इंटरनेशनल डेस्क: ओमान के तट के पास एक अमेरिकी सैन्य अपाचे हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद पश्चिम एशिया में तनाव काफी बढ़ गया है। इस घटना के बाद अमेरिका और ईरान के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हेलीकॉप्टर हादसे के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है और ईरान ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
समुद्र में गिरा हेलीकॉप्टर
जानकारी के अनुसार, अमेरिकी सेना का एक अपाचे हेलीकॉप्टर ओमान के तट के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे के बाद हेलीकॉप्टर में सवार दोनों पायलट समुद्र में फंस गए। इसके बाद अमेरिकी सेना ने तत्काल बचाव अभियान शुरू किया। इस अभियान की सबसे खास बात यह रही कि पहली बार एक मानवरहित ड्रोन बोट की मदद से पायलटों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, यह तकनीक भविष्य के समुद्री बचाव अभियानों के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
ड्रोन बोट ने निभाई अहम भूमिका
‘कोर्सेर’ नाम की करीब 24 फीट लंबी एआई-संचालित ड्रोन बोट को बचाव अभियान में लगाया गया। यह नाव बिना किसी चालक के संचालित होती है और दूर से नियंत्रित की जा सकती है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, मंगलवार तड़के लगभग 3:30 बजे इस ड्रोन बोट ने समुद्र में मौजूद दोनों पायलटों तक पहुंचकर उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। राहत की बात यह रही कि दोनों सैन्य कर्मियों को कोई गंभीर चोट नहीं आई।
ट्रम्प ने ईरान पर लगाया आरोप
हादसे के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें सैन्य अधिकारियों ने जानकारी दी है कि अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को ईरानी कार्रवाई के कारण नुकसान पहुंचा है। अमेरिका अपने सैनिकों और सैन्य संसाधनों पर किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा और आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार है।
ईरान ने आरोपों को बताया निराधार
वहीं ईरान ने अमेरिका के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने कहा कि क्षेत्र में मौजूद विदेशी सेनाएं अपनी गलतियों और जोखिमों के लिए स्वयं जिम्मेदार हैं। बाहरी देशों की सैन्य मौजूदगी ही क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ाने का कारण बन रही है।
क्षेत्र में बढ़ी चिंता
घटना के बाद ईरानी मीडिया ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित एक ईरानी द्वीप पर विस्फोट जैसी आवाजें सुनाई देने की खबर दी है। हालांकि इन घटनाओं के कारणों को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हालात में किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है। पहले से ही पश्चिम एशिया कई सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है और नई घटनाएं हालात को और जटिल बना सकती हैं।
शांति प्रयासों पर भी संकट
कई देशों की ओर से क्षेत्र में तनाव कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। विभिन्न राजनयिक चैनलों के माध्यम से बातचीत जारी है, लेकिन फिलहाल किसी बड़े समझौते के संकेत नहीं मिल रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। इनमें परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े विषय प्रमुख हैं। दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजारों पर भी असर डाल सकता है।
हेलीकॉप्टर हादसे और उसके बाद की घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिका और ईरान आगे क्या कदम उठाते हैं और क्या कूटनीतिक प्रयास तनाव को कम करने में सफल हो पाते हैं या नहीं।
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