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अमेरिका का पासपोर्ट टॉप-10 की रैंकिंग से बाहर! जानिए किस नंबर पर है भारत

नई दिल्ली: दुनिया भर में टॉप पर रहने वाले पासपोर्ट की प्रतिष्ठित रिपोर्ट हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2025 जारी हो चुकी है। बता दें कि इस बार की रैंकिंग ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। सबसे बड़ा झटका अमेरिका को लगा है, जिसका पासपोर्ट टॉप-10 की सूची से बाहर हो गया है। वहीं भारत को भी इस साल गिरावट का सामना करना पड़ा है।

अब अमेरिका नहीं है टॉप टेन में

लंबे समय से दुनिया के सबसे टॉप पर रहने वाला पासपोर्ट की सूची में शामिल रहा अमेरिकी पासपोर्ट अब टॉप-10 से बाहर हो चुका है। अमेरिका के नागरिक अब केवल 180 देशों में ही बिना वीजा या वीजा ऑन अराइवल की सुविधा का लाभ उठा सकते हैं, जो पिछले वर्षों की तुलना में एक गिरावट मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियां, कूटनीतिक संबंधों में बदलाव और आव्रजन नीतियों का असर अब अमेरिका के पासपोर्ट पर साफ नजर आने लगा है।

सिंगापुर बना नंबर 1

इस बार सिंगापुर ने बाजी मारी है और उसका पासपोर्ट दुनिया का सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट बन गया है। सिंगापुर के नागरिक 193 देशों में वीजा-फ्री या वीजा ऑन अराइवल के जरिए यात्रा कर सकते हैं। इसके बाद दक्षिण कोरिया (190 देश) और जापान (189 देश) दूसरे और तीसरे स्थान पर काबिज हैं।

भारत की स्थिति कमजोर हुई

भारतीय पासपोर्ट की ताकत में इस साल गिरावट दर्ज की गई है। 2024 में भारत 80वें स्थान पर था, जबकि 2025 की रिपोर्ट में वह पांच पायदान नीचे गिरकर 85वें स्थान पर पहुंच गया है। हालांकि भारतीय नागरिक अब भी 57 देशों में वीजा ऑन अराइवल या वीजा-फ्री यात्रा कर सकते हैं।

ये गिरावट वैश्विक मंच पर भारत की यात्रा स्वतंत्रता को कुछ हद तक सीमित करती है, हालांकि पिछले वर्षों की तुलना में भारत की कूटनीति ने कुछ सकारात्मक परिणाम भी दिखाए थे।

यूरोपियन पासपोर्ट्स का दबदबा बरकरार

यूरोप के कई देश अब भी इस रैंकिंग में शीर्ष पर बने हुए हैं। जर्मनी, इटली, लक्जमबर्ग, स्पेन और स्विट्जरलैंड जैसे देशों के पासपोर्ट के साथ नागरिक 188 देशों की यात्रा कर सकते हैं। वहीं ऑस्ट्रिया, फ्रांस, नीदरलैंड, डेनमार्क और फिनलैंड के नागरिक 187 देशों तक पहुंच बना सकते हैं।

चीन की बड़ी छलांग

जहां एक ओर अमेरिका और भारत की रैंकिंग गिरी है, वहीं चीन ने उल्लेखनीय सुधार करते हुए खुद को बेहतर स्थिति में पहुंचा दिया है। 2015 में 94वें स्थान पर रहा चीन अब 2025 में 64वें स्थान पर आ चुका है। यह एक दशक में उसकी बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता का संकेत माना जा रहा है।

क्या है हेनले पासपोर्ट इंडेक्स?

यह इंडेक्स दुनियाभर के पासपोर्ट को इस आधार पर रैंक करता है कि उसके धारक कितने देशों में वीजा के बिना या वीजा ऑन अराइवल के जरिए यात्रा कर सकते हैं। हर देश के लिए यह किसी अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट कार्ड की तरह होता है, जो उसकी वैश्विक पहुंच और कूटनीतिक ताकत को दर्शाता है।

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