Tariff War Started : अमेरिका द्वारा शुरू किये गए टैरिफ युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं पर भारी प्रभाव डाला है। अब तक सभी पक्ष इस बात पर नजर रख रहे हैं कि इस टैरिफ युद्ध का अंतिम परिणाम क्या होगा। विभिन्न पक्षों की राय है कि संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा टैरिफ युद्ध शुरू करने का एक मुख्य उद्देश्य उन प्रतिस्पर्धियों पर नकेल कसना है, जिन्होंने इसकी आधिपत्य स्थिति को हिला दिया है और एक नई वैश्विक उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला के पुनर्निर्माण का प्रयास करना है, जो अमेरिका के हाथ में दृढ़ता से नियंत्रित हो। पर आज की दुनिया अतीत से अलग है। चीन सक्रिय रूप से विविध बाजार का निर्माण कर रहा है और सभी पक्षों के साथ उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला सहयोग को गहरा कर रहा है, साथ ही चीन के पास एक विशाल घरेलू मांग बाजार भी है। बाह्य वातावरण की अनिश्चितता से निपटने में चीन की क्षमता को कम करके नहीं आंका जा सकता।
इस वर्ष की पहली तिमाही में चीन की जीडीपी में वर्ष-दर-वर्ष 5.4% की वृद्धि हुई, जो विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष स्थान पर रहता है। इस उपलब्धि ने विश्व पर गहरी छाप छोड़ी है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के प्रति गंभीर अनिश्चितता होने के बावजूद, चीनी अर्थव्यवस्था में पर्याप्त लचीलापन है और वह घरेलू मांग पर निर्भर रहते हुए सतत विकास हासिल करने में पूरी तरह सक्षम है। उधर, अमेरिका अपने चक्रीय आर्थिक संकटों से बच नहीं सका, अपने आंतरिक संकटों को हल करने के लिए उसे घरेलू संघर्षों और विदेशों में दबावों को हटाने के प्रयास में व्यापार युद्ध शुरू करना पड़ा। लेकिन, टैरिफ युद्ध शुरू करना भानुमती का पिटारा खोलने जैसा है। भविष्य में क्या होगा, इस पर संयुक्त राज्य अमेरिका नियंत्रण नहीं कर सकता। आज विश्व में अर्थव्यवस्थाओं के बीच परस्पर निर्भरता बहुत अधिक है, और अमेरिका द्वारा शुरू किया गया टैरिफ युद्ध पूरे विश्व पर बहुत बड़ा प्रभाव डालेगा।
इस वर्ष की पहली तिमाही में चीन के वस्तु निर्यात में 6.9% की वृद्धि हुई। इनमें से, संयुक्त राज्य अमेरिका को निर्यात 830.45 बिलियन युआन था, जो वर्ष-दर-वर्ष 5.6% की वृद्धि थी। इससे पता चलता है कि चीन और अमेरिका आर्थिक रूप से अत्यधिक एक-दूसरे पर निर्भर हैं और कम समय में इन्हें अलग करना कठिन है। इसके अलावा, बाहरी वस्तुओं पर भारी निर्भरता से पता चलता है कि अमेरिका का “पुनः औद्योगिकीकरण” वास्तव में विफल हो गया है, और अन्य देशों में विनिर्माण स्थानांतरित करने का प्रयास भी विफल हो गया है। पिछले आठ वर्षों में जब से अमेरिका ने चीन के खिलाफ व्यापार युद्ध शुरू किया है, चीन-अमेरिका व्यापार जारी रहा है, और साथ ही चीन का अंतर्राष्ट्रीय बाजार भी विस्तारित हुआ है, जो चीनी अर्थव्यवस्था के लचीलेपन को पूरी तरह से प्रदर्शित करता है। यदि अमेरिका टैरिफ युद्ध के माध्यम से चीनी आयात का जबरन बहिष्कार करता है, तो इसका अमेरिकी लोगों की आजीविका पर भारी प्रभाव पड़ेगा। दूसरी ओर, इन वस्तुओं का उत्पादन संयुक्त राज्य अमेरिका में बिल्कुल भी नहीं किया जा सकता। जबकि चीन घरेलू और अन्य अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों की तलाश करके उत्पाद बिक्री की समस्या का समाधान कर सकता है।
यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि संयुक्त राज्य अमेरिका एक ऐसा देश है जो अधिकार पृथक्करण की प्रणाली का पालन करता है। राष्ट्रपति के पास सारी शक्ति नहीं होती है, तथा कांग्रेस और सुप्रीम कोर्ट दोनों ही राष्ट्रपति पर प्रतिबंध लगा सकते हैं। इन सत्ता संस्थानों के बाहर, अमेरिकी सत्ता का एक अदृश्य हाथ है, जो वॉल स्ट्रीट है। वॉल स्ट्रीट अमेरिकी पूंजीपतियों का आधार शिविर है। यह न केवल अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करता है, बल्कि कुछ हद तक विश्व अर्थव्यवस्था को भी नियंत्रित करता है। सतह पर, टैरिफ युद्ध अमेरिकी सरकार द्वारा शुरू किया गया है, लेकिन वास्तव में टैरिफ युद्ध की विकास दिशा वॉल स्ट्रीट के हाथ में नियंत्रित है। अब तक अमेरिका का राष्ट्रीय ऋण 36 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। यदि वित्तीय संकट उत्पन्न होता है तो यह संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए घातक होगा। इसलिए अमेरिकी सरकार के सभी नीतिगत उपाय अंततः वॉल स्ट्रीट के आर्थिक संकेतों पर आधारित होंगे। मेरा मानना है कि भविष्य में सभी पक्ष स्थिति के विकास को नियंत्रित करने के लिए तर्कसंगत शक्ति पर निर्भर रहेंगे और सभी के हितों के संतुलन के साथ टैरिफ युद्ध को समाप्त करेंगे।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)

