दुनिया के महासागर पृथ्वी की सतह के 70% हिस्से को कवर करते हैं और हमारे मौसम, ऑक्सीजन और अरबों लोगों के जीवन का आधार बनते हैं। हालाँकि, आज ये महासागर जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता की हानि और प्रदूषण जैसे बड़े संकटों का सामना कर रहे हैं। इस स्थिति में, हर साल 8 जून को मनाया जाने वाला विश्व महासागर दिवस हमें याद दिलाता है कि अब सिर्फ़ बात करने का समय नहीं है; कार्रवाई करना ज़रूरी है।
इस साल, थीम है “हमारे महासागर और जलवायु के लिए कार्रवाई को बढ़ावा देना”, जिसका मतलब है कि अब और बात नहीं – सिर्फ़ कार्रवाई! महासागर और जलवायु की रक्षा के लिए संयुक्त कदम उठाने की ज़रूरत है।
वर्ल्ड ओशन डे की शुरुआत और उद्देश्य
विश्व महासागर दिवस पहली बार 1992 में रियो डी जेनेरियो में पृथ्वी शिखर सम्मेलन में प्रस्तावित किया गया था, लेकिन इसे आधिकारिक तौर पर 2008 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता दी गई। तब से, यह हर साल मनाया जाता है। शुरू में, इसका विषय “हमारे महासागर, हमारी जिम्मेदारी” था, लेकिन अब विषय कार्रवाई-उन्मुख हो गए हैं। 2025 के लिए थीम भी इसी दिशा में है – योजना न बनाएं, कुछ करें!
वैश्विक स्तर पर “30x30″ लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसका अर्थ है कि 2030 तक पृथ्वी की 30% भूमि और महासागरों को संरक्षित किया जाना चाहिए। हालाँकि, सच्चाई यह है कि आज केवल 8% महासागर ही संरक्षित हैं। यह स्पष्ट है कि हमें तेजी से काम करना होगा।
समंदर: सिर्फ पानी नहीं, हमारी ज़िंदगी का हिस्सा
समंदर सिर्फ देखने के लिए खूबसूरत नहीं हैं, बल्कि वो धरती का तापमान कंट्रोल करते हैं, 50% ऑक्सीजन देते हैं और हर तीसरे इंसान की रोज़ी–रोटी इन्हीं से चलती है, जैसे– मत्स्य पालन, टूरिज़्म, समुद्री व्यापार।
लेकिन ज़रा सोचिए! हर साल 80 टन प्लास्टिक समंदर में जा रहा है, हद से ज्यादा फिशिंग हो रही है, और एसिड लेवल बढ़ने से कोरल रीफ्स तबाह हो रहे हैं। अगर यही हाल रहा तो कई समुद्री प्रजातियां हमारी आंखों के सामने गायब हो जाएंगी।
भारत का योगदान: महासागर के साथ विकास को संतुलित करना
भारत ने समुद्री संरक्षण की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पर्यावरण मंत्रालय द्वारा निगरानी किए जाने वाले 130 से अधिक समुद्री संरक्षित क्षेत्र (एमपीए) हैं, जिनमें सुंदरबन और मन्नार की खाड़ी जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
भारत ने “प्रोजेक्ट डॉल्फिन” शुरू किया है, जो समुद्री और नदी दोनों डॉल्फ़िन को बचाने पर केंद्रित है। “डुगोंग संरक्षण कार्य बल” भी डुगोंग और उनके समुद्री घास के आवास की रक्षा के लिए काम कर रहा है।
संरक्षण प्रयासों के अलावा, भारत का डीप ओशन मिशन (डीओएम) भी उल्लेखनीय है- लगभग 4,000 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना जिसमें गहरे समुद्र में शोध, खनन और जलवायु संबंधी अध्ययन शामिल हैं। भारत वर्तमान में ऐसी पनडुब्बियाँ विकसित कर रहा है जो 6,000 मीटर तक की गहराई तक पहुँच सकती हैं।
महासागर संरक्षक के रूप में चीन की भूमिका
चीन ने अपने समुद्री परिवेश में 326 से ज़्यादा संरक्षित क्षेत्र स्थापित किए हैं, जो उसकी समुद्री सीमाओं के लगभग 13% हिस्से को कवर करते हैं। यह संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित 10% लक्ष्य से ज़्यादा है।
चीन की नीतियाँ “पारिस्थितिक सभ्यता” पर ज़ोर देती हैं। इसका मतलब है कि विकास के साथ-साथ प्रकृति का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। चाहे मैंग्रोव वनों को बहाल करना हो या दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम चट्टानें बनाना हो, चीन तेज़ी से प्रगति कर रहा है।
चीन की विदेश नीति भी समुद्र की ओर मुड़ गई है। “साझा भविष्य वाले समुद्री समुदाय” के उसके विचार में यह माना जाता है कि समुद्र किसी एक देश का नहीं बल्कि सभी का भविष्य है। बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के ज़रिए, यह कोरल रीफ़ की सुरक्षा और मत्स्य पालन का प्रबंधन करने के लिए कंबोडिया और मैक्सिको जैसे देशों के साथ सहयोग करता है।
इंडिया vs चाइना: अलग रास्ते, एक मंज़िल
भारत की नीति स्थानीय स्तर पर ज़्यादा केंद्रित है- राज्य सरकारें और समुदाय मिलकर काम करते हैं। इससे लोगों की भागीदारी बढ़ती है, लेकिन कई बार क्रियान्वयन में अंतर आ जाता है। वहीं, चीन का मॉडल टॉप-डाउन है, यानी केंद्र सरकार योजना बनाती है और उसे जल्दी लागू करती है।
दूसरी तरफ, तकनीक के मामले में दोनों देश आगे हैं। भारत अपनी लागत कम रखने के लिए तकनीक विकसित कर रहा है, जबकि चीन अंडरवाटर ड्रोन और बड़ी खनन मशीनों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
अब क्या करें? मिलकर समंदर बचाएं
विश्व महासागर दिवस सिर्फ़ एक दिन नहीं है, बल्कि यह हमारी सोच बदलने और साथ मिलकर कुछ करने का अवसर है। भारत और चीन दोनों ने दिखा दिया है कि महासागरों की रक्षा करना सिर्फ़ एक देश का काम नहीं है, बल्कि यह सबकी ज़िम्मेदारी है।
अगर हम 2030 तक महासागर और पृथ्वी का 30% बचाना चाहते हैं, तो हमें अभी से मिलकर काम करना होगा। तभी आर्थिक विकास और पर्यावरण एक साथ रह पाएँगे। तो, इस विश्व महासागर दिवस पर, आइए महासागरों के लिए कदम उठाएँ क्योंकि महासागरों को बचाने से ही कल बचेगा!
(अखिल पाराशर, चाइना मीडिया ग्रुप (CGTN हिन्दी), बीजिंग)