जम्मू कश्मीर डेस्कः पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में तेजी से बदलते हालात के बीच इस वर्ष अमरनाथ यात्रा पर ड्रोन और लिक्विड बम हमलों का खतरा मंडरा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा मिले इनपुट के आधार पर हाई अलर्ट जारी किया गया है। इसके मद्देनजर यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। इस बार लिक्विड एक्सप्लोसिव डिटेक्टरों की संख्या बढ़ाई गई है, जबकि हवाई खतरों से निपटने के लिए ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम को भी सुदृढ़ किया गया है।
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यात्रा को आतंकवादी खतरों से सुरक्षित रखने के लिए सेना भी व्यापक सुरक्षा कवच तैयार करने में जुटी है। इसी कड़ी में थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी का उत्तरी कमान दौरा भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के अलर्ट के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय ने यात्रा की निगरानी बढ़ा दी है।
वहीं, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा लगातार समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। 12 जून को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली उच्चस्तरीय बैठक में भी अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा होगी। बैठक में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, सेना और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
यात्रा मार्ग से जुड़े वन क्षेत्रों, पहाड़ी इलाकों और मैदानी क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की मजबूत तैनाती की जा रही है। एडवांस सिक्योरिटी चेक के साथ-साथ यात्रियों की निगरानी भी बढ़ाई जाएगी। यात्रा मार्ग पर भंडारा लगाने वाले संगठनों और व्यक्तियों को चार स्तरीय सुरक्षा जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है।
कड़ी सुरक्षा के बीच होगी अमरनाथ यात्रा
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