Last Updated: September 23, 2026

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US H1B Visa: अमेरिका जाने वालों के लिए नई शर्तें लागू,बदल गए Visa Rules

March 13, 2026

US H1B Visa: अमेरिका जाने वालों के लिए नई शर्तें लागू,बदल गए Visa Rules

इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिका ने विदेशी पेशेवरों के लिए जारी होने वाले H-1B वीजा सिस्टम में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। नई व्यवस्था के तहत अब आवेदकों का चयन रैंडम लॉटरी के बजाय उनके वेतन स्तर के आधार पर किया जाएगा। यह बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाला है और इसके लिए अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी ने फॉर्म I-129 की प्रक्रिया को भी अपडेट किया है।

वेतन के आधार पर होगा चयन

नई नीति के अनुसार H-1B वीजा के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को चार वेतन श्रेणियों लेवल-1 से लेवल-4 में वर्गीकृत किया जाएगा। उच्च वेतन पाने वाले आवेदकों को वीजा मिलने की संभावना ज्यादा होगी। उदाहरण के तौर पर, लेवल-4 के उम्मीदवार को चयन के चार अवसर मिल सकते हैं, जबकि लेवल-1 के उम्मीदवार को केवल एक अवसर दिया जाएगा।

कंपनियों को देनी होगी विस्तृत जानकारी

नई प्रक्रिया में कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों की भूमिका, अनुभव, वेतन और नौकरी से जुड़ी अन्य जानकारी विस्तार से देनी होगी। इससे सरकार को यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि वीजा वास्तव में उच्च कौशल वाले पेशेवरों को ही मिल रहा है।

वीजा फीस में भारी बढ़ोतरी

H-1B वीजा से जुड़ी फीस में भी काफी वृद्धि की गई है। पहले जहां इसकी लागत लगभग 9,000 डॉलर थी, वहीं सितंबर 2025 में इसे बढ़ाकर लगभग 1 लाख डॉलर कर दिया गया। यह वीजा आमतौर पर छह साल के लिए जारी किया जाता है तीन-तीन साल की दो अवधि में। इसके बाद योग्य उम्मीदवार ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं।

अमेरिका को चाहिए कुशल प्रतिभा

अमेरिकी नेतृत्व का H-1B वीजा को लेकर रुख समय-समय पर बदलता रहा है। एक समय इसे अमेरिकी नौकरियों के लिए खतरा बताया गया था, लेकिन अब सरकार का कहना है कि देश को वैश्विक स्तर की प्रतिभा की आवश्यकता है। इसी दिशा में ‘गोल्ड कार्ड’ और ‘प्लेटिनम कार्ड’ जैसी नई वीजा श्रेणियों की भी चर्चा हो रही है, जिनके तहत उच्च निवेश या विशेष योग्यता वाले लोगों को लंबे समय तक अमेरिका में रहने की अनुमति दी जा सकती है।

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भारतीय पेशेवरों पर पड़ सकता है असर

भारत हर साल बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट तैयार करता है, जिनमें से कई H-1B वीजा के जरिए अमेरिका में काम करने जाते हैं। आईटी कंपनियां जैसे इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो, कॉग्निजेंट और एचसीएल इस वीजा के प्रमुख स्पॉन्सर मानी जाती हैं। हालांकि नई फीस और चयन प्रक्रिया के चलते कुछ भारतीय पेशेवर अब यूरोप, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और मध्य पूर्व जैसे विकल्पों की ओर भी रुख कर सकते हैं।

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