इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के बाद अब दोनों देशों ने दो हफ्ते के युद्धविराम पर सहमति जताई है। इस बीच अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने दावा किया कि ईरान ने दबाव में आकर युद्धविराम की मांग की और अमेरिका ने इस संघर्ष में “निर्णायक सैन्य जीत” हासिल की है।
व्हाइट हाउस में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, जिनमें ईरान की सैन्य और औद्योगिक क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचा। उनके मुताबिक, कुछ ही घंटों में सैकड़ों हमले किए गए और ईरान के रक्षा ढांचे को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया गया।
अमेरिका अपने अधिकांश सैन्य लक्ष्य हासिल कर चुका
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस अभियान को सफल बताते हुए कहा कि अमेरिका अपने अधिकांश सैन्य लक्ष्य हासिल कर चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर के अनुरोध के बाद अमेरिका ने फिलहाल हमले रोकने का फैसला लिया। ट्रंप ने कहा कि यह युद्धविराम इस शर्त पर लागू होगा कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित और खुला रखे। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह कदम आगे चलकर स्थायी शांति समझौते की दिशा में मदद करेगा।
ईरान पर हमले नहीं हुए तो हम भी हमला रोक देंगे: ईरान
वहीं, ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अगर ईरान पर हमले नहीं होते हैं, तो वह भी अपने सैन्य अभियान रोक देगा। उन्होंने पुष्टि की कि दो हफ्तों तक होरमुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही की अनुमति दी जाएगी। अब इस संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत पर जोर दिया जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मोहम्मद बाघेर गालिबफ करेंगे, जबकि अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस बातचीत में शामिल होंगे। यह बैठक इस्लामाबाद में होने की संभावना है। फिलहाल, युद्धविराम लागू होने के बाद क्षेत्र में तनाव कुछ कम हुआ है, लेकिन दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह अस्थायी शांति स्थायी समझौते में बदल पाएगी।

