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US-Iran peace talk: MoU पर मतभेद बरकरार, संशोधन की तैयारी में ईरान: रिपोर्ट

US Iran peace talk

US Iran peace talk

US Iran peace talk: अमेरिका की हालिया प्रतिक्रिया मिलने के बाद अब ईरान संभावित समझौता ज्ञापन (MoU) के मसौदे में अपने भी कुछ बदलाव करेगा। ईरान की एक समाचार एजेंसी ने एक सूत्र के हवाले से यह जानकारी दी। बीते दिनों अमेरिकी मीडिया ने कहा क‍ि अमेरिका ने मसौदा समझौते के कुछ हिस्सों में बदलाव करके उसे तेहरान को वापस भेजा है। इन मीडिया रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए समाचार एजेंसी ने एक जानकार सूत्र के हवाले से बताया कि ईरान भी अपने अनुसार मसौदे में संशोधन करेगा और ‘अभी कुछ भी अंतिम नहीं है।’

ट्रंप ने मसौदे पर जताई आपत्ति
सूत्र ने कहा कि ईरान सिर्फ उसी मसौदे को स्वीकार करेगा, जिस पर उसकी सहमति होगी और अमेरिका की ओर से किए गए बदलाव का मतलब यह नहीं है कि तेहरान उन्हें मंजूर करता है।

एक अन्य समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी मीडिया ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मसौदे के कुछ हिस्सों पर आपत्ति जताई है, खासकर ईरान के फ्रोजन एसेट्स को जारी करने वाले हिस्से पर। इसके अलावा, उन्होंने समझौते में और सख्त शर्तें जोड़ने की मांग की है, खासकर ईरान के परमाणु पदार्थों को लेकर।

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समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहा अमेरिका
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान और अमेरिका एक ऐसे समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं, जिसका मकसद 28 फरवरी को शुरू हुए उस युद्ध को खत्म करना है, जो अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुआ था।

दोनों देशों के बीच 8 अप्रैल को एक अस्थायी सीजफायर हुआ था। पिछले कुछ हफ्तों में, पाकिस्तान की मध्यस्थता से दोनों पक्षों ने युद्ध खत्म करने की शर्तों को लेकर कई प्रस्तावों का आदान-प्रदान किया है।

रविवार को इससे पहले, ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाक‍िर गालिबाफ ने कहा कि जब तक ईरानी लोगों के अधिकार सुरक्षित नहीं होते, तेहरान अमेरिका के साथ किसी भी समझौते को स्वीकार नहीं करेगा।

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‘यकीन होने पर ही समझौते को मिलेगी मंजूरी’
ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी के अनुसार, संसद की एक ऑनलाइन बैठक को संबोधित करते हुए गालिबाफ ने कहा कि ईरानी वार्ताकारों को ‘दुश्मन’ के शब्दों और वादों पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा, “हमारा मानदंड ऐसे ठोस नतीजे हैं जिन्हें हमें हासिल करना है, ताकि हम बदले में अपनी जिम्मेदारियां निभा सकें। जब तक हमें यकीन नहीं होगा कि हमने ईरानी राष्ट्र के अधिकार सुरक्षित कर लिए हैं, हम किसी भी समझौते को मंजूरी नहीं देंगे।”

‘ईरान को झुकाने की कोशिश कर रहा दुश्मन’
स्पीकर ने ईरान की ‘सफलताओं’ का जिक्र करते हुए कहा कि कूटनीति का काम इन ‘जीतों’ को राजनीतिक और कानूनी उपलब्धियों में बदलना है। उन्होंने चेतावनी दी कि संघर्ष के एक नए चरण में ‘दुश्मन’ आर्थिक दबाव और मीडिया प्रचार के जरिए देश के अंदर मतभेद पैदा करके ईरान को झुकाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें भरोसा है कि ईरानी लोग इसका विरोध करेंगे।

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