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अमेरिका में शटडाउन लागू , ट्रम्प के रहते तीसरी बार सरकार ठप

America tariff bomb

America tariff bomb

इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिका में सरकारी शटडाउन की घोषणा हो चुकी है, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ है। अमेरिकी सीनेट में आवश्यक अस्थायी फंडिंग बिल पास नहीं हो पाया, जिसके कारण आधी रात से शटडाउन लागू हो गया। ट्रंप की पार्टी को इस बिल को पास कराने के लिए कम से कम 60 वोट चाहिए थे, लेकिन उन्हें केवल 55 वोट ही मिले। इससे सरकार के कई महत्वपूर्ण विभागों का काम प्रभावित होने लगा है।

शटडाउन का मतलब क्या है?

सरकारी शटडाउन तब होता है जब संसद में वार्षिक बजट या अस्थायी फंडिंग बिल को मंजूरी नहीं मिल पाती। अमेरिका में सरकार के विभिन्न विभागों को चलाने के लिए भारी राशि की आवश्यकता होती है, जिसे कांग्रेस से फंडिंग बिल पास कराने के जरिए मंजूरी मिलती है। जब यह बिल पास नहीं होता, तो सरकारी खर्च के लिए फंड खत्म हो जाते हैं और गैर-जरूरी सरकारी सेवाओं को बंद करना पड़ता है। इस स्थिति को ही शटडाउन कहा जाता है।

शटडाउन के पीछे क्या वजह है?

राजनीतिक मतभेद और कांग्रेस में गतिरोध के कारण बजट बिल पारित नहीं हो सका। इससे सरकार के पास खर्च करने के लिए कानूनी फंडिंग उपलब्ध नहीं रह गई। ऐसे में कई सरकारी कामकाज रुक जाते हैं और हजारों सरकारी कर्मचारी बिना वेतन के छुट्टी पर चले जाते हैं।

शटडाउन के दौरान कौन-कौन से काम होंगे प्रभावित?

लगभग 40% यानी 8 लाख सरकारी कर्मचारी बिना वेतन के टेम्पररी छुट्टी पर भेजे जा सकते हैं।

हेल्थ और ह्यूमन सर्विस विभाग में 41% कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजने की योजना है।

नेशनल पार्क, म्यूजियम और कई सरकारी वेबसाइटें बंद हो जाएंगी।

ट्रांसपोर्ट सेवाओं में देरी हो सकती है, खासकर उड़ानों में।

हालांकि, कानून व्यवस्था, सीमा सुरक्षा, मेडिकल आपातकालीन सेवाएं और हवाई सेवाएं जारी रहेंगी।

ट्रंप के लिए क्या मायने रखता है यह शटडाउन?

यह पहला मौका है जब सात साल बाद अमेरिका में फंड की कमी के कारण सरकारी सेवाएं बंद हो रही हैं। 2018 में ट्रंप के कार्यकाल में 34 दिन तक शटडाउन चला था, लेकिन इस बार स्थिति और गंभीर मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप इस स्थिति का राजनीतिक लाभ उठा सकते हैं, जिससे लाखों कर्मचारियों की छंटनी और कई अहम योजनाओं को बंद करने का खतरा है।

शटडाउन का आर्थिक प्रभाव

शटडाउन जितना लंबा चलेगा, उसका असर उतना ही गहरा होगा। बाजारों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और अमेरिकी अर्थव्यवस्था कमजोर हो सकती है। साथ ही सरकारी सेवाओं की कमी से आम जनता को भी कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

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