इंटरनेशनल डेस्कः यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने एक ऐसा दावा किया है जो आने वाले समय में युद्ध की तस्वीर बदल सकता है। उनका कहना है कि अब युद्ध के मैदान में इंसानों की जगह रोबोट और ड्रोन लड़ सकते हैं और जीत भी सकते हैं।
बिना सैनिकों के जीती गई लड़ाई
जेलेंस्की के अनुसार, 2022 में रूस के साथ युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि यूक्रेन की सेना ने केवल ड्रोन और मानव रहित ग्राउंड रोबोट (UGVs) की मदद से रूसी सेना की एक टुकड़ी को सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया। इस ऑपरेशन में कोई भी यूक्रेनी सैनिक सीधे लड़ाई में शामिल नहीं था और बिना किसी नुकसान के दुश्मन की पोजिशन पर कब्जा कर लिया गया।
The future is already on the front line – and Ukraine is building it. These are our ground robotic systems. For the first time in the history of this war, an enemy position was taken exclusively by unmanned platforms – ground systems and drones. The occupiers surrendered, and the… pic.twitter.com/qLQKfxPdiB
— Volodymyr Zelenskyy / Володимир Зеленський (@ZelenskyyUa) April 13, 2026
हथियारों के क्षेत्र में तेजी से बढ़त
यूक्रेनी गनस्मिथ दिवस पर बोलते हुए जेलेंस्की ने कहा कि उनका रक्षा उद्योग अब काफी मजबूत हो चुका है। अब यूक्रेन सिर्फ छोटे ड्रोन ही नहीं, बल्कि कई तरह के आधुनिक हथियार बना रहा है, जैसे फर्स्ट-पर्सन-व्यू (FPV) ड्रोन, लंबी दूरी की मिसाइलें, इंटरसेप्टर, गोला-बारूद व रोबोटिक सिस्टम। उन्होंने बताया कि यूक्रेन हर साल लाखों FPV ड्रोन बनाने की क्षमता रखता है।
“भविष्य युद्ध के मैदान में आ चुका है”
जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने देश के हथियारों की झलक दिखाते हुए कहा, भविष्य अब सामने है, और यूक्रेन इसे बना रहा है। उन्होंने खास तौर पर ग्राउंड रोबोटिक सिस्टम का जिक्र करते हुए कहा कि इतिहास में पहली बार दुश्मन की पोजिशन पर पूरी तरह से मानव रहित सिस्टम जैसे ड्रोन और रोबोट के जरिए कब्जा किया गया।
बड़ी संख्या में मिशन पूरे
राष्ट्रपति ने बताया कि पिछले तीन महीनों में यूक्रेन के ग्राउंड रोबोटिक सिस्टम ने 22,000 से ज्यादा मिशन पूरे किए हैं। इन मिशनों में कई तरह के रोबोटिक सिस्टम इस्तेमाल किए गए, जैसे रैटेल, टर्मिट, अर्डाल, रिस, जमी, प्रोटेक्टर, वोला को पूरे किये।
युद्ध का बदलता स्वरूप
जेलेंस्की के इस दावे से यह साफ होता है कि भविष्य के युद्ध में इंसानों की भूमिका कम हो सकती है और मशीनों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ेगा।
अगर यह तकनीक और आगे बढ़ती है, तो आने वाले समय में युद्ध पूरी तरह से रोबोट और ड्रोन के जरिए लड़े जा सकते हैं।

