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अमेरिकी टैरिफ नीति से वैश्विक व्यापार में हो सकता है असंतुलन, भारत के लिए कितनी चुनौती ?

इंटरनेशनल डेस्क : अमेरिका में ट्रंप सरकार आने के बाद अमेरिका ने हाल ही में अपने कई आयातित सामानों पर टैरिफ यानि आयात शुल्क बढ़ाया है, इस फैसले का असर चीन, यूरोप और भारत समेत दुनिया के लगभग सभी देशों में दिखा है। यही वजह है कि अमेरिकी टैरिफ नीतियों में हुई हालिया वृद्धि ने वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव डाला है। क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऐलान के बाद इन नई नई टैरिफ नीतियों ने वैश्विक व्यापार असंतुलन को और बढ़ा दिया है। जिससे चीन, भारत समेत दुनिया के कई बड़े देश प्रभावित हुए हैं, ऐसे में अमेरिका की तरफ से बढ़ाए गए टैरिफ के दामों पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी आई हैं। भारत में भी अमेरिकी टैरिफ नीतियों का कोई सकारात्मक असर नहीं हुआ है, इससे दोनों देशों के व्यापार पर भी प्रभाव पड़ने की संभावना जारी की गई है।

अमेरिकी टैरिफ नीतियों पर वैश्विक प्रतिक्रियाएं

अमेरिकी टैरिफ नीतियों पर अलग-अलग वैश्विक प्रतिक्रियाएं आई है, दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक तरह से यह ऐलान किया कि जो देश अमेरिका पर जितना टैरिफ लगाता है उसी हिसाब से अमेरिका भी टैरिफ लगाएगा। लेकिन ज्यादातर देशों ने माना है कि वैश्विक लिहाज से यह उपयोगी नहीं हो सकता। क्योंकि इससे व्यापारिक असंतुलन आने की संभावना है। यही वजह है कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष यानि आईएमएफ ने 2025 के लिए वैश्विक विकास दर का अनुमान 2।8 प्रतिशत तक घटा दिया है, जिसे जनवरी 2025 के हिसाब से तुलना की जाए तो यह अनुमानित दर से 3।3 प्रतिशत कम है।

इन आंकड़ों को लेकर आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री पियरे-ओलिवियर गुरीनचास ने भी मीडिया में टिप्पणी करते हुए कहा था कि ‘हम एक नए युग में प्रवेश कर रहे हैं, जहां पिछले 80 वर्षों से चल रहा वैश्विक आर्थिक ढांचा फिर से स्थापित हो रहा है।‘ इसी तरह से इकोनॉमिक कॉरपोरेशन एंड डेवलपमेंट ने भी यह बात कही है कि अमेरिकी टैरिफ वृद्धि से वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि धीमी हो सकती है और मुद्रास्फीति में वृद्धि हो सकती है। यानि दुनिया के दो बड़े संगठन आईएमएफ और ओईसीडी जैसे बड़े आर्थिक संस्थानों ने यह माना है कि इससे वैश्विक व्यापार पर धीमा होने की संभावना है और अगर ऐसा होता है तो महंगाई बढ़ सकती है।

अमेरिकी टैरिफ नीतियों का भारत पर असर

अमेरिका और भारत के बीच बड़ा व्यापार है, लेकिन अमेरिकी टैरिफ नीतियों पर भारत पर भी अलग-अलग असर पड़ सकता है। खास बात यह है कि भारत के लिए, अमेरिकी टैरिफ वृद्धि का सीधा असर उसके निर्यात पर पड़ा है। देश के अलग-अलग मीडिया संस्थानों ने इस पर रिपोर्ट बनाई है, टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत के अमेरिकी निर्यात में 2025 में $5।76 बिलियन की कमी आने का अनुमान जताया गया था, खास कर समुद्री भोजन, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स और सोने के आभूषणों के क्षेत्रों में यह प्रभाव सबसे ज्यादा हो सकता है। क्योंकि भारत की तरफ से अमेरिका में जो सामान जाता है, अब उस पर ज्यादा टैक्स लगना शुरू हो गया है, जिससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिका में सामान भेजने पर ज्यादा पैसा खर्चा करना पड़ेगा। ऐसे में इसका असर कितना ज्यादा होता है, यह आने वाले समय में देखने को मिल सकता है।

