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शी चिनफिंग ने एपेक नेताओं की 32वीं अनौपचारिक बैठक के दूसरे चरण में भाग लिया

November 1, 2025

शी चिनफिंग ने एपेक नेताओं की 32वीं अनौपचारिक बैठक के दूसरे चरण में भाग लिया

स्थानीय समयानुसार 1 नवंबर की सुबह, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने दक्षिण कोरिया के ग्योंगजू में एपेक नेताओं की 32वीं अनौपचारिक बैठक के दूसरे चरण में भाग लिया और “संयुक्त रूप से एक सतत और बेहतर कल का निर्माण” शीर्षक एक महत्वपूर्ण भाषण दिया। शी चिनफिंग ने बताया कि वर्तमान में तकनीकी क्रांति और औद्योगिक परिवर्तन गहराई से विकसित हो रहे हैं, जिससे मानव समाज के लिए नई संभावनाएँ खुली हैं। साथ ही, विश्व अर्थव्यवस्था अपर्याप्त विकास गति, बढ़ते वैश्विक विकास घाटे और जलवायु परिवर्तन, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा जैसी बढ़ती चुनौतियों का सामना कर रही है। एशिया-प्रशांत अर्थव्यवस्थाओं को आपसी लाभ वाले सहयोग को मजबूत करना चाहिए, नए अवसरों का लाभ उठाना चाहिए, नई चुनौतियों का मुकाबला करते हुए संयुक्त रूप से एक सतत और बेहतर कल का निर्माण करना चाहिए।

शी चिनफिंग ने तीन सुझाव दिए: पहला, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में नवोन्मेषी विकास के नए लाभों को आकार देने के लिए डिजिटल और बुद्धिमान सशक्तिकरण को मजबूत करें। दूसरा, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सतत विकास के लिए एक नया प्रतिमान स्थापित करने हेतु हरित और निम्न-कार्बन विकास पर जोर दें। तीसरा, समावेशी और साझा विकास को बढ़ावा देते हुए एशिया-प्रशांत क्षेत्र में समावेशी विकास के नए रूप का प्रदर्शन करें। बैठक में परिणाम दस्तावेज जारी किए गए, जिनमें “2025 एपेक नेताओं की ग्योंगजू घोषणा”, “एपेक कृत्रिम बुद्धिमत्ता पहल” और “जनसंख्या परिवर्तन से निपटने के लिए एपेक फ्रेमवर्क सहयोग दस्तावेज” शामिल हैं। उधर, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 32वीं एपेक आर्थिक नेताओं की अनौपचारिक बैठक के कार्यभार ग्रहण समारोह में भाग लिया और घोषणा की कि चीन अगले साल नवंबर में क्वांगतोंग प्रांत के शनचन शहर में 33वीं एपेक आर्थिक नेताओं की अनौपचारिक बैठक की मेज़बानी करेगा।

शी चिनफिंग ने इस बात पर ज़ोर दिया कि एपेक एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक सहयोग तंत्र है, जो इस क्षेत्र में विकास और समृद्धि को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। एशिया-प्रशांत समुदाय का निर्माण ही एशिया-प्रशांत क्षेत्र में दीर्घकालिक विकास और समृद्धि प्राप्त करने का एकमात्र तरीका है, और यह सभी पक्षों का साझा दृष्टिकोण भी है। 2026 में, चीन तीसरी बार एपेक की मेज़बानी करेगा। चीन इस अवसर का लाभ उठाकर सभी पक्षों के साथ मिलकर एशिया-प्रशांत समुदाय का निर्माण करने, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में विकास और समृद्धि को बढ़ावा देने, और एशिया-प्रशांत मुक्त व्यापार क्षेत्र, कनेक्टिविटी, डिजिटल अर्थव्यवस्था और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने, एशिया-प्रशांत विकास में अधिक ऊर्जा और गति लाने तथा एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लोगों को अधिक लाभ पहुँचाने के लिए तैयार है।

शी चिनफिंग ने बताया कि प्रशांत तट पर स्थित शनचन कुछ ही दशकों में एक पिछड़ा मछुआरा गाँव से एक आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय महानगर में बदल गया है। यह चीनी लोगों द्वारा रचित विश्व विकास के इतिहास में एक चमत्कार है, और चीन द्वारा आपसी लाभ व उभय जीत वाले खुलेपन की रणनीति अटूट रूप से लागू करने की भी एक महत्वपूर्ण झलक है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सभी पक्ष अगले वर्ष शनचन में एशिया-प्रशांत विकास की भव्य योजना पर चर्चा करने और संयुक्त रूप से इस क्षेत्र के लिए एक बेहतर कल का निर्माण करने के लिए एकत्रित होंगे। उपस्थित अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं ने 2026 में चीन द्वारा एपेक की मेजबानी का सक्रिय रूप से समर्थन किया, चीन की मेजबानी की विचारधारा से सहमति व्यक्त की, तथा एपेक “चीन वर्ष” की पूर्ण सफलता की आशा व्यक्त की, जिससे क्षेत्रीय सहयोग में योगदान मिलेगा तथा समान विकास और समृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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