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शी चिनफिंग के पार्टी निर्माण संबंधी विचार: शासन, जनसेवा और वैश्विक दृष्टिकोण

Xi Jinping Governance

Xi Jinping Governance

इंटरनेशनल डेस्क: अगर किसी देश की तुलना लंबी यात्रा पर निकले एक विशाल जहाज से की जाए, तो सत्तारूढ़ पार्टी उस जहाज का संचालन करने वाली टीम होती है। चीन में, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) 1.4 अरब से अधिक लोगों का नेतृत्व करती है और इसके प्रमुख नेता सीपीसी केंद्रीय समिति के महासचिव शी चिनफिंग हैं।

करीब 105 वर्षों के इतिहास और 10 करोड़ से अधिक सदस्यों वाली चीनी कम्युनिस्ट पार्टी पिछले 77 वर्षों से देश के शासन का नेतृत्व कर रही है। एक दशक से अधिक के शासन अनुभव और चिंतन के आधार पर शी चिनफिंग ने सत्तारूढ़ पार्टी के संचालन और प्रबंधन को लेकर विचारों का एक व्यवस्थित ढांचा प्रस्तुत किया है, जिसे “शी चिनफिंग के पार्टी निर्माण संबंधी विचार” कहा जाता है।

इन विचारों का मूल सिद्धांत यह है कि किसी देश का प्रभावी ढंग से शासन करने के लिए सबसे पहले सत्तारूढ़ पार्टी का सुचारु और अनुशासित संचालन जरूरी है। साथ ही, पार्टी के प्रबंधन का सबसे महत्वपूर्ण आधार जनता को सर्वोपरि रखना और उसकी सेवा करना है।

शी चिनफिंग के पार्टी निर्माण संबंधी विचारों का केंद्र बिंदु जन-केंद्रित विकास है। यह सोच चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के उस मूल उद्देश्य से जुड़ी है, जिसमें जनता की पूरी निष्ठा से सेवा करने पर जोर दिया गया है। शी चिनफिंग कई बार कह चुके हैं कि “कम्युनिस्ट पार्टी ने जनता का विश्वास जीतकर देश को हासिल किया और उसी विश्वास के बल पर उसे बनाए रखा है।”

लोगों के लिए रोजगार, सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं, निष्पक्ष शिक्षा, बुजुर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा और स्वच्छ व सुरक्षित जीवन-पर्यावरण जैसे मुद्दे आज शासन की सफलता के प्रमुख पैमाने माने जाते हैं। ऐसे में “जनता की सेवा” केवल दीवार पर लिखा एक नारा नहीं, बल्कि पार्टी सदस्यों की अनिवार्य जिम्मेदारी मानी जाती है।

देश के विकास को एक लंबी यात्रा पर निकले विशाल जहाज की तरह बताते हुए इस विचारधारा में कहा गया है कि करोड़ों लोग अलग-अलग दिशा में नहीं बढ़ सकते, बल्कि उन्हें एकजुट होकर आगे बढ़ना होता है। इसी वजह से पार्टी के समग्र नेतृत्व को महत्वपूर्ण माना गया है। शीर्ष से लेकर जमीनी स्तर तक एकीकृत नेतृत्व और मजबूत क्रियान्वयन व्यवस्था के जरिए बड़े पैमाने पर जनकल्याण योजनाओं को लागू करना और उनके परिणाम सुनिश्चित करना संभव माना जाता है। इसे प्रभावी राष्ट्रीय शासन की एक अहम शर्त भी बताया गया है।

