जम्मू-कश्मीर: श्रीनगर में तेजी से हो रहे शहरी विस्तार का पर्यावरण पर असर अब व्यापक रूप से दिखाई देने लगा है। वर्ष 2001 से 2021 के बीच शहर में हुए बदलावों पर आधारित एक नए अध्ययन के अनुसार, आकलन किए गए क्षेत्र का 58.3 प्रतिशत हिस्सा ‘खराब’ या ‘बहुत खराब’ पर्यावरणीय गुणवत्ता की श्रेणी में आता है। अध्ययन में बढ़ते शहरीकरण, वनस्पति क्षेत्र में कमी, सतही तापमान में वृद्धि और PM2.5 प्रदूषण को पर्यावरणीय गिरावट से जोड़ा गया है।
20 वर्षों के बदलाव का किया गया अध्ययन
“Quantifying the Environmental Impacts of Urban Expansion in Srinagar City, Jammu & Kashmir, India through Remote Sensing and Geostatistical Analysis” शीर्षक वाले इस अध्ययन में वर्ष 2001 से 2021 तक श्रीनगर में हुए पर्यावरणीय और भूमि उपयोग संबंधी बदलावों का विश्लेषण किया गया।
अध्ययन अमजद अली, खेराज और अरशद अहमद द्वारा किया गया और 2026 में GeoJournal में प्रकाशित हुआ। शोधकर्ताओं ने उपग्रह तस्वीरों और भू-स्थानिक आंकड़ों की मदद से दो दशकों में शहर के पर्यावरण में आए बदलावों का आकलन किया।
तीन प्रमुख संकेतकों के आधार पर तैयार किया पर्यावरण गुणवत्ता सूचकांक
शोधकर्ताओं ने पर्यावरणीय स्थिति को मापने के लिए Environmental Quality Index (EQI) विकसित किया। इसमें तीन प्रमुख संकेतकों को शामिल किया गया—भूमि की सतह का तापमान, वनस्पति आवरण और PM2.5 प्रदूषण।
इस सूचकांक के आधार पर क्षेत्रों को पांच श्रेणियों बहुत अच्छा, अच्छा, मध्यम, खराब और बहुत खराब में वर्गीकृत किया गया। अध्ययन के अनुसार, अधिक EQI मूल्य पर्यावरणीय अभाव के अधिक स्तर को दर्शाता है।
मध्य और दक्षिण-पश्चिमी श्रीनगर पर अधिक दबाव
अध्ययन में पाया गया कि पर्यावरणीय गिरावट श्रीनगर के सभी हिस्सों में समान नहीं है। शहर के मध्य और दक्षिण-पश्चिमी हिस्से विशेष रूप से प्रभावित पाए गए हैं।
इन क्षेत्रों में सतही तापमान में वृद्धि, वनस्पति में कमी और सूक्ष्म कण प्रदूषण यानी PM2.5 के अधिक स्तर की समस्या देखी गई। शोधकर्ताओं ने इन बदलावों को शहरी भीड़भाड़, परिवहन ढांचे और औद्योगिकीकरण से जोड़ा है।
तेजी से बढ़े निर्मित क्षेत्र
अध्ययन में 2001 से 2021 के बीच श्रीनगर के भूमि उपयोग में आए बदलावों का भी विश्लेषण किया गया। इस दौरान निर्मित क्षेत्रों यानी इमारतों, सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे वाले क्षेत्रों में उल्लेखनीय विस्तार और घनत्व बढ़ा।
कई ऐसे क्षेत्र, जहां पहले खुली या कम विकसित भूमि थी, वहां निर्माण गतिविधियां बढ़ीं। वहीं पहले से शहरीकृत इलाकों में भी निर्माण का घनत्व बढ़ा। शोधकर्ताओं के अनुसार यह प्रक्रिया आबादी के दबाव और आर्थिक गतिविधियों के चलते शहर के अंदर नए निर्माण तथा बाहरी विस्तार, दोनों के रूप में सामने आई।
शहरीकरण बढ़ने के साथ बढ़ा पर्यावरणीय दबाव
अध्ययन में शहरीकरण और पर्यावरणीय तनाव के बीच स्पष्ट संबंध सामने आया है। खुले और वनस्पति वाले क्षेत्रों के भवनों, सड़कों तथा अन्य बुनियादी ढांचे में बदलने से वनस्पति आवरण कम हुआ, जबकि सतही तापमान और प्रदूषण में वृद्धि हुई।
शोधकर्ताओं के अनुसार श्रीनगर की पर्यावरणीय गिरावट को किसी एक समस्या तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। तेजी से शहरीकृत क्षेत्रों में बढ़ती गर्मी, घटती वनस्पति और अधिक PM2.5 प्रदूषण एक साथ पर्यावरण पर दबाव बढ़ा रहे हैं।
हरित बुनियादी ढांचे और प्रदूषण नियंत्रण पर जोर
अध्ययन में श्रीनगर के भविष्य के लिए एकीकृत शहरी नियोजन, हरित बुनियादी ढांचे के विस्तार और प्रदूषण नियंत्रण के मजबूत उपायों की जरूरत पर जोर दिया गया है।
शोधकर्ताओं ने इन सुझावों को संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-11 (SDG 11) से जोड़ा है, जिसका उद्देश्य शहरों और मानव बस्तियों को समावेशी, सुरक्षित, लचीला और टिकाऊ बनाना है।
तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच संतुलन की जरूरत
20 वर्षों के उपग्रह आंकड़ों पर आधारित यह अध्ययन संकेत देता है कि श्रीनगर में तेजी से हो रहे शहरी विस्तार के पर्यावरणीय प्रभाव अब केवल कुछ सीमित क्षेत्रों तक नहीं रह गए हैं। 58.3 प्रतिशत आकलित क्षेत्र का खराब या बहुत खराब पर्यावरणीय गुणवत्ता श्रेणी में होना शहरी नियोजन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती को रेखांकित करता है।
अध्ययन के अनुसार श्रीनगर के भविष्य के विकास में निर्माण गतिविधियों के साथ-साथ वनस्पति संरक्षण, प्रदूषण में कमी और बढ़ते शहरी तापमान को नियंत्रित करने के उपायों पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।
📍 Location: Srinagar (Srinagar)
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