Controversy escalates over sports quota recruitment : जम्मू। जम्मू-कश्मीर स्पोर्ट्स कोटा भर्ती को लेकर जारी विवाद के बीच चयनित खिलाड़ियों ने 223 खिलाड़ियों की सिलेक्शन लिस्ट को सही ठहराया है। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और मेरिट आधारित बताते हुए कहा कि आपत्ति रखने वालों को प्रदर्शन की बजाय कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए।
स्पोर्ट्स कोटा भर्ती पर बढ़ा विवाद
यह बयान जून 2026 में जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा घोषित स्पोर्ट्स कोटा भर्ती पर चल रही बहस के बीच आया है, जिसके तहत 223 बेहतरीन खिलाड़ियों को गजेटेड और नॉन-गजेटेड सरकारी पदों के लिए चुना गया था। जहां चुने गए उम्मीदवारों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे खेल में बेहतरीन प्रदर्शन को मान्यता देने और केंद्र शासित प्रदेश में खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया, वहीं खिलाड़ियों के एक अन्य समूह ने सिलेक्शन प्रोसेस में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। विरोध कर रहे खिलाड़ियों और कुछ विपक्षी नेताओं का दावा है कि शूटिंग और ताइक्वांडो जैसे ओलंपिक खेलों के कई बेहतरीन खिलाड़ियों को नजरअंदाज कर दिया गया, जबकि बड़ी संख्या में गजेटेड पद पेनचक सिलाट जैसे नॉन-ओलंपिक खेलों के खिलाड़ियों को दे दिए गए।
उन्होंने भर्ती प्रक्रिया को “खेल घोटाला” करार दिया है और सिलेक्शन लिस्ट की समीक्षा की मांग की है। हालांकि, चुने गए खिलाड़ियों ने इन आरोपों को सख्ती से खारिज करते हुए कहा कि हर नियुक्ति तय नियमों और योग्यता मानदंडों के अनुसार ही की गई थी। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया मेरिट पर आधारित थी और सभी चुने गए उम्मीदवारों ने अपनी उपलब्धियों के दम पर ये पद हासिल किए हैं। भर्ती का विरोध करने वालों से बात करते हुए खिलाड़ियों ने कहा कि सार्वजनिक विरोध से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अगर किसी उम्मीदवार को लगता है कि उनके साथ अन्याय हुआ है या नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो सही तरीका यह है कि वे अदालतों के जरिए सिलेक्शन को चुनौती दें। खिलाड़ियों ने भर्ती प्रक्रिया का सम्मान करने की भी अपील की और सभी से गलत जानकारी न फैलाने और किसी भी वास्तविक शिकायत के समाधान के लिए कानूनी व्यवस्था पर भरोसा करने का आग्रह किया।