इंटरनेशनल डेस्क: दक्षिण कोरिया मंगलवार को एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, जहाँ लाखों नागरिक नए राष्ट्रपति के चुनाव के लिए मतदान कर रहे हैं। यह चुनाव असामान्य परिस्थितियों में हो रहा है, क्योंकि पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को दिसंबर में देश में अस्थायी मार्शल लॉ लागू करने के बाद महाभियोग और बर्खास्तगी का सामना करना पड़ा था।
मार्शल लॉ लागू करने के यून के निर्णय ने न केवल राजनीतिक अस्थिरता पैदा की, बल्कि देश के कूटनीतिक संबंधों और आर्थिक स्थिरता पर भी गंभीर प्रभाव डाला। परिणामस्वरूप, देश में एक अस्थायी सत्ता शून्यता बनी रही, जिसे अब यह चुनाव समाप्त करने वाला है।
-चुनावी समीकरण और मुख्य उम्मीदवार
जनता की निराशा का सीधा लाभ डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता ली जे-म्यूंग को मिलता दिखाई दे रहा है। चुनाव-पूर्व सर्वेक्षणों में उन्हें स्पष्ट बढ़त हासिल है। ली वही नेता हैं जिन्होंने 2022 में यून से बेहद करीबी मुकाबले में हार का सामना किया था और बाद में यून के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई।
इस बार ली ने राष्ट्रीय एकता, लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्बहाली और राजनीतिक स्थिरता को अपनी प्राथमिकता बताते हुए मतदाताओं को आश्वस्त किया है। उन्होंने यह भी वादा किया है कि सत्ता में आने पर वह विभाजन और अस्थिरता के इस दौर को पीछे छोड़कर देश को एकजुट करने का प्रयास करेंगे।
-रूढ़िवादी संकट में
मुख्य रूढ़िवादी प्रत्याशी किम मून सू को जन समर्थन जुटाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उनकी पार्टी, पीपुल्स पावर पार्टी, यून के विवादास्पद फैसलों पर आंतरिक मतभेदों से जूझ रही है, जिससे पार्टी की छवि और रणनीति दोनों प्रभावित हुए हैं।
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