Last Updated: November 7, 2026

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शी चिनफिंग के रूपकों में एशिया-प्रशांत एकता और विकास की झलक

October 30, 2025

शी चिनफिंग के रूपकों में एशिया-प्रशांत एकता और विकास की झलक

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यांग के निमंत्रण पर, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग 30 अक्टूबर से 1 नवंबर तक दक्षिण कोरिया के ग्योंगजू का दौरा करेंगे। इस दौरान वे 32वीं एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) नेताओं की अनौपचारिक बैठक में भाग लेंगे और दक्षिण कोरिया की राजकीय यात्रा भी करेंगे।

वर्ष 2013 से अब तक, शी चिनफिंग ने एपेक नेताओं की अनौपचारिक बैठकों में भाग लेते हुए कई मौकों पर ऐसे भाषण दिए हैं जिनमें उन्होंने जीवंत रूपकों का प्रयोग कर एशिया-प्रशांत सहयोग के उज्ज्वल भविष्य और साझा भाग्य वाले समुदाय की अवधारणा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।

शकरकंद का रूपक: चीन की जड़ें हमेशा एशिया-प्रशांत में रहेंगी

नवंबर 2016 में पेरू में आयोजित एपेक सीईओ शिखर सम्मेलन में शी चिनफिंग ने कहा था, “शकरकंद की बेलें चारों दिशाओं में फैलती हैं, लेकिन उसका कंद हमेशा अपनी जड़ में बढ़ता है। चीन भी चाहे कितना विकसित हो जाए, उसकी जड़ें हमेशा एशिया-प्रशांत में ही रहेंगी।” लैटिन अमेरिका की मूल फसल शकरकंद का यह उदाहरण चीन की इस प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि वह क्षेत्रीय देशों के साथ मिलकर साझा विकास के लिए काम करता रहेगा।

साल 1991 में एपेक में शामिल होने के बाद से चीन ने व्यापार और निवेश को सरल बनाने में लगातार योगदान दिया है। अब वह अधिकांश सदस्य देशों के लिए एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार और निर्यात बाजार बन चुका है। साल 2025 की पहली तीन तिमाहियों में ही चीन और अन्य एपेक अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार 194.1 खरब युआन तक पहुंच गया, जो चीन के कुल आयात-निर्यात का 57.8 प्रतिशत है।

पारंपरिक चीनी चिकित्सा का रूपक: जहाँ प्रवाह हो, वहाँ दर्द नहीं

कनेक्टिविटी शी चिनफिंग की दृष्टि का केंद्रीय तत्व है। उन्होंने एपेक सदस्यों के बीच सहयोग और संपर्क की महत्ता को समझाने के लिए पारंपरिक चीनी चिकित्सा का उदाहरण दिया:“जहाँ मुक्त प्रवाह होता है, वहाँ दर्द नहीं होता; जहाँ दर्द होता है, वहाँ रुकावट होती है।” आज आधे से अधिक एपेक सदस्य “बेल्ट एंड रोड” पहल से जुड़े हैं। जकार्ता-बांडुंग हाई-स्पीड रेलवे और चीन-लाओस रेलवे जैसी परियोजनाएं इस क्षेत्रीय संपर्क की जमीनी मिसाल हैं। शी चिनफिंग के अनुसार, “कनेक्टिविटी एशिया-प्रशांत अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा को सुचारू रूप से प्रवाहित करती है।”

21 हंसों का रूपक: सहयोग से ऊँची उड़ान

वर्ष 2014 में, चीन ने अपनी राजधानी पेइचिंग में स्थित येनशी झील में 22वीं APEC नेताओं की अनौपचारिक बैठक की मेजबानी की। चीनी भाषा में येनशी का अर्थ हंस ठहरने की जगह होता है। अपने उद्घाटन भाषण में, राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कहा कि APEC के 21 सदस्य 21 हंसों के समान हैं। उनका कहना है कि “आज हम सहयोग को मजबूत करने, एक साथ उड़ान भरने और एशिया-प्रशांत विकास के लिए एक नया दृष्टिकोण लिखने के उद्देश्य से येनशी झील पर एकत्र हुए हैं।” उन्होंने विशेष रूप से APEC सदस्यों के बीच एकता के महत्व पर जोर दिया: “एक फूल से वसंत नहीं आता, और एक अकेला हंस झुंड नहीं बना सकता।”