भारतीय जानकारों की राय

अमेरिकी टैरिफ नीतियों पर भारत में भी जानकारों की अलग-अलग राय मिली है, क्योंकि इसका पूरा असर थोड़े समय के बाद देखने को मिलेगा, लेकिन ASSOCHAM के प्रमुख संजय नायर ने एक मीडिया संस्थान से बातचीत में यह कहा ‘यह समय है जब भारतीय कंपनियों को अपनी गुणवत्ता और कीमतों में सुधार करना होगा, तभी हम अमेरिकी बाजार में टिक पाएंगे।उन्होंने भारतीय उद्योगों को अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और अमेरिकी बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की सलाह दी है। हालांकि भारत भारत सरकार इस पूरे मसले पर नजर रख रही है और जरूरत पड़ी तो व्यापारिक कदम उठाए जा सकते हैं, क्योंकि भारत सरकार के वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने यही बात कही थी, उन्होंने कहा था कि भारत इस स्थिति का रणनीतिक विश्लेषण करेगा और आवश्यक कदम उठाएगा। यानि फिलहाल इस पर नजर रखी जा रही है।

चीन और यूरोप की प्रतिक्रियाएं

अमेरिकी टैरिफ नीतियों का असर केवल भारत ही नहीं बल्कि चीन और यूरोप पर भी पड़ा है। चीन ने अमेरिकी टैरिफ वृद्धि के जवाब में 125 प्रतिशत तक के टैरिफ लगाए हैं, जिससे लगभग 300 चीनी कंपनियों को अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंजों से हटाने पर विचार कर रहा है, इसी तरह से यूरोपीय संघ ने भी अमेरिकी टैरिफों का विरोध किया है और संभावित प्रतिकार उपायों की चेतावनी दी है। यानि अमेरीकी ट्रैरिफ नीतियों को लेकर दुनियाभर की नजर है, भारत भी इस पर नजर रखने के साथ-साथ भविष्य में प्रभावी भूमिका की बात कहता दिख रहा है तो चीन और यूरोपीय देशों की भी यही प्रतिक्रियाएं हैं।

दरअसल, अमेरिका का कहना है कि वह अपने घरेलू उद्योगों को मजबूत करना चाहता है। इसलिए उसने कुछ देशों से आने वाले उत्पादों, जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, स्टील, बैटरियां और सोलर पैनलों पर भारी टैक्स लगाया है, इस वजह से उन देशों से सामान खरीदना अमेरिका के लिए महंगा हो गया है। लेकिन अचानक से बदली इन नीतियों पर का दुनिया में ज्यादा सकारात्मक प्रभाव नहीं दिखा है। जिससे इस पर आने वाले समय में देखने को मिलेगा।

वैश्विक व्यापार पर असर

वैश्विक व्यापार पर असर अमेरिकी टैरिफ नीतियों ने कुछ हद तक शुरुआत में ही असंतुलन की तरफ बढ़ा दिया है। क्योंकि इसका असर लगभग लगभग पूरी दुनिया में दिखा है। जहां एक ओर यह भारतीय निर्यातकों के लिए चुनौतियां प्रस्तुत करती है, वहीं दूसरी ओर कुछ क्षेत्रों में अवसर भी उत्पन्न कर रही है। भारतीय व्यापारियों और विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति का सामना करने के लिए प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और अमेरिकी बाजार में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की आवश्यकता है। जबकि आने वाले वक्त में इस पर दुनिया के बड़े देश कुछ अहम कदम भी उठा सकते हैं।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक—दिव्या तिवारी)

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