इंटरनेशनल डेस्क: पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध लगातार ज्यादा खतरनाक होता जा रहा है। अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान भी जोरदार जवाबी कार्रवाई कर रहा है। मिसाइलों और ड्रोन हमलों के कारण पूरे इलाके में तनाव बढ़ गया है। यह संघर्ष अब सातवें दिन में पहुंच चुका है और हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। इसी बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की का एक अहम बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि ईरानी ड्रोन के खतरे से निपटने के लिए अमेरिका और पश्चिम एशिया के कई देश यूक्रेन के अनुभव से मदद लेना चाहते हैं।
जेलेंस्की के बयान से साफ संकेत मिलता है कि यह संघर्ष अब केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर दुनिया की सुरक्षा और कूटनीति पर भी पड़ने लगा है। कई देश अब यूक्रेन की ड्रोन रोधी तकनीक और उसके अनुभव में दिलचस्पी दिखा रहे हैं, क्योंकि यूक्रेन पिछले कई वर्षों से ड्रोन हमलों का सामना कर रहा है।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने बताया कि अमेरिका और पश्चिम एशिया के कुछ देशों ने ईरान के शाहेद ड्रोन से बचाव के लिए यूक्रेन से संपर्क किया है। उन्होंने कहा कि हाल ही में उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, जॉर्डन और कुवैत के नेताओं से इस मुद्दे पर बातचीत भी की है। इन देशों को डर है कि ईरानी ड्रोन हमले उनके लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।
दरअसल रूस ने यूक्रेन के खिलाफ लंबे समय से शाहेद ड्रोन का इस्तेमाल किया है। पिछले कुछ वर्षों में रूस ने हजारों ड्रोन हमले किए हैं। हाल ही में एक रात में रूस ने 800 से अधिक ड्रोन और नकली लक्ष्य भेजकर बड़ा हमला किया था। इसी तरह अब ईरान भी अमेरिका और इजराइल के हमलों के जवाब में पश्चिम एशिया में ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है।
जेलेंस्की ने यह भी कहा कि यूक्रेन अन्य देशों की मदद करने के लिए तैयार है, लेकिन उनकी पहली प्राथमिकता अपने देश की सुरक्षा है। उन्होंने साफ किया कि यूक्रेन तभी मदद देगा, जब इससे उसकी सुरक्षा कमजोर न हो और रूस के खिलाफ चल रहे युद्ध को खत्म करने की कोशिशों को नुकसान न पहुंचे। उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेन उन्हीं देशों की मदद करता है, जो यूक्रेन की सुरक्षा और उसके लोगों का समर्थन करते हैं।
जेलेंस्की के अनुसार, अमेरिका ने भी पश्चिम एशिया में ड्रोन हमलों से निपटने के लिए यूक्रेन से मदद मांगी है। इसके बाद उन्होंने कुछ उपकरण और विशेषज्ञ भेजने का आदेश दिया है, हालांकि उन्होंने इस बारे में ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं की।
ड्रोन से बचाव के मामले में यूक्रेन ने पिछले कुछ वर्षों में काफी अनुभव हासिल किया है। लगातार ड्रोन हमलों का सामना करते हुए वहां के विशेषज्ञों ने कम लागत वाली लेकिन प्रभावी तकनीक विकसित की है। यूक्रेन ने ऐसे इंटरसेप्टर ड्रोन बनाए हैं, जो करीब एक हजार डॉलर की लागत में दुश्मन के ड्रोन को ढूंढकर उसे नष्ट कर सकते हैं। इस सस्ती तकनीक ने कई देशों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
पिछले साल सितंबर में पोलैंड को भी सस्ते ड्रोन से खतरे का अंदेशा हुआ था। उस समय पोलैंड ने अपने महंगे लड़ाकू विमानों जैसे एफ-35 लाइटनिंग II और एफ-16 फाइटिंग फाल्कन को तुरंत उड़ान भरने के लिए तैयार कर दिया था। विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन का ड्रोन उद्योग तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में वह इन तकनीकों का निर्यात भी कर सकता है।
यूरोपीय संघ की शीर्ष राजनयिक काजा कल्लास ने भी कहा है कि यूरोप और खाड़ी देशों की बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि यूक्रेन का अनुभव ईरानी ड्रोन से बचाव में कैसे मददगार हो सकता है।
इधर पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का असर रूस और यूक्रेन के बीच चल रही शांति वार्ता पर भी पड़ रहा है। यह नया युद्ध अब सातवें दिन में पहुंच चुका है और इसकी वजह से दुनिया का ध्यान यूरोप में चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध से हटता हुआ दिखाई दे रहा है। जेलेंस्की ने बताया कि इस स्थिति के कारण अमेरिका की मध्यस्थता में होने वाली रूस-यूक्रेन वार्ता का अगला दौर फिलहाल टाल दिया गया है। उनका कहना है कि जब सुरक्षा और राजनीतिक हालात बेहतर होंगे तब बातचीत फिर शुरू की जाएगी।
इस बीच रूस और यूक्रेन के बीच कैदियों की अदला-बदली भी हुई है। अमेरिका की मध्यस्थता में दोनों देशों ने करीब 200-200 युद्ध बंदियों को रिहा किया है। रूसी वार्ताकार व्लादिमीर मेडिंस्की ने बताया कि दो दिनों में कुल 500-500 कैदियों की अदला-बदली करने की योजना है।
यूक्रेन की संसद की विदेश मामलों की समिति के प्रमुख ऑलेक्जेंडर मेरेज्को का आरोप है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बातचीत को लंबा खींचना चाहते हैं। उनका कहना है कि पुतिन युद्ध जारी रखते हुए अमेरिका के नए प्रतिबंधों से बचने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि यूक्रेनी सेना ने हाल के हफ्तों में कुछ इलाकों में रूस की सेना को पीछे धकेलने में सफलता हासिल की है। एक रिपोर्ट के अनुसार यूक्रेन ने इस साल की शुरुआत से अब तक करीब 257 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र फिर से अपने नियंत्रण में ले लिया है।

