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US Israel Iran war: जानें कौन थे अयातुल्ला अली खामेनेई? कैसे बने अमेरिका और ईरान के लिए बड़ा खतरा

ayatollah ali khamenei

ayatollah ali khamenei

इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिका और इस्राइल ने ईरान के खिलाफ एक संयुक्त और आक्रामक सैन्य अभियान शुरू किया है। राजधानी तेहरान में कई धमाकों की खबर सामने आई है। इन हमलों को ईरान के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमलों की पुष्टि करते हुए ईरानी नागरिकों से अपनी सरकार के खिलाफ खड़े होने की अपील की है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का नाम सबसे आगे है।

हमले और खामेनेई का सीधा संबंध

ताजा हमलों में तेहरान के उन इलाकों को निशाना बनाया गया, जो सीधे तौर पर सुप्रीम लीडर से जुड़े बताए जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान के उत्तर हिस्से में स्थित राष्ट्रपति भवन और खामेनेई के कार्यालय परिसर के पास मिसाइलें गिरीं। अमेरिका और इस्राइल की रणनीति का मुख्य उद्देश्य ईरान के शीर्ष नेतृत्व पर दबाव बनाना था।

मौत की खबर और आधिकारिक पुष्टि

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि हमले के दौरान खामेनेई के कार्यालय को निशाना बनाया गया और उनकी मौत हो गई। ईरानी मीडिया तथा सेना से जुड़े सूत्रों ने इस खबर की पुष्टि करने की बात कही है। ईरान की ताकतवर सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी बयान जारी कर कहा कि देश ने अपना नेता खो दिया है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस खबर को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।

कौन थे अयातुल्ला अली खामेनेई?

86 वर्षीय खामेनेई 1989 से ईरान के सुप्रीम लीडर थे। उन्होंने ईरान के इस्लामी गणराज्य के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के निधन के बाद यह पद संभाला था। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान में धार्मिक नेतृत्व की सर्वोच्च शक्ति सुप्रीम लीडर के पास होती है। खामेनेई देश के आध्यात्मिक प्रमुख होने के साथ-साथ सरकार, सेना और न्यायपालिका पर भी अंतिम निर्णय लेने का अधिकार रखते थे।

पश्चिमी देशों से टकराव की वजह

अपने कार्यकाल के दौरान खामेनेई ने अमेरिका और इस्राइल के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। वे अमेरिका को ईरान का प्रमुख दुश्मन बताते थे और इस्राइल की नीतियों का भी खुलकर विरोध करते थे। ईरान का परमाणु कार्यक्रम इस टकराव की सबसे बड़ी वजह रहा। ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण और नागरिक उद्देश्यों के लिए है, जबकि अमेरिका और इस्राइल का आरोप है कि ईरान गुप्त रूप से परमाणु हथियार विकसित कर रहा है।

ट्रंप और इस्राइली नेतृत्व का सख्त रुख

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इस्राइल के शीर्ष नेताओं ने हाल के समय में खामेनेई के खिलाफ कड़े बयान दिए थे। इस्राइल के रक्षा मंत्री ने कहा था कि इस्राइल के अस्तित्व को चुनौती देने वाला कोई भी नेता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं ट्रंप ने दावा किया था कि उन्हें खामेनेई की लोकेशन की जानकारी है और वे अमेरिका के लिए आसान लक्ष्य हैं। उन्होंने ईरानी जनता से शासन परिवर्तन की अपील भी की।

मध्य पूर्व पर असर

ईरान, अमेरिका और इस्राइल के बीच यह टकराव अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष आने वाले समय में क्षेत्र की दिशा तय कर सकता है।

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