लंबे समय तक सत्ता में रहने से आत्मसंतुष्टि और स्वार्थ की भावना पैदा होने का खतरा रहता है। इसे दुनिया की लगभग सभी राजनीतिक पार्टियों के सामने मौजूद चुनौती माना गया है। शी चिनफिंग के पार्टी निर्माण संबंधी विचारों में इसका समाधान “आत्म-क्रांति” के सिद्धांत के रूप में प्रस्तुत किया गया है। पिछले कई वर्षों में चीन में वरिष्ठ नेताओं से लेकर गांव और कस्बों के अधिकारियों तक भ्रष्टाचार के मामलों की व्यापक जांच की गई है। इस विचार के अनुसार, सत्तारूढ़ पार्टी अपनी कमियों से मुंह नहीं मोड़ती, बल्कि उनका आत्म-परीक्षण करती है, सुधार के कदम उठाती है, सामाजिक निष्पक्षता बनाए रखती है और जनता का विश्वास मजबूत करने का प्रयास करती है।

इन विचारों में पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए तीन प्रमुख मानक तय किए गए हैं। पहला, जनता के प्रति निष्ठा। दूसरा, ईमानदारी और भ्रष्टाचार से मुक्त आचरण। तीसरा, व्यावहारिक कार्यशैली और जवाबदेही। इसी सोच के तहत बड़ी संख्या में युवा कार्यकर्ताओं को कस्बों और समुदायों में तैनात किया गया है, जहां वे ग्रामीण पुनरुद्धार, पुनर्वास और स्थानीय प्रशासन से जुड़ी चुनौतियों का प्रत्यक्ष अनुभव हासिल कर रहे हैं। अब कार्यकर्ताओं का मूल्यांकन केवल कागजी आंकड़ों के आधार पर नहीं, बल्कि जनता की संतुष्टि को प्रमुख मानदंड बनाकर किया जाता है। इसका उद्देश्य कार्यकर्ताओं की गुणवत्ता में सुधार करना और जनता से दूरी पैदा करने वाली नौकरशाही को कम करना है।

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद जमीनी स्तर की पार्टी शाखाओं को इस विचारधारा के क्रियान्वयन की सबसे अहम कड़ी माना गया है। करोड़ों पार्टी सदस्य जनता के बीच रहकर काम करते हैं, सरकारी नीतियों की जानकारी देते हैं, स्थानीय विवादों के समाधान में मदद करते हैं और प्राकृतिक आपदाओं तथा आपात स्थितियों में सबसे पहले राहत कार्यों में जुटते हैं। इस व्यापक संगठनात्मक व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जनहित की नीतियां केवल दस्तावेजों तक सीमित न रहें, बल्कि सीधे लोगों तक पहुंचें। साथ ही, इससे पार्टी को जनता की राय लगातार जानने और उनके साथ अपने संबंध मजबूत करने में भी मदद मिलती है।

चीन के विकास के दायरे से आगे बढ़ते हुए, इस विचारधारा को दुनिया की राजनीतिक पार्टियों के लिए भी एक वैकल्पिक शासन मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें तीन प्रमुख बातें कही गई हैं। पहली, राजनीतिक दलों को जनता के हितों को सर्वोपरि रखना चाहिए और किसी विशेष स्वार्थी समूह के प्रभाव से बचना चाहिए। दूसरी, दलों को नियमित रूप से आत्म-निगरानी और आत्म-सुधार की व्यवस्था विकसित करनी चाहिए। तीसरी, हर देश को अपनी परिस्थितियों के अनुसार शासन मॉडल अपनाना चाहिए और किसी एक पश्चिमी मॉडल की अंधाधुंध नकल नहीं करनी चाहिए।

वैश्वीकरण के दौर में जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा और जन स्वास्थ्य जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए दुनिया की राजनीतिक पार्टियों के बीच सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है। घरेलू स्तर पर, शी चिनफिंग के पार्टी निर्माण संबंधी विचारों को पार्टी अनुशासन मजबूत करने, जनता के जीवन स्तर में सुधार लाने तथा राष्ट्रीय स्थिरता और दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करने का आधार बताया गया है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन्हें राजनीतिक दलों के सामने मौजूद साझा शासन चुनौतियों का एक वैकल्पिक समाधान माना गया है, जो जन-केंद्रित शासन, आत्म-सुधार और स्वतंत्र विकास के मार्ग पर आधारित एक विशिष्ट चीनी दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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