जम्मू-कश्मीर डेस्क: जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आतंकवाद और देशविरोधी गतिविधियों को लेकर कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने साफ कहा कि देश के खिलाफ गद्दारी करने वालों और आतंकवाद में शामिल लोगों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि आतंकवाद से जुड़े हर मामले की गंभीरता से जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
यह बयान उन्होंने जम्मू विश्वविद्यालय के राजेंद्र सिंह सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया। यह कार्यक्रम प्रो. अशोक कौल की पुस्तक ‘कश्मीर-नेटिविटी रीगेन्ड’ के विमोचन के अवसर पर आयोजित किया गया था। इस दौरान उन्होंने कश्मीरी पंडितों की सम्मानजनक और सुरक्षित घर वापसी को लेकर केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट वादा है कि कश्मीरी पंडितों की अपने घरों में इज्जत और पूरी सुरक्षा के साथ वापसी कराई जाएगी।
उपराज्यपाल ने कहा कि अपनी ही धरती पर अजनबी बन जाना दुनिया के सबसे बड़े दुखों में से एक है। 1989-90 के दौर में जो कश्मीरी पंडित अपने घर-बार छोड़ने को मजबूर हुए, उनका दर्द आज भी कम नहीं हुआ है। समय बीत जाने के बावजूद उस त्रासदी के घाव पूरी तरह नहीं भर पाए हैं। विस्थापित परिवारों ने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी संस्कृति, भाषा, परंपराओं और अध्यात्म को जीवित रखा, जो उनकी अद्भुत दृढ़ता का प्रमाण है।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे इतिहास को न भूलें। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने न केवल कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाया, बल्कि हजारों निर्दोष कश्मीरी मुसलमानों की भी जान ली। कई घटनाएं इतनी दर्दनाक रही हैं कि उन्हें बयान करना भी मुश्किल हो जाता है। पिछले कुछ समय से पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है और उनके रोजगार सहित अन्य जरूरतों को पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उपराज्यपाल ने यह भी कहा कि अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में एक नया विश्वास पैदा हुआ है। अब कश्मीरी पंडित समुदाय की युवा पीढ़ी को यह भरोसा मिला है कि वे बिना डर के अपनी जड़ों की ओर लौट सकते हैं। कश्मीर माइग्रेंट वेब पोर्टल भी शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से उन लोगों की मदद की जा रही है जिनकी जमीनों पर अवैध कब्जा हुआ था।
पुस्तक के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल एक किताब नहीं, बल्कि उस दर्दनाक दौर का दस्तावेज है, जिसने हजारों परिवारों की जिंदगी बदल दी। यह कश्मीरी पंडितों के पलायन की कहानी के साथ-साथ उस गहरे घाव को सामने लाती है, जो वर्षों से सामूहिक स्मृति में मौजूद है। वर्ष 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। विकास की रफ्तार तेज हुई है और दुश्मन ताकतों की उन साजिशों को नाकाम किया गया है, जो यहां के लोगों के सपनों को तोड़ना चाहती थीं। उन्होंने विश्वास जताया कि बहुत जल्द जम्मू-कश्मीर को आतंकवाद के खतरे से पूरी तरह मुक्त कर दिया जाएगा।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने दोहराया कि आतंकवाद से जुड़ी हर घटना की जांच की जाएगी और दोषियों को उनके अंजाम तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आतंकवाद फैलाने वालों और उनके मददगारों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई होगी कि आतंक के पूरे नेटवर्क को करारा संदेश मिले। सरकार का लक्ष्य शांति, सुरक्षा और सम्मान के साथ सभी नागरिकों के लिए बेहतर भविष्य सुनिश्चित करना है।
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