नाव का रूपक: एक ही दिशा में मिलकर सफर

2018 में पापुआ न्यू गिनी की राजधानी पोर्ट मोरेस्बी में आयोजित एपेक सीईओ शिखर सम्मेलन में शी चिनफिंग ने कहा, “हम सब एक ही नाव में सवार हैं। विकास सहयोग की योजना हमें साथ मिलकर बनानी होगी।” उन्होंने सभी देशों से आग्रह किया कि वे “पतवार स्थिर रखें, रास्ता साफ रखें और हवा-लहरों का सामना करते हुए नाव को साथ मिलकर चलाएं।”

एशिया-प्रशांत क्षेत्र दुनिया की एक-तिहाई आबादी, वैश्विक आर्थिक उत्पादन का 60 प्रतिशत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का लगभग आधा हिस्सा समेटे हुए है। यह क्षेत्र आज भी विश्व अर्थव्यवस्था का मुख्य इंजन है। शी चिनफिंग ने “नाव” के रूपक से यह संकेत दिया कि चीन सभी सदस्यों के साथ अच्छे और कठिन समय में कंधे से कंधा मिलाकर चलेगा ताकि क्षेत्र की स्थिरता और समृद्धि बनी रहे।

शी चिनफिंग ने कई बार “नाव” के रूपक का उपयोग यह व्यक्त करने के लिए किया है कि चीन हमेशा सभी सदस्यों के साथ अच्छे और बुरे समय में खड़ा रहेगा, तथा एशिया-प्रशांत क्षेत्र की स्थिर और दीर्घकालिक प्रगति और समृद्ध भविष्य की ओर इसकी यात्रा सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करेगा।

नौकायन में तूफ़ानों का सामना करना अनिवार्य है। वर्तमान में, जब दुनिया उथल-पुथल और परिवर्तन के एक नए दौर में प्रवेश कर रही है, एशिया-प्रशांत क्षेत्र के विकास परिवेश और सहयोग ढाँचे पर इसका प्रभाव पड़ रहा है।

शी चिनफिंग ने एपेक सदस्यों से शांतिपूर्ण विकास, खुलेपन और समावेशिता तथा पारस्परिक सहायता के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र किसी का पिछवाड़ा नहीं है और इसे महाशक्तियों की प्रतिद्वंद्विता का अखाड़ा नहीं बनना चाहिए। एपेक सदस्यों को आपसी लाभ वाले सहयोग को बनाए रखते हुए अपने-अपने लाभों का पूरा उपयोग करते हुए साझा विकास को बढ़ावा देना चाहिए। उनका कहना है कि “हमें विजेता-सभी-लेता है दृष्टिकोण से हटकर जीत-जीत दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, एशिया-प्रशांत विकास के क्षेत्र को बढ़ाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए, और एशिया-प्रशांत क्षेत्र की महान समृद्धि को संयुक्त रूप से बढ़ावा देना चाहिए।”

साझा भविष्य वाले एशिया-प्रशांत समुदाय का निर्माण

एक अधिक शांतिपूर्ण, समृद्ध और सुंदर एशिया-प्रशांत क्षेत्र का निर्माण कैसे करें? राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने चीनी समाधान का प्रस्ताव रखा, यानी कि साझा भविष्य वाले एशिया-प्रशांत समुदाय का निर्माण। वर्ष 2013 में ही, उन्होंने सदस्यों से साझा भविष्य वाले एशिया-प्रशांत समुदाय की अवधारणा को दृढ़तापूर्वक स्थापित करने का आह्वान किया था।

2020 में, राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने वीडियो लिंक के माध्यम से APEC बैठक में भाग लिया, और सभी सदस्यों से एशिया-प्रशांत सहयोग के एक नए चरण की शुरुआत करने, संयुक्त रूप से एक खुले, समावेशी, अभिनव, परस्पर जुड़े और जीत-जीत के साझा भविष्य वाले एशिया-प्रशांत समुदाय का निर्माण करने का आह्वान किया।

अपनी स्थापना के बाद से 30 से अधिक वर्षों में, APEC ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण सबक प्रदान किया है: खुलापन व समावेशिता, आपसी सीख, और आदान-प्रदान। इस मंच पर, चीन ने साझा भविष्य वाले एशिया-प्रशांत समुदाय की अवधारणा को कायम रखते हुए, क्षेत्रीय विकास को निरंतर सशक्त बनाने, एशिया-प्रशांत सहयोग के लिए नई गति प्रदान करने और नए अवसर पैदा करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं, और इस प्रकार अपना योगदान दिया है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग) 

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