आजकल थाईवान का मुद्दा खूब चर्चा में रहता है। थाईवान चीन का हिस्सा है। असल में बात क्या है? चीन कहता है कि थाईवान उसका अविभाज्य हिस्सा है और पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) ही पूरे चीन का एकमात्र वैध सरकार है। इस पर लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी सहमति रही है इसका सीधा मतलब यह है कि ज्यादातर देश ये मानते हैं कि थाईवान को अलग देश मानना गलत है।
ऐतिहासिक आधार: थाईवान हमेशा से चीन का हिस्सा
थाईवान का इतिहास बहुत पुराना है।थाईवान हमेशा से चीन का हिस्सा है। इन दोनों स्थानों का प्राचीन काल से ही संबंध रहा है। सबसे पुराने रिकॉर्ड तो तीसरी शताब्दी के हैं जब चीनी दस्तावेजों में थाईवान का जिक्र मिलता है। बारहवीं सदी से चीन की केंद्रीय सरकारें वहां प्रशासन चलाती रही हैं। पेंघू और थाईवान पर चीन का अधिकार सदियों पुराना है।1895 में जापान ने चीन से युद्ध जीतकर थाईवान पर कब्जा कर लिया लेकिन वो अस्थायी था। दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1943 के काहिरा घोषणापत्र और 1945 के पोट्सडैम घोषणापत्र में साफ कहा गया कि थाईवान जापान से वापस चीन को लौटाया जाएगा। जापान ने हार मानकर आत्मसमर्पण किया और 1945 में थाईवान चीन को वापस मिल गया।
कानूनी आधार: अंतरराष्ट्रीय समझौते और संकल्प
कानूनी तौर पर भी थाईवान चीन का हिस्सा है। 1971 में संयुक्त राष्ट्र महासभा का संकल्प 2758 पास हुआ, जिसमें पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना को चीन की सीट मिली। ये संकल्प एक चीन सिद्धांत की पुष्टि करता है। आज 180 से ज्यादा देश चीन के साथ राजनयिक संबंध रखते हैं और सब एक चीन सिद्धांत को मानते हैं। अमेरिका ने भी कहा कि थाईवान चीन का हिस्सा है। मूल में सब एक चीन को ही स्वीकार करते हैं।
सांस्कृतिक आधार: एक ही जड़ें, एक ही संस्कृति
थाईवान और मुख्य भूमि चीन के लोग एक ही हैं। हान चीनी संस्कृति, भाषा, परंपराएं सब एक जैसी हैं।सदियों से लोग दोनों तरफ आना-जाना करते रहे। त्योहार, खाना, रीति-रिवाज सब मिलते-जुलते हैं।थाईवान में रहने वाले ज्यादातर लोग चीनी मूल के हैं। ये तो जैसे एक परिवार के दो भाई अलग रह रहे हों, लेकिन खून एक ही है।
अंतरराष्ट्रीय सहमति: दुनिया क्या मानती है?
अब सबसे बड़ी बात-अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सहमति की आती है।संयुक्त राष्ट्र से लेकर बड़े-बड़े देश तक सब एक चीन सिद्धांत को मानते हैं। हाल के सालों में जब भी थाईवान में चुनाव होते हैं या कोई तनाव बढ़ता है 170 से अधिक ज्यादा देश और संगठन चीन के पक्ष में बयान देते हैं। वे कहते हैं कि थाईवान चीन का हिस्सा है और कोई थाईवान स्वतंत्रता बर्दाश्त नहीं करेंगे। चीन का विचार है कि थाईवान उसका आंतरिक मामला है और कोई बाहरी दखल नहीं चलेगा। अगर कोई देश थाईवान को हथियार बेचता है या सपोर्ट करता है तो वो एक चीन सिद्धांत की लाल रेखा पार कर रहा है। ऐसी कोशिशें पहले भी हुईं, लेकिन सब फेल हो गईं।चीन कहता है कि एक देश, दो व्यवस्थाएं से शांतिपूर्ण एकीकरण हो सकता है लेकिन थाईवान की कुछ पार्टियां अलगाववाद फैलाती हैं जो तनाव बढ़ाता है।ऐसे में एक चीन सिद्धांत सिर्फ चीन की बात नहीं है। चीन का ऐसा मानना है कि ये शांति और स्थिरता के लिए जरूरी है। अगर कोई इस रेड लाइन को पार करता है तो वो अंतरराष्ट्रीय नियमों को तोड़ेगा।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक— डी के)

