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अल्बानिया में पीएम के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्रों का हिंसक प्रदर्शन, 51 पुलिसकर्मी घायल

Violent student protests in Albania demanding the resignation of the Prime Minister

Violent student protests in Albania demanding the resignation of the Prime Minister

तिराना: अल्बानिया में पिछले तीन दिनों से छात्र सड़क पर सरकार विरोधी प्रदर्शन कर रहे हैं। राजधानी तिराना में लगातार तीसरे दिन प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं, जिसमें 51 पुलिस कर्मी घायल हो गए। प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री के इस्तीफे और छात्रों के लिए अधिक सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।

अल्बानिया स्टेट पुलिस के हवाले से मीडिया आउटलेट अल्बानिया डेली न्यूज ने बताया, पुलिसकर्मियों, सार्वजनिक संस्थानों, और सार्वजनिक व निजी संपत्ति पर कथित हमलों के सिलसिले में 65 प्रदर्शनकारियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। पुलिस महानिदेशक स्केंडर हिता ने ट्रॉमा अस्पताल जाकर घायल अधिकारियों का हाल जाना। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन में शामिल नकाबपोश लोगों ने अधिकारियों पर पत्थर, भारी चीजें और मोलोटोव कॉकटेल (पेट्रोल बम) फेंके।

पुलिस के बयान के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान अधिकारियों को 14 घंटे से अधिक समय तक लगातार हमलों का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों के घायल होने की कुल संख्या पुलिस ने नहीं बताई। हालांकि, तिराना के सार्वजनिक अस्पताल ने जानकारी दी कि हिंसा में घायल सात प्रदर्शनकारियों ने चिकित्सा सहायता ली। वहीं, पुलिस ने तिराना की कई प्रमुख सड़कों पर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। राजधानी के अलावा देश के अन्य शहरों में भी विरोध प्रदर्शन फैल गए हैं। प्रदर्शनकारी विश्वविद्यालयों की बदहाली और अधिक फीस का मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री इदी रामा के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स को लिखित जवाब में रामा ने कहा कि उनकी सरकार को पिछले साल हुए लोकतांत्रिक चुनावों में जनादेश मिला था और सरकार का बदलाव चुनावों के जरिए ही होना चाहिए। उन्होंने कहा, “मेरे इस्तीफे की मांग के संबंध में कहना चाहूंगा कि सरकारें लोकतांत्रिक चुनावों के माध्यम से बदली जाती हैं। पिछले साल चुनाव हुए थे, क्रांति नहीं।” रामा ने कहा कि उनकी जिम्मेदारी लोगों की चिंताओं को सुनना, जायज मांगों पर ध्यान देना और अल्बानिया को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता अपनाना उन अल्बानियाई नागरिकों के जनादेश के साथ विश्वासघात होगा, जिन्होंने उन्हें यूरोपीय संघ (ईयू) की सदस्यता के लिए बातचीत पूरी करने की जिम्मेदारी सौंपी है।

प्रधानमंत्री ने शिक्षा की बढ़ती लागत पर बातचीत करने की इच्छा जताई, लेकिन सार्वजनिक संस्थानों पर हमले, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालने की घटनाओं की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों का छात्रों की जायज मांगों से कोई संबंध नहीं है। तिराना में मंगलवार और बुधवार को पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच कई घंटे तक हिंसक झड़पें हुईं। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने कई सरकारी इमारतों में जबरन प्रवेश किया और कम से कम एक इमारत में आग लगा दी। पिछले साल चौथी बार प्रधानमंत्री बने रामा के सामने इन प्रदर्शनों को अब तक की सबसे बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

मौजूदा अशांति से पहले भी देश में कई महीनों तक विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं। इनका प्रमुख कारण अल्बानिया के दक्षिणी तट पर एक लग्जरी रिसॉर्ट बनाने की योजना रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर के समर्थन वाले इस परियोजना को लेकर कानूनी चुनौतियां भी सामने आई हैं। रामा ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कहा कि इससे निपटना आवश्यक है और यूरोपीय संघ ने भी हाल में इस दिशा में अल्बानिया के प्रयासों को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि संभव है कि देश और विदेश में कुछ ताकतें अल्बानिया को यूरोपीय संघ की सदस्यता की दिशा में आगे बढ़ते नहीं देखना चाहती हों, लेकिन वह हिंसा को देश के यूरोपीय भविष्य के रास्ते में बाधा नहीं बनने देंगे।

इस बीच, तिराना स्थित यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल ने तनाव कम करने की अपील दोहराई। उसने प्रदर्शन के दौरान हिंसा बढ़ने और सार्वजनिक तथा निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाए जाने की कड़ी निंदा की। प्रतिनिधिमंडल ने अपने बयान में प्रदर्शनकारियों से संयम बरतने और हिंसा से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं है। अल्बानिया और मोंटेनेग्रो बाल्कन क्षेत्र के उन देशों में शामिल हैं, जो यूरोपीय संघ में शामिल होने की प्रक्रिया में आगे बढ़ रहे हैं। अल्बानिया का लक्ष्य 2028 तक ईयू की सदस्यता हासिल करना है।

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