हाल ही में ऑस्ट्रेलियन पत्रकार किम बर्गमैन ने शिंच्यांग की यात्रा की। इस यात्रा में उन्होंने इस क्षेत्र के भू-राजनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहलुओं को गहराई से समझने की कोशिश की है। किम ने“शिंच्यांग: एशिया के केंद्र में चीन की रणनीतिक धुरी”शीर्षक के साथ अपनी इस यात्रा की रिपोर्टिंग की। इस रिपोर्ट में किम लिखते हैं कि :-
चीन का पश्चिमी क्षेत्र शिंच्यांग उइगुर स्वायत्त प्रदेश सदियों से एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र रहा है। यह वही इलाका है जहाँ से प्राचीन रेशम मार्ग गुजरता था, जो चीन को एशिया, मध्यपूर्व और यूरोप से जोड़ता था। आज यह पुराना रास्ता चीन की आधुनिक बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के रूप में पुनर्जीवित हो रहा है, जो लगभग 150 देशों के साथ चीन के आर्थिक सम्बंधों को मजबूत करने की दिशा में एक विशाल परियोजना है।
शिंच्यांग की राजधानी उरुमची अब एक जीवंत महानगर है, जहाँ से रोज़ यूरोप के लिए कई मालगाड़ियाँ रवाना होती हैं। यह शहर दुनिया में समुद्र से सबसे दूर स्थित राजधानी है। आधुनिक रेलमार्गों और हवाई अड्डे के कारण अब उरुमची को चीन का “अंतरराष्ट्रीय भूमि बंदरगाह” कहा जाता है।
अतीत की परछाइयाँ और वर्तमान की चुनौती को देखते हुए किम लिखते हैं कि-
इतिहास में यह क्षेत्र ब्रिटिश साम्राज्य और रूस के बीच “ग्रेट गेम” का मैदान रहा था। आज भी यहाँ चीन को धार्मिक उग्रवादियों व कट्टरपंथियों से सबसे बड़ा खतरा महसूस होता है। रिपोर्ट के अनुसार, 2014 और 2017 में चीन ने जिस “कठोर सुरक्षा कार्रवाई” को अंजाम दिया, वह कई आतंकवादी घटनाओं के बाद हुई — जिनमें उरुमची दंगे (2009), कुनमिंग रेलवे स्टेशन हमला (2014) और बीजिंग के तियानआनमेन स्क्वायर हमला (2013) शामिल हैं।
किम का कहना है कि पश्चिमी मीडिया में इन हमलों की जानकारी बहुत कम दी जाती है, जबकि इसी कारण से चीन ने सख्त सुरक्षा उपाय अपनाए।
रिपोर्ट में कहा गया कि 2016 के बाद से कोई बड़ा आतंकवादी हमला नहीं हुआ, लेकिन सुरक्षा सतर्कता जारी है। अब सरकार का फोकस ग्रामीण उइगुर समुदाय के जीवनस्तर को ऊँचा उठाने और उन्हें आधुनिक रोजगार से जोड़ने पर है।
सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन में पत्रकार ने शिंच्यांग में उइगुर संस्कृति के संरक्षण के कई प्रयास देखे, जैसे स्थानीय भाषाओं में अख़बार, रेडियो और टीवी चैनल। उरुमची में एक इस्लामिक कॉलेज भी देखा गया जहाँ 1000 से अधिक छात्र इमाम बनने की ट्रेनिंग ले रहे थे।
चीन को आशंका है कि सीरिया और अफगानिस्तान में सक्रिय उइगुर लड़ाके (करीब 20,000 की संख्या बताई गई) भविष्य में वापस लौटकर शिंच्यांग में अस्थिरता फैला सकते हैं। इसीलिए चीन अफगान सीमा पर ड्रोन निगरानी और आर्थिक सहयोग बढ़ा रहा है, ताकि कट्टरपंथ को रोका जा सके।
किम बर्गमैन का निष्कर्ष यह है कि चीन शिंच्यांग में सामाजिक स्थिरता और आर्थिक विकास दोनों को साथ लेकर चलने की कोशिश कर रहा है।उनके अनुसार, “उइगुर संस्कृति के नरसंहार” के दावे ज़मीन पर देखे गए हालात से मेल नहीं खाते। क्षेत्र सुरक्षित, सांस्कृतिक रूप से विविध और पर्यटकों के लिए आकर्षक बताया गया है।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)

