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शी चिनफिंग ने रूसी राष्ट्रीय डूमा के अध्यक्ष से मुलाकात की

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 26 अगस्त को सुबह राजधानी पेइचिंग स्थित जन वृहद भवन में रूसी राष्ट्रीय डूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव विक्टरोविच वोलोडिन के साथ मुलाकात की।

इस मौके पर शी चिनफिंग ने कहा कि चीन-रूस संबंध अशांत और बदलती दुनिया में सबसे स्थिर, सबसे परिपक्व और सबसे समृद्ध रणनीतिक विषय वाले बड़े देशों के संबंध हैं। चीन-रूस संबंधों के उच्च स्तरीय विकास को लगातार बढ़ावा देना दोनों देशों के लोगों के मूल हितों के अनुरूप है और विश्व शांति का स्थिर स्रोत भी है।

शी चिनफिंग ने कहा कि इस साल मई में मैंने रूस की राजकीय यात्रा की और सोवियत संघ के महान युद्ध की विजय की 80वीं वर्षगांठ मनाने के समारोह में भाग लिया। अगले हफ्ते चीन चीनी जनता के जापानी आक्रमण विरोधी युद्ध और विश्व फासीवाद विरोधी युद्ध की विजय की 80वीं वर्षगांठ मनाने के समारोह का आयोजन करेगा। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान एशिया और यूरोप में मुख्य युद्धक्षेत्र के रूप में चीन और सोवियत संघ ने जापानी सैन्यवाद और जर्मन फासीवाद के आक्रमण का विरोध करने में महान राष्ट्रीय बलिदान दिए और द्वितीय विश्व युद्ध की विजय में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

शी चिनफिंग ने कहा कि हमारे दोनों पक्षों को पारंपरिक मित्रता का विकास कर आपसी रणनीतिक विश्वास गहराने के साथ विभिन्न क्षेत्रों में आदान-प्रदान और सहयोग मजबूत करना चाहिए। इसके साथ हमें अपने सुरक्षा व विकास के हितों की रक्षा करने के साथ “वैश्विक दक्षिण” देशों को एकजुट कर सच्चे बहुपक्षवाद पर कायम रहना होगा। ताकि अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था का विकास  अधिक न्यायसंगत और उचित दिशा में बढ़ सके।

शी चिनफिंग ने यह भी कहा कि कानून निर्माण संगठनों में सहयोग नए युग में चीन-रूस व्यापक रणनीतिक साझेदारी में अपरिहार्य भाग है। आशा है कि दोनों पक्ष सक्रियता से राष्ट्रीय शासन और विधायी अनुभव में आदान-प्रदान करेंगे, ताकि नई स्थिति में चीन-रूस रणनीतिक सहयोग और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के लिए और मजबूत विधायी गारंटी प्रदान की जा सके।

वहीं, वोलोडिन ने शी चिनफिंग को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन का स्नेहपूर्ण संवेदना पहुंचाया। वोलोडिन ने कहा कि दोनों नेताओं के रणनीतिक नेतृत्व में रूस-चीन संबंधों का गहरा विकास हुआ और इसमें व्यापक उपलब्धियां हासिल हुईं। रूसी राष्ट्रीय डूमा दोनों नेताओं की अहम सहमतियों का कार्यान्वयन कर विधायी संगठनों में आदान-प्रदान और सहयोग मजबूत करने में जुटा है, ताकि दोनों देशों के संबंधों में ज्यादा उपलब्धियां हासिल हो सके।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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