वर्ष 2025 शांग्रीला वार्तालाप हाल ही में सिंगापुर में समाप्त हुआ। इस वार्तालाप में फिलीपींस के प्रतिनिधि मंडल ने दक्षिण चीन सागर सवाल पर झूठे प्रचार की रणनीति अपनायी, जिस पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को सतर्क रहना चाहिए।
शांग्रीला वार्तालाप में फिलीपींस ने चीन पर कीचड़ उछालने की कोशिश की। उदाहरण के लिए फिलीपींस के रक्षा मंत्री गिल्बर्टो टियोडोरो ने कथित हिंद प्रशांत क्षेत्र की अस्थिरता का कारण चीन की बढ़ती शक्ति को बताया और चीन द्वारा कानून के अनुसार प्रभुसत्ता और सागर अधिकार की रक्षा करने को कथित धौंस बतायी। उनके भाषण से वास्तव में दक्षिण चीन सागर मुद्दे पर फिलीपींस सरकार का रणनीति और नीतिगत तर्क दर्शाया गया है।
सबसे पहले फिलीपींस निरंतर ऐसा नैरेटिव मजबूत कर रहा है कि छोटा देश तो स्वाभाविक रूप से शिकार है। उसका आभास है कि दक्षिण चीन सागर मुद्दे पर चीन को फिलीपींस से रियायत करने का प्राकृतिक कर्तव्य है। यह वास्तव में बड़े देश का नैतिक अपहरण है और अंतर्राष्ट्रीय कानून केंद्रित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में न्याय के सिद्धांत की उपेक्षा है। ऐसे तोड-मरोड़ किये गये तर्क के तहत फिलीपींस कमजोर पक्ष के मुखौटे में चीन का नैतिक अपहरण कर रहा है और दक्षिण चीन सागर मुद्दे पर चीन को हटने लिए मजबूर कर रहा है।
दूसरा,काले को सफेद बताया जा रहा है यानी दक्षिण चीन सागर में फिलीपींस का अवैध हित छीनने को न्यायपूर्ण कार्रवाई बताया गया, जबकि चीन का राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा करने को दुष्ट कार्रवाई बतायी गयी। इससे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को भ्रमित किया जा रहा है।
यह स्पष्ट है कि फिलीपींस झूठे प्रचार से अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की सहानुभूति जुटाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन अच्छाई और बुराई तो दूध और पानी की तरह अलग है। दक्षिण चीन सागर पर चीन और फिलीपींस का वाद-विवाद ऐसा सवाल नहीं है कि कौन बड़ा है और कौन छोटा है, बल्कि ऐसा सवाल है कि कौन सही है और कौन गलत है।
फिलीपींस की ऐसी मानसिकता के पीछे अमेरिका और पश्चिमी देशों की उसे कूटनीतिक, कानूनी और सैन्य मदद है। वे फिलीपींस को चीन का नियंत्रण करने के लिए एक मोहरे के रूप में प्रयुक्त करते हैं। लेकिन बाहरी शक्ति पर निर्भर रहकर अवैध हितों का अनुसरण करना पतंगे का आग की लपटों में उड़ने जैसा है, जो निश्चित ही उसके लिए हानिकारक सिद्ध होगा।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप , पेइचिंग)