इंटरनेशनल डेस्क: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान की ओर से ड्रोन हमलों के खतरे को देखते हुए अमेरिका अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत करने में जुट गया है। इसी कड़ी में अमेरिका जल्द ही ‘मेरोप्स’ नाम का एक नया एंटी-ड्रोन सिस्टम इस क्षेत्र में तैनात करने की योजना बना रहा है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह वही तकनीक है, जिसका इस्तेमाल पहले यूक्रेन में किया जा चुका है और वहां इसने रूसी ड्रोन को रोकने में अच्छा प्रदर्शन किया था।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, पश्चिम एशिया में फिलहाल छोटे ड्रोन हमलों से निपटने के लिए पर्याप्त तकनीकी व्यवस्था नहीं है। हालांकि अमेरिका के पास मिसाइलों को रोकने के लिए Patriot Missile System और THAAD Missile Defense System जैसे अत्याधुनिक सिस्टम मौजूद हैं, जिनकी मदद से कई बार ईरान की मिसाइलों को हवा में ही नष्ट किया गया है। लेकिन छोटे, सस्ते और बड़ी संख्या में छोड़े जाने वाले ड्रोन को रोकना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
अमेरिकी सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के शाहेद ड्रोन बहुत ज्यादा जटिल तकनीक से नहीं बनाए जाते, लेकिन इन्हें बड़ी संख्या में इस्तेमाल किया जाता है। यही वजह है कि ये ड्रोन काफी खतरनाक साबित होते हैं। इसी तरह रूस भी यूक्रेन के साथ चल रहे युद्ध में इन ड्रोन का बड़े पैमाने पर उपयोग कर रहा है और समय-समय पर इनकी तकनीक को बेहतर बना रहा है। इस स्थिति को देखते हुए अमेरिका अब ऐसे समाधान की तलाश में है, जो सस्ते होने के साथ-साथ जल्दी काम कर सकें।
अमेरिकी कांग्रेस की इंटेलिजेंस कमेटी के वरिष्ठ डेमोक्रेटिक सदस्य जिम हाइम्स का कहना है कि अमेरिका मिसाइल हमलों को रोकने में काफी मजबूत है, लेकिन ड्रोन से निपटना कहीं ज्यादा मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने बताया कि एक ईरानी ड्रोन की कीमत आमतौर पर 50 हजार डॉलर से भी कम होती है और उसे गिराने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इंटरसेप्टर मिसाइल की कीमत लाखों डॉलर तक पहुंच जाती है। ऐसे में सस्ते ड्रोन को गिराने के लिए लगातार महंगी मिसाइलों का इस्तेमाल करना व्यावहारिक नहीं है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह समस्या लागत और संसाधनों के असंतुलन से जुड़ी है। जब दुश्मन सस्ते ड्रोन से हमला करता है और उसे रोकने के लिए महंगे हथियारों का इस्तेमाल करना पड़े, तो लंबे समय तक यह रणनीति टिकाऊ नहीं रहती। इसी वजह से अमेरिका अब ऐसी तकनीक विकसित करने पर जोर दे रहा है, जो कम लागत में ड्रोन हमलों को रोक सके।
इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए मेरोप्स एंटी-ड्रोन सिस्टम विकसित किया गया है। यह एक खास तकनीक है, जिसमें दुश्मन के ड्रोन को नष्ट करने के लिए दूसरे ड्रोन का ही इस्तेमाल किया जाता है। यानी यह सिस्टम दुश्मन ड्रोन का पीछा करके उसे हवा में ही खत्म कर देता है।
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इस सिस्टम की कई खास खूबियां बताई जा रही हैं। इसे एक मध्यम आकार के पिकअप ट्रक में आसानी से लगाया जा सकता है, जिससे इसे कहीं भी तेजी से तैनात किया जा सके। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो आसमान में उड़ रहे ड्रोन को पहचानने में मदद करती है। इसके अलावा यदि सिग्नल या सैटेलाइट जाम हो जाएं, तब भी यह सिस्टम खुद से रास्ता तय करके दुश्मन ड्रोन के पास पहुंच सकता है और उसे नष्ट कर सकता है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ेगा। ऐसे में मेरोप्स जैसी तकनीकें बेहद अहम साबित हो सकती हैं, क्योंकि ये कम लागत में दुश्मन के ड्रोन खतरे को खत्म करने की क्षमता रखती हैं।

