क्या आपको याद है वो दौर… जब भारत और चीन के बीच सिर्फ़ तल्खी और तनाव की खबरें आती थीं? पिछले पाँच साल… जी हाँ, पूरे पाँच साल हमने सरहद पर जमी उस बर्फ को देखा है, जो पिघलने का नाम ही नहीं ले रही थी। लेकिन कहते हैं न, कि वक्त हर ज़ख्म का मरहम होता है। और साल 2025 तो मानो दोनों पड़ोसियों के लिए मरहम और नई उम्मीद की किरण लेकर आया है।
पिछले पाँच वर्षों से भारत और चीन के बीच जो तनाव और दूरी बनी हुई थी, वह 2025 में अलविदा कहने लगी है। साल 2025 दोनों देशों के राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ का साल है, और यह संयोग नहीं लगता कि इसी साल दोनों पड़ोसी देश आपस में सेतु निर्माण की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। जनवरी से दिसंबर तक, हर महीने ने कोई न कोई सकारात्मक संकेत दिया है।
सबसे पहले चलते हैं अगस्त 2025 के अंत में। नज़ारा था चीन के ख़ूबसूरत शहर थ्येनचिन का। वहां शांगहाई सहयोग संगठन (SCO) का 25वां शिखर सम्मेलन चल रहा था। पूरी दुनिया की नज़रें एशिया के दो बड़े देशों के शीर्ष नेताओं पर टिकी थीं। और तभी वो पल आया, जिसका इंतज़ार पिछले सात सालों से हो रहा था। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग आमने-सामने आए। सात साल की लंबी ख़ामोशी टूटी। वहां जो कहा गया, वो सिर्फ़ शब्द नहीं थे, बल्कि भविष्य का रोडमैप था। दोनों नेताओं ने एक सुर में कहा, “भारत और चीन प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि विकास के साथी हैं।”
ज़रा सोचिए, यह कितना बड़ा बयान है। शी चिनफिंग ने साफ़ किया कि अगर हम इसी दिशा में चले, तो रिश्ता टिकेगा भी और आगे भी बढ़ेगा। वहीं, पीएम मोदी ने बहुत ही सधे हुए शब्दों में जवाब दिया कि हमारे बीच जो मतभेद हैं, उन्हें विवाद नहीं बनने देना है। रिश्ते की नींव ‘विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता‘ पर होनी चाहिए। इस मुलाक़ात ने मानो जमी हुई बर्फ पर हथौड़ा मार दिया।
अब ज़रा कूटनीति से हटकर आम आदमी की बात करते हैं। अगर कोई भारतीय या चीनी नागरिक दूसरे देश जाना चाहते हैं, तो 2025 में उनका रास्ता आसान हो गया है। जुलाई 2025 में भारत ने चीनी टूरिस्ट्स के लिए पाँच साल के बाद फिर से टूरिस्ट वीजा जारी करना शुरू किया। यह एक बड़ा कदम था। चीनी दूतावास ने 2025 के पहले तीन महीनों में ही 85,000 से ज्यादा भारतीयों को वीजा दिए। यह संख्या बताती है कि आम जनता के बीच कितना स्नेह बरकरार है।
और फिर आया 26 अक्तूबर, 2025 का दिन। यह तारीख भारत-चीन संबंधों के इतिहास में गोल्डन अक्षरों में दर्ज हो जाएगी। इसी दिन इंडिगो की पहली सीधी फ्लाइट कोलकाता से क्वांगचो के लिए उड़ी। 2020 के बाद यह पहली सीधी फ्लाइट थी। कोविड महामारी और सीमा तनाव के कारण ये उड़ानें रुकी थीं। जनवरी 2020 में हर महीने 500 से ज्यादा सीधी उड़ानें चलती थीं। नवंबर 2025 तक चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस ने दिल्ली-शांगहाई रूट पर सेवा शुरू कर दी, और एयर इंडिया भी इसी दिशा में काम कर रही है। यह सिर्फ यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि व्यापार, शिक्षा और जनता-से-जनता संपर्क को मजबूत करने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
धार्मिक दृष्टि से भी 2025 एक महत्वपूर्ण साल साबित हुआ। कैलाश मानसरोवर यात्रा जो कि हिंदू, बौद्ध, जैन और बोन धर्म मानने वालों के लिए परम पवित्र है, को पाँच सालों के बाद फिर से खोल दिया गया। जून 2025 में पहली बार भारतीय श्रद्धालुओं के समूह चीन के शित्सांग स्वायत्त प्रदेश पहुँचे। भगवान शिव का निवास माना जाने वाला कैलाश और पवित्र मानसरोवर झील तक इन श्रद्धालुओं की तीर्थयात्रा भारत-चीन मैत्री का प्रतीक बन गई।
अगस्त 2025 में एक और खुशखबरी आई। भारत और चीन ने लिपुलेख, शिपकीला और नाथुला… ये तीनों दर्रे के माध्यम से सीमावर्ती व्यापार को फिर से खोल दिए गये। ये दर्रे पहाड़ी इलाकों में सदियों से व्यापार की लाइफलाइन रहे हैं। इनके बंद होने से हिमाचल प्रदेश और सिक्किम के छोटे व्यापारियों को बहुत नुकसान हो रहा था। लेकिन अब वहां फिर से चहल-पहल शुरू हो गई है।
अब आप सोच रहे होंगे कि क्या सीमा विवाद ख़त्म हो गया? देखिए, सच यह है कि तनाव पूरी तरह ख़त्म नहीं हुआ है, लेकिन उसे सुलझाने का तरीका बदल गया है। 2025 में कई बैक-चैनल वार्ताएं हुईं। जून 2024 में 23वीं बैठक बीजिंग में हुई, जिसमें सीमा प्रबंधन के लिए एक एक्सपर्ट ग्रुप और एक वर्किंग ग्रुप बनाया गया। ये दोनों संस्थाएँ सीमा विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से हल करने पर काम करेंगे। अब दोनों देशों ने तय किया है कि वे नदियों का डेटा साझा करेंगे। साथ ही, दोनों देशों ने 2026 में उच्च-स्तरीय लोगों-से-लोगों के बीच आदान-प्रदान तंत्र बैठक करने पर भी सहमति दी।
कुल मिलाकर साल 2025 ने साबित कर दिया कि भारत-चीन का रिश्ता परिवर्तनशील है। और आने वाले दिन वे इसे और मजबूत करने का मौका देंगे। इतिहास के पन्नों में, 2025 को भारत-चीन संबंधों के पुनरुत्थान का साल के रूप में याद किया जाएगा।
(अखिल पाराशर, चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)