई। अमेरिका का कहना है कि उसका उद्देश्य ईरान को यह संदेश देना है कि व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाने की कीमत उसे चुकानी पड़ेगी। बढ़ते तनाव के बीच दोनों देशों के रिश्ते एक बार फिर बेहद नाजुक स्थिति में पहुंच गए हैं। फिलहाल किसी नई शांति वार्ता के संकेत नहीं मिल रहे हैं और क्षेत्र में हालात पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